भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव
अल्पसंख्यक सुरक्षा पर कूटनीतिक बयानबाजी, दीपू चंद्र दास हत्याकांड ने उकसाया विवाद
विदेश मंत्रालयों के बीच तीखे प्रत्यारोप; बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'गुमराह करने वाला' बताया, भारत ने अल्पसंख्यक हिंसा की 2,900 घटनाओं का जिक्र किया
नई दिल्ली/ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक तलवारें खिंच गई हैं। बीते सप्ताह भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बर्बर हत्या का जिक्र करते हुए गहरी नाराजगी जताई थी। इसके जवाब में बांग्लादेश ने भारत के बयान को 'लक्षित हमला' करार देते हुए खारिज कर दिया, साथ ही भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते हमलों ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता का प्रतिबिंब है, जहां सांप्रदायिक सद्भाव की लंबी परंपरा खतरे में पड़ रही है।
भारत का सख्त रुख: अल्पसंख्यक हिंसा पर चिंता, 2,900 घटनाओं का हवाला
26 दिसंबर को नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश में व्याप्त अशांति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा को गंभीरता से देख रहा है। जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखना बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है। हमने वहां के झूठे भारत-विरोधी प्रचार को सिरे से खारिज किया है।"
उन्होंने मैमनसिंह के भालुका इलाके में 18 दिसंबर को हुई दीपू चंद्र दास की हत्या का विशेष उल्लेख किया, जहां 'धर्म का अपमान' के आरोप में उग्र भीड़ ने युवक को पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी। जायसवाल ने इस घटना की कड़ी निंदा की और उम्मीद जताई कि अपराधियों को जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। प्रवक्ता ने खुलासा किया कि अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमलों की 2,900 से अधिक घटनाएं विभिन्न स्रोतों से दर्ज की गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्हें महज 'राजनीतिक हिंसा' या 'मीडिया की अतिशयोक्ति' बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बांग्लादेश का पलटवार: 'अपराधी' था मृतक, भारत में हेट क्राइम पर सवाल
रविवार को ढाका में बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एसएम महबूबुल आलम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भारत के बयान का जवाब दिया। आलम ने इसे 'टारगेटेड' और 'गुमराह करने वाला' बताते हुए कहा, "भारत का बयान बांग्लादेश के वास्तविक हालातों को प्रतिबिंबित नहीं करता। हम किसी भी झूठी, अतिरंजित या जानबूझकर गढ़ी गई कहानी को खारिज करते हैं, जो हमारी सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को धूमिल करने का प्रयास है।"
मंत्रालय ने दीपू चंद्र दास को 'लिस्टेड अपराधी' करार देते हुए दावा किया कि उनकी मौत एक मुस्लिम साथी से पैसे वसूलने के दौरान हुई, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। आलम ने कहा, "इस घटना को अल्पसंख्यक उत्पीड़न के रूप में पेश करना भ्रामक है।" बांग्लादेश ने भारत से अपील की कि वह अपने यहां अल्पसंख्यक मुद्दों पर गलत प्रचार से बचे।
इसके साथ ही, बांग्लादेश ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उंगली उठाई। आलम ने कहा, "भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ क्रूर हत्याएं, लिंचिंग, मनमानी गिरफ्तारियां और धार्मिक आयोजनों में बाधा जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं।" उन्होंने विशेष रूप से पिछले सप्ताह क्रिसमस के दौरान पूरे भारत में ईसाइयों पर हुए सामूहिक हमलों का जिक्र किया, जिन्हें 'हेट क्राइम' और 'लक्षित हिंसा' बताया। बांग्लादेश ने भारत से इनकी निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई।
उस्मान हादी हत्याकांड: अभियुक्तों के 'भारत भागने' के दावे का भारतीय खंडन
विवाद को और हवा तब मिली जब बांग्लादेश ने 2024 के छात्र विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के अभियुक्तों के भारत भागने का दावा किया। ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार, अभियुक्त फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख ने मैमनसिंह की हलुआघाट सीमा पार कर मेघालय में शरण ली। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बीएसएफ महानिदेशक और मेघालय के इंस्पेक्टर जनरल ओपी उपाध्याय ने कहा, "ढाका पुलिस का यह दावा भ्रामक और गलत है।" यह घटना उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसक प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई, जहां पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व करने वाले हादी की हत्या ने देशव्यापी आक्रोश पैदा कर दिया।
मैमनसिंह हत्याकांड और अंतरिम सरकार का बयान
मैमनसिंह की घटना ने बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। भालुका पुलिस स्टेशन के ड्यूटी अधिकारी रिपन मियां ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि 18 दिसंबर रात करीब 9 बजे उग्र भीड़ ने दीपू को पैगंबर का अपमान करने के आरोप में पकड़ लिया और क्रूरता से उनकी हत्या कर दी। हालांकि, बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इसकी निंदा करते हुए फेसबुक पर बयान जारी किया: "नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा की कोई जगह नहीं। अपराधियों को सजा मिलेगी।"
20 दिसंबर को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर हुए कथित प्रदर्शन ने भी विवाद को भड़काया। भारत ने इसे 'भ्रामक प्रोपेगैंडा' बताया, जबकि बांग्लादेश ने इसका विरोध दर्ज कराया। यह घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश संबंधों में विश्वास की कमी को उजागर करता है, जहां आर्थिक साझेदारी के बावजूद सांप्रदायिक मुद्दे कूटनीति को प्रभावित कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का कहना है कि यह विवाद दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यक अधिकारों पर एक बड़ा परीक्षण है। यदि समय रहते दोनों देश संवाद बढ़ाएं, तो अपराध और हिंसा की यह चक्र टूट सकती है, वरना सीमा पर तनाव और गहरा सकता है।
