त्योहारों से पहले यूपी की सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, CM योगी का सख्त आदेश; खराब काम पर नपेंगे जिम्मेदार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवरात्रि, दशहरा, दीपावली और छठ से पहले प्रदेश की क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने का आदेश दिया है। शहरी से लेकर ग्रामीण मार्गों तक अभियान चलेगा और घटिया निर्माण या अनावश्यक देरी पर जवाबदेही तय होगी।
बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई उत्तर प्रदेश की सड़कों को त्योहारों से पहले दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने गुणवत्तापूर्ण मरम्मत, नियमित निगरानी और लापरवाही पर कार्रवाई करने को कहा है।
लखनऊ। मानसून के दौरान गड्ढों और जलभराव से परेशान उत्तर प्रदेश के लोगों को त्योहारों से पहले बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने और उन्हें गड्ढामुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से साफ कहा है कि नवरात्रि, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को खराब सड़कों के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण मार्गों से लेकर शहरों की मुख्य सड़कों तक मरम्मत का काम समय रहते पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
त्योहारों से पहले सड़कें सुधारने का आदेश
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े विभागों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि बारिश के कारण टूटी सड़कों, गड्ढों और जलभराव वाले स्थानों की तत्काल पहचान कराई जाए। ऐसे मार्गों को प्राथमिकता दी जाए, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में आम नागरिक, श्रद्धालु और दैनिक यात्री करते हैं।
त्योहारी सीजन में बाजारों, धार्मिक स्थलों और प्रमुख शहरों में भीड़ बढ़ती है। सरकार की कोशिश है कि इस दौरान लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
केवल गड्ढे भरना नहीं, टिकाऊ मरम्मत करनी होगी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सड़क मरम्मत का काम केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं किया जाए। पैचवर्क और गड्ढे भरने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी।
कई बार शिकायत सामने आती है कि मरम्मत के कुछ दिनों बाद ही सड़क दोबारा टूट जाती है। इसे देखते हुए निर्माण सामग्री, सड़क की मोटाई और मरम्मत की तकनीक की भी जांच कराने को कहा गया है।
जिन स्थानों पर सामान्य पैचवर्क से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा, वहां सड़क के प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
किन सड़कों पर रहेगा विशेष ध्यान?
अभियान में लोक निर्माण विभाग की सड़कों के साथ नगर निगम, नगर पालिका, ग्रामीण विकास, मंडी परिषद, सिंचाई विभाग और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से जुड़े मार्गों को भी शामिल किया जाएगा।
प्राथमिकता में ये मार्ग रहेंगे:
- धार्मिक स्थलों तक जाने वाली सड़कें।
- प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों के रास्ते।
- अस्पताल, स्कूल और बस अड्डों को जोड़ने वाले मार्ग।
- गांवों को ब्लॉक और जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कें।
- बारिश या पाइपलाइन की खुदाई से क्षतिग्रस्त हुए मार्ग।
- दुर्घटना की आशंका वाले बड़े गड्ढे और खराब पुलिया।
- हाईवे एवं एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले संपर्क मार्ग।
सरकार ने सभी संबंधित विभागों से अपने अधिकार क्षेत्र वाली खराब सड़कों का सर्वेक्षण कर मरम्मत की प्राथमिकता तय करने को कहा है।
पाइपलाइन के लिए खोदी गई सड़कों पर भी नजर
जल जीवन मिशन और दूसरी परियोजनाओं के लिए कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की स्थिति खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं।
कुछ जगह पाइपलाइन डालने के बाद सड़क को ठीक नहीं किया गया, जबकि कई मार्गों पर मिट्टी धंसने से गहरे गड्ढे बन गए। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर ऐसे मार्गों को भी जल्द दुरुस्त कराने को कहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जलापूर्ति योजनाओं के लिए खोदी गई ग्रामीण सड़कों की मानसून के बाद तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि सड़क मरम्मत अभियान की नियमित समीक्षा की जाए। काम में अनावश्यक देरी, लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कार्यदायी संस्था की जवाबदेही तय की जाएगी।
जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को अपने क्षेत्र में चल रहे कार्यों की निगरानी करनी होगी। सड़क तैयार होने के बाद उसके काम की गुणवत्ता भी जांची जाएगी।
सरकार का जोर इस बात पर है कि कागजों में सड़क को ठीक दिखाने और जमीन पर काम अधूरा छोड़ने की स्थिति न बने।
धार्मिक स्थलों वाले मार्ग प्राथमिकता में
नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों, दशहरा मेलों और दीपावली पर प्रमुख बाजारों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। छठ पर्व पर नदियों, तालाबों और घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर भी भारी भीड़ होती है।
इसे देखते हुए मंदिरों, मेला स्थलों और घाटों की ओर जाने वाली सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने को कहा गया है। सड़क के साथ जरूरत के अनुसार नालियों, पुलियों और सड़क किनारे जमा मलबे को भी ठीक कराया जाएगा।
अधिकारियों को ऐसे स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां गड्ढों या जलभराव के कारण दुर्घटना होने की आशंका अधिक है।
लखनऊ-कानपुर की टूटी सड़कों पर उठ चुके हैं सवाल
मानसून के दौरान लखनऊ, कानपुर और प्रदेश के दूसरे बड़े शहरों में सड़क धंसने तथा बड़े गड्ढे बनने की कई घटनाएं सामने आई थीं। भारी बारिश ने कई स्थानों पर निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था की कमियां उजागर कर दी थीं।
कुछ सड़कों पर गड्ढों के कारण यातायात बाधित हुआ, जबकि कई जगह स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर मरम्मत की मांग की। अब मुख्यमंत्री के नए निर्देश के बाद नगर निकायों और सड़क निर्माण विभागों पर तेजी से काम पूरा करने का दबाव बढ़ेगा।
आम लोग कैसे दर्ज करा सकते हैं शिकायत?
अगर किसी सड़क पर गहरा गड्ढा है या पहले हुई मरम्मत खराब हो गई है, तो नागरिक संबंधित नगर निगम, नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग या जिला प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं।
शिकायत के साथ सड़क का स्पष्ट फोटो, वीडियो, नजदीकी स्थान और सड़क का नाम देना उपयोगी रहेगा। शहरी क्षेत्र में नगर निकाय और ग्रामीण अथवा प्रमुख संपर्क मार्ग पर लोक निर्माण विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
नागरिक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत संख्या सुरक्षित रखने से कार्रवाई की स्थिति जानने में आसानी होगी।
आदेश का असर जमीन पर दिखना असली चुनौती
सरकार का यह निर्देश आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। लेकिन अभियान की सफलता इस बात से तय होगी कि मरम्मत केवल गड्ढे भरने तक सीमित रहती है या सड़कों की मूल समस्या का टिकाऊ समाधान किया जाता है।
जल निकासी की खराब व्यवस्था, बार-बार होने वाली खुदाई और घटिया निर्माण सामग्री को ठीक किए बिना सड़कें दोबारा क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इसलिए मरम्मत के साथ निर्माण गुणवत्ता और पानी निकासी की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
अब स्थानीय अधिकारियों की सबसे बड़ी परीक्षा यह है कि त्योहारों से पहले कितनी सड़कें वास्तव में दुरुस्त होती हैं और कितने क्षेत्रों में लोगों को गड्ढों तथा जलभराव से स्थायी राहत मिलती है।
