DUSU चुनाव के बीच अखिलेश यादव ने उठाई UP में छात्रसंघ चुनाव की मांग, बोले- दिल्ली में हो सकता है तो यूपी में क्यों नहीं?
DUSU चुनाव के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में छात्र चुनाव हो सकते हैं तो यूपी में क्यों नहीं?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने DUSU चुनाव का जिक्र करते हुए उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने महंगाई, रुपये की स्थिति और प्रदेश की कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। उनके आरोपों को राजनीतिक बयान के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 19 सितंबर 2026
अखिलेश यादव ने दिल्ली विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए यूपी में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग उठाई।
खबर में खास
अखिलेश यादव ने UP में छात्रसंघ चुनाव की मांग उठाई
DUSU चुनाव का उदाहरण देकर सरकार से पूछा सवाल
महंगाई और रुपये की स्थिति पर भी केंद्र को घेरा
कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर यूपी सरकार पर लगाए आरोप
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव यानी DUSU की मतगणना के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग उठाई है।
शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने DUSU चुनाव का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब दिल्ली में छात्रसंघ चुनाव हो सकता है तो उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं कराए जा सकते।
DUSU चुनाव के लिए 18 सितंबर को मतदान हुआ था और 19 सितंबर को वोटों की गिनती चल रही है।
UP में छात्रसंघ चुनाव पर क्या बोले अखिलेश?
अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी छात्रों को चुनाव के माध्यम से अपना नेतृत्व चुनने का अवसर मिलना चाहिए।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली विश्वविद्यालय में ABVP, NSUI और दूसरे छात्र संगठनों के बीच DUSU चुनाव के नतीजों के लिए मतगणना चल रही है। ताजा रुझान भी counting के अलग-अलग rounds के साथ बदल रहे हैं।
अखिलेश की मांग को उत्तर प्रदेश में छात्र राजनीति को लेकर समाजवादी पार्टी के राजनीतिक रुख के रूप में देखा जाना चाहिए।
महंगाई और रुपये पर भी सरकार को घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने सिर्फ छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने महंगाई और रुपये की स्थिति को लेकर भी केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना की।
इस दौरान उन्होंने सरकार के कार्यक्रमों पर टिप्पणी करते हुए “दीयों के कंपटीशन” जैसी बात कही और रुपये की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। ये टिप्पणियां भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर सपा प्रमुख की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थीं।
लगातार आर्थिक मुद्दे उठा रहे अखिलेश
यह पहली बार नहीं है जब हाल के दिनों में अखिलेश यादव ने आर्थिक मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
17 सितंबर को उन्होंने UPI पर प्रस्तावित MDR और एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर भी भाजपा सरकार की आलोचना की थी। रिपोर्ट के मुताबिक 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के कुछ merchant UPI transactions पर 0.4% MDR का प्रावधान है, जबकि छोटे व्यापारियों समेत कुछ श्रेणियों के लिए अलग व्यवस्था है। MDR को सीधे ग्राहक पर लगने वाला सामान्य “UPI tax” मानना सही नहीं होगा।
रायबरेली विवाद भी बना राजनीतिक मुद्दा
अखिलेश यादव ने हाल में रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्रसभा और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच हुए विवाद को लेकर भी यूपी सरकार पर आरोप लगाए थे।
यह मामला 17 सितंबर का है, जब कॉलेज में समाजवादी छात्रसभा का सदस्यता और जागरूकता अभियान चल रहा था और ABVP कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई थी।
हालांकि पुलिस ने सोशल मीडिया पर लगाए गए मारपीट के कुछ आरोपों को भ्रामक और बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि उसने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया।
DUSU चुनाव के बीच क्यों अहम है बयान?
अखिलेश यादव की छात्रसंघ चुनाव वाली मांग की timing अहम है क्योंकि दिल्ली विश्वविद्यालय में इसी समय DUSU चुनाव की मतगणना चल रही है।
DUSU में इस बार अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा समेत अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं। मतगणना के दौरान बढ़त बदलती रही है, इसलिए अंतिम आधिकारिक नतीजे आने तक किसी उम्मीदवार को विजेता नहीं माना जाना चाहिए।
ऐसे में अखिलेश यादव ने दिल्ली के छात्र चुनाव को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराने का मुद्दा उठाया है। अब इस मांग पर राज्य सरकार या संबंधित विश्वविद्यालयों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।