₹12,500 करोड़ से बदलेंगे राजस्थान के सरकारी स्कूल? CJP ने कहा- आंदोलन का असर, अब काम दिखाए सरकार

भजनलाल सरकार ने 2026-27 से 2028-29 तक स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 3 साल का रोडमैप तैयार किया; आशुतोष रांका ने इसे ‘School Thik Karo’ की जीत बताया, लेकिन पिछले 6 महीने के काम का हिसाब भी मांगा

राजस्थान सरकार के 12,500 करोड़ रुपये के स्कूल सुधार रोडमैप पर CJP नेता आशुतोष रांका की प्रतिक्रिया

राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹12,500 करोड़ का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया है। CJP के आशुतोष रांका ने इसे ‘School Thik Karo’ अभियान की बड़ी जीत बताते हुए पूछा कि अब तक कितने जर्जर स्कूल और क्लासरूम ठीक हुए।

जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर चल रही बहस के बीच भजनलाल शर्मा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹12,500 करोड़ का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया है, जो 2026-27 से 2028-29 तक लागू किए जाने की बात कही गई है। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इस घोषणा को अपने ‘School Thik Karo’ अभियान की बड़ी जीत बताया है, लेकिन साथ ही सरकार से पूछा है कि पिछले छह महीनों में जमीनी स्तर पर वास्तव में कितना काम हुआ।

₹12,500 करोड़ में क्या होगा?

rajasthan-schools-12500-crore-roadmap-cjp-ashutosh-ranka.jpg
राजस्थान सरकार ने 2026-27 से 2028-29 तक सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹12,500 करोड़ का तीन वर्षीय roadmap तैयार किया है, जिसे CJP ने अपने School Thik Karo अभियान की बड़ी जीत बताया।

ABP/PTI की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार किया गया है। इसके साथ ही दिसंबर 2026 तक ₹1,087 करोड़ की लागत से 9,000 स्मार्ट क्लासरूम, 80,000 टैबलेट और 7,000 ICT लैब स्थापित करने की योजना भी बताई गई है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—₹12,500 करोड़ को एकमुश्त जारी रकम बताना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्ट इसे तीन साल के infrastructure roadmap के रूप में पेश करती हैं।

CJP ने इसे अपनी जीत क्यों बताया?

आशुतोष रांका ने कहा कि रामपुरा की घटना और ‘School Thik Karo’ आंदोलन के बाद सरकार पर सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने का दबाव बढ़ा। उन्होंने इसे “Cockroach is Back” आंदोलन की बड़ी जीत बताया।

रांका का कहना है कि अगर स्कूलों की हालत पर लगातार सवाल नहीं उठते तो सरकार पर इतनी तेजी से स्पष्ट roadmap देने का दबाव नहीं बनता।

यह CJP का राजनीतिक/अभियान संबंधी दावा है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि ₹12,500 करोड़ का roadmap केवल CJP के आंदोलन की वजह से बनाया गया।

रामपुरा में क्या हुआ था?

कुछ दिन पहले जयपुर के पास रामपुरा-कंवरपुरा गांव के एक सरकारी स्कूल को लेकर विवाद हुआ था। CJP कार्यकर्ता स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। रिपोर्टों के मुताबिक वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई और CJP कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की तथा वाहनों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे। जिस स्कूल को लेकर विवाद हुआ, उसकी इमारत को असुरक्षित बताया गया था और बच्चों की कक्षाएं अस्थायी स्थान पर चलाए जाने की खबरें सामने आई थीं।

इसी घटना के बाद सरकारी स्कूलों की हालत और outsiders की school entry को लेकर राजस्थान में बहस तेज हो गई।

सरकार ने स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर भी लगाई थी सख्ती

रामपुरा विवाद के बाद राजस्थान सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में unauthorized entry को लेकर निर्देश जारी किए गए थे। CJP ने इन प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि सरकार स्कूलों की कमियां छिपाना चाहती है।

सरकार का तर्क था कि स्कूलों में सुरक्षा, बच्चों की privacy और पढ़ाई के माहौल को ध्यान में रखते हुए प्रवेश व्यवस्था नियंत्रित करना जरूरी है।

इसलिए इस पूरे विवाद को “सरकार स्कूल दिखाना नहीं चाहती” या “CJP को पूरी तरह रोक दिया गया” जैसी absolute framing में नहीं लिखना चाहिए।

रांका ने सरकार से कौन से सवाल पूछे?

आशुतोष रांका ने सरकार के ₹12,500 करोड़ roadmap का स्वागत किया, लेकिन साथ में कई सवाल भी उठाए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मार्च 2026 में हाईकोर्ट में पहले भी स्कूल infrastructure सुधार का roadmap होने की बात कही थी। उनके मुताबिक तब सरकार ने पांच साल का समय मांगा था, जबकि अब इसे तीन साल में पूरा करने की बात कही जा रही है।

रांका ने पूछा:

पिछले छह महीने में कितने जर्जर स्कूल भवन ठीक किए गए?
कितने नए classrooms बने?
कितनी unsafe buildings की मरम्मत हुई?

उनका कहना है कि roadmap की घोषणा से ज्यादा जरूरी उसकी ground-level progress है।

‘एक दिन में जर्जर स्कूलों की रिपोर्ट कैसे?’

