दिल्ली में वोट कटवाने की 787 अर्जियां, BJP के 16 बूथ एजेंटों ने कहा—हमने फॉर्म भरे ही नहीं! SIR पर नया विवाद

मुस्तफाबाद में नाम हटाने के आवेदनों पर सवाल; 1,021 में से 787 फॉर्म भाजपा बूथ एजेंटों के नाम पर दर्ज

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया

दिल्ली के मुस्तफाबाद में वोटर लिस्ट से नाम हटाने की 787 अर्जियां BJP बूथ एजेंटों के नाम पर दर्ज मिलीं। 16 एजेंटों ने आवेदन करने से इनकार किया। जानिए SIR का पूरा विवाद।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 5 नवंबर 2026
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दिल्ली के मुस्तफाबाद में मतदाता सूची से नाम हटाने की 787 अर्जियां भाजपा बूथ एजेंटों के नाम पर दर्ज मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। 16 एजेंटों ने आवेदन करने से इनकार किया है।

खबर में खास

  • मुस्तफाबाद में नाम हटाने के लिए कुल 1,021 फॉर्म-7 आवेदन दर्ज।
  • इनमें से 787 में भाजपा के 20 बूथ एजेंटों के नाम आपत्तिकर्ता के रूप में मिले।
  • 16 एजेंटों ने आवेदन भरने या हस्ताक्षर करने से इनकार किया।
  • सभी 787 अर्जियां मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित बताई गई हैं।
  • जिला निर्वाचन अधिकारी ने पहले कहा था कि नियम से अधिक सामूहिक आवेदन स्वीकार नहीं हुए।
  • फॉर्म जमा होने का मतलब किसी मतदाता का नाम हट जाना नहीं है।
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से एक गंभीर विवाद सामने आया है। मतदाताओं के नाम हटाने के लिए जमा सैकड़ों आवेदनों में भाजपा के बूथ एजेंटों के नाम दर्ज हैं, लेकिन बड़ी संख्या में संबंधित एजेंट खुद इन आवेदन से इनकार कर रहे हैं।
अंग्रेजी अखबार द हिंदू की 4 नवंबर की देर रात प्रकाशित खोजी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में जमा 1,021 फॉर्म-7 में से 787 पर भाजपा से जुड़े 20 बूथ लेवल एजेंटों के नाम दर्ज मिले।

20 एजेंटों में से 16 ने क्या कहा?

 अखबार ने निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज सभी 20 एजेंटों से संपर्क करने का प्रयास किया।
इनमें से 16 ने कहा कि उन्होंने संबंधित फॉर्म न तो भरे और न उन पर हस्ताक्षर किए।
इन आवेदनों में मतदाता के स्थायी रूप से स्थानांतरित होने, अन्य जगह पहले से नाम दर्ज होने अथवा मृत्यु जैसे कारण बताए गए थे।
787 आवेदन कुल 1,021 का करीब 77 प्रतिशत हैं। तीसरे पक्ष द्वारा जमा 837 आवेदनों में इनका हिस्सा लगभग 94 प्रतिशत है।

अंकित यादव के नाम पर 32 आवेदन

 भाजपा बूथ एजेंट अंकित यादव का मामला भी सामने आया है।
उनके नाम से 32 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दर्ज थे। यादव ने अखबार से कहा कि वे इन लोगों को जानते हैं और उनके पड़ोसी हैं।
यादव ने आवेदन करने से इनकार करते हुए अपने व्यक्तिगत विवरण के कथित गलत इस्तेमाल की शिकायत की। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी प्रतिनिधियों को बूथ एजेंट पद से अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है।
हालांकि, उनके नाम पर आवेदन किसने जमा किए, इसकी आधिकारिक जांच का निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।

एक एजेंट ने 500 फॉर्म भरने का दावा किया

इस मामले में दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य रॉबिन सिंह धामा का बयान है।
धामा ने फॉर्म-7 जमा करने की बात स्वीकार की और लगभग 500 आवेदन देने का दावा किया। लेकिन सार्वजनिक सूची में उनके नाम से 57 आवेदन दर्ज बताए गए हैं।
उनका कहना था कि जिन व्यक्तियों के नाम हटाने की मांग की गई, वे संबंधित स्थानों पर नहीं रहते।
उनके दावे और सार्वजनिक रिकॉर्ड के बीच अंतर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

चुनाव प्रशासन ने क्या सफाई दी?

1 नवंबर को आकाशवाणी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जिला निर्वाचन अधिकारी की सफाई प्रकाशित की थी।
अधिकारी के मुताबिक, मुस्तफाबाद में निर्धारित सीमा से अधिक सामूहिक फॉर्म स्वीकार नहीं किए गए और आवेदनों पर निर्वाचन आयोग के नियम लागू हैं।
प्रशासन ने संदिग्ध नाम-विलोपन आवेदनों की जमीनी जांच कराने और झूठे दावे पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात भी कही थी।
हालांकि, प्रशासन की पुरानी सफाई और नई रिपोर्ट के आंकड़े अलग-अलग तारीखों तथा आवेदन श्रेणियों से संबंधित हैं। इनके बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए अद्यतन आधिकारिक रिकॉर्ड जरूरी है।

फॉर्म-7 भरने से क्या वोट कट जाता है?

नहीं। फॉर्म-7 किसी नाम को हटाने या मतदाता सूची में नाम शामिल करने पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया है।
निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, आवेदन मिलने मात्र से नाम स्वतः नहीं हटता। प्रभावित मतदाता को नोटिस, सत्यापन और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
9 अक्टूबर को आयोग ने व्यक्तिगत आवेदकों के लिए फॉर्म-7 की संख्या पर भी नई सीमा लागू की थी।

अब किन सवालों का जवाब जरूरी है?

सबसे अहम सवाल है कि जिन 16 एजेंटों ने आवेदन करने से इनकार किया, उनके नाम फॉर्म पर कैसे दर्ज हुए?
क्या संबंधित हस्ताक्षर और आवेदकों की पहचान की जांच होगी? क्या सभी प्रभावित मतदाताओं को सुनवाई का अवसर मिलेगा?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि 787 मतदाताओं के नाम वास्तव में हटा दिए गए हैं या किसी राजनीतिक दल का संगठित गलत काम सिद्ध हो चुका है।
अब निर्वाचन अधिकारियों की जांच, फॉर्म जमा करने वालों की पहचान और प्रभावित मतदाताओं की अंतिम स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

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