नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर
बालेन शाह होंगे पीएम उम्मीदवार, रवि लामिछाने की पार्टी से मिलाया हाथ
सात-सूत्रीय समझौते ने बदला हिमालयी देश का सियासी समीकरण; 5 मार्च के चुनावों में 'घंटी' के निशान पर उतरेंगे बालेन
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में रविवार को उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब काठमांडू के लोकप्रिय मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया। आधी रात तक चली लंबी मैराथन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच एक 7-सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत 35 वर्षीय बालेन शाह आगामी 5 मार्च को होने वाले आम चुनावों में संसदीय दल के नेता और प्रधानमंत्री पद के भावी उम्मीदवार होंगे।
RSP का नाम और सिंबल, बालेन का चेहरा
समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बालेन शाह और उनका संगठन अब राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे। हालांकि बालेन की टीम का RSP में विलय हो गया है, लेकिन पार्टी का नाम, झंडा और चुनाव चिह्न (घंटी) पहले की तरह ही रहेगा। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष की कमान रवि लामिछाने के हाथों में ही रहेगी।
जेन-जी (Gen Z) आंदोलन का असर
नेपाल में हाल ही में हुए युवा आंदोलन (Gen Z Movement) के बाद से ही बालेन शाह को राष्ट्रीय नेतृत्व संभालने के लिए जबरदस्त सोशल मीडिया समर्थन मिल रहा था। भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं ने बालेन को अपना अघोषित नायक मान लिया था। जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन नेपाल की स्थापित पार्टियों—नेपाली कांग्रेस और के.पी. शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी (UML)—के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
इंजीनियर से 'रैपर' और अब पीएम पद के दावेदार
बालेन शाह की राजनीतिक यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है:
शिक्षा: व्हाइट हाउस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (काठमांडू) से सिविल इंजीनियरिंग और कर्नाटक (भारत) के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स।
पहचान: राजनीति में आने से पहले वह एक मशहूर रैपर और इंजीनियर के तौर पर विख्यात थे।
चुनावी आगाज: 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर बने, जहाँ उन्होंने स्थापित दलों के दिग्गजों को भारी मतों से हराया।
समीकरणों में क्या बदलेगा?
भंग हो चुकी संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी रही RSP के साथ बालेन का आना नेपाल की पारंपरिक सत्ता संरचना को हिला सकता है। बालेन ने 2017 में ही संकेत दिया था कि वह देश संवारने के लिए किसी और पर निर्भर रहने के बजाय खुद जिम्मेदारी लेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेपाल के मतदाता इस नई और युवा जोड़ी पर कितना भरोसा जताते हैं।