रांका ने एक और आदेश पर सवाल उठाया जिसमें शिक्षा अधिकारियों से जर्जर स्कूल भवनों की रिपोर्ट जल्दी भेजने को कहा गया।

उनका तर्क है कि स्कूल भवन की structural safety का assessment technically qualified engineers से कराया जाना चाहिए, सिर्फ शिक्षकों से नहीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक दिन में सभी स्कूलों का सही infrastructure assessment संभव है।

यह रांका का सवाल है; इसे तकनीकी निष्कर्ष की तरह नहीं लिखा जाना चाहिए।

क्या राजस्थान में Digital Education पर पहले से काम चल रहा था?

हाँ। राजस्थान सरकार के 2026-27 के budget outcome documents से पता चलता है कि ICT और digital initiatives पहले से school education policy का हिस्सा हैं। Budget documents में हजारों schools को ICT और smart classroom initiatives से जोड़ने की योजनाओं का उल्लेख है।

इसलिए यह कहना कि ₹12,500 करोड़ का पूरा school-modernisation विचार CJP आंदोलन के बाद पहली बार पैदा हुआ, उपलब्ध official planning documents से मेल नहीं खाएगा।

ज्यादा सटीक framing होगी:

CJP का दावा है कि उसके आंदोलन ने सरकार पर implementation तेज करने और roadmap को सार्वजनिक रूप से सामने लाने का दबाव बढ़ाया।

स्कूल सुधार की जरूरत क्यों?

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की इमारतों और सुरक्षा को लेकर सरकार खुद भी पिछले महीनों में निर्देश जारी कर चुकी है। जुलाई में शिक्षा विभाग ने जर्जर school buildings को तत्काल चिन्हित करने, unsafe structures को हटाने और damaged buildings की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे।

इससे साफ है कि infrastructure safety पहले से सरकारी agenda में थी, लेकिन CJP विवाद ने इस मुद्दे को राजनीतिक और public visibility ज्यादा दे दी।

9,000 Smart Classrooms और 7,000 ICT Labs

सरकार के ताजा roadmap में infrastructure repair के साथ digital education को भी अहम हिस्सा बनाया गया है।

ABP की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2026 तक:

9,000 Smart Classrooms
80,000 Tablets
7,000 ICT Labs

स्थापित किए जाने की योजना है और इस हिस्से पर करीब ₹1,087 करोड़ खर्च बताया गया है।

लेकिन इस योजना की असली परीक्षा procurement announcements से नहीं, बल्कि यह देखने से होगी कि कितने schools में equipment वास्तव में install हुआ और कितने उपयोग में आए।

क्या CJP का आंदोलन अब खत्म होगा?

आशुतोष रांका ने साफ कहा है कि नहीं।

उन्होंने सरकार के कदम का स्वागत किया, लेकिन कहा कि जब तक ground पर school infrastructure में वास्तविक बदलाव दिखाई नहीं देता, ‘School Thik Karo’ अभियान जारी रहेगा।

यानी अब CJP की strategy केवल खराब स्कूलों की तस्वीरें दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी; वह ₹12,500 करोड़ roadmap के implementation को भी मुद्दा बना सकती है।

अब सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा क्या?

इस घोषणा के बाद सरकार पर तीन बड़े सवाल रहेंगे:

पहला: ₹12,500 करोड़ का year-wise और district-wise allocation क्या होगा?

दूसरा: कितने जर्जर स्कूल पहले चरण में repair या rebuild होंगे?

तीसरा: तीन साल के roadmap की progress public dashboard या नियमित reports के जरिए सामने आएगी या नहीं?

अगर सरकार इन सवालों का स्पष्ट data देती है तो यह सिर्फ राजनीतिक विवाद का जवाब नहीं, बल्कि education governance में transparency की दिशा में भी बड़ा कदम हो सकता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सरकारी स्कूलों की हालत अब राजस्थान की politics में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है और ₹12,500 करोड़ का roadmap इस बहस को और बड़ा करेगा।

About The Author

Advertisement

LatestNews

Goa में सरकार बनी तो 5 दिन में E20 Petrol बैन: Kejriwal का बड़ा वादा, बोले- ‘नहीं हुआ तो राजनीति छोड़ दूंगा’
‘महिलाओं को क्या पहनना है बताना कब बंद करेंगे?’ Rakhi Ad विवाद पर Kriti Sanon ने तोड़ी चुप्पी
UP Election 2027: मायावती का बड़ा ऐलान- किसी से गठबंधन नहीं, UP समेत 3 राज्यों में अकेले चुनाव लड़ेगी BSP
‘भारत में सफल हुए तो गायब नहीं होंगे’: जापान में पीयूष गोयल का निवेशकों को संदेश, Jack Ma के बहाने China पर तंज?
‘हिंदू-मुस्लिम राजनीति की Expiry Date आ गई’: CJP के सौरभ दास बोले- नाकामी और भ्रष्टाचार अब नहीं छिपेंगे
7 दिन में 187 भूकंप! क्या आने वाली है बड़ी तबाही? ‘Ring of Fire’ की हलचल पर वैज्ञानिकों का जवाब
₹12,500 करोड़ से बदलेंगे राजस्थान के सरकारी स्कूल? CJP ने कहा- आंदोलन का असर, अब काम दिखाए सरकार