शेख हसीना को शरण देना भारत का मानवीय धर्म: शशि थरूर का बांग्लादेश की यूनुस सरकार को कड़ा जवाब
कांग्रेस सांसद बोले- "संकट में पुराने मित्र का साथ छोड़ना भारत की संस्कृति नहीं"
थरूर ने कानूनी पहलुओं और सीमा सुरक्षा पर भी रखी अपनी राय
बांग्लादेश में हो रहे बवाल और फरवरी में होने वाले चुनाव की बातों और विवादों के बीच मीडिया के सवालों का जवाब देते हुये कांग्रेस सांसद शशि थरूर बोले- "संकट में पुराने मित्र का साथ छोड़ना भारत की संस्कृति नहीं", प्रत्यर्पण की मांग के बीच थरूर ने कानूनी पहलुओं और सीमा सुरक्षा पर भी अपनी राय रखी।
पुरानी दोस्ती और मानवीय दृष्टिकोण
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। थरूर ने स्पष्ट किया कि हसीना को आश्रय देना विशुद्ध रूप से एक मानवीय कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शेख हसीना वर्षों से भारत की एक विश्वसनीय मित्र रही हैं और संकट के समय में एक मेहमान की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।
प्रत्यर्पण की मांग और कानूनी जटिलताएं
बांग्लादेश की वर्तमान यूनुस सरकार द्वारा शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की लगातार मांग की जा रही है। इस पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने कहा कि प्रत्यर्पण संधियों में कई जटिल कानूनी प्रावधान और अपवाद होते हैं, जिन्हें समझना आम आदमी के लिए कठिन है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सरकार सभी संधि दायित्वों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही कोई उचित फैसला लेगी। तब तक, एक मित्र को सुरक्षित रखना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।
घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर कड़ा रुख
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी बात रखते हुए थरूर ने देश की आंतरिक सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सीमा नियंत्रण को और अधिक सख्त करने की वकालत की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अवैध प्रवासी देश में प्रवेश कर रहे हैं, तो यह हमारी सुरक्षा व्यवस्था की विफलता है। थरूर के अनुसार, जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं या जिनके वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी है, सरकार उन्हें निर्वासित करने का पूरा अधिकार रखती है।
धैर्य और कूटनीतिक संयम की सलाह
अंत में थरूर ने इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई भी कदम न उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह मामला दो देशों के भविष्य के संबंधों से जुड़ा है, इसलिए सरकार को गहन विचार-विमर्श और धैर्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत अपनी कूटनीतिक भूमिका को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है।
