राहुल गांधी के 'वोट चोरी' आरोपों का जवाब देने सड़क पर उतरी BJP! लखनऊ में शिवराज, बरेली में नड्डा; UP के 6 शहरों में पदयात्रा

UP चुनाव 2027 से पहले भाजपा का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, विपक्ष के आरोपों के जवाब में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू; योगी भी संभालेंगे मोर्चा

UP Assembly Election 2027: राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के वोट चोरी संबंधी आरोपों के जवाब में BJP ने छह शहरों में पदयात्रा का अभियान शुरू किया। लखनऊ में शिवराज सिंह चौहान और बरेली में जेपी नड्डा के कार्यक्रम हैं। जानिए तीन दिन का पूरा राजनीतिक प्लान।

राहुल गांधी के 'वोट चोरी' आरोपों का जवाब देने सड़क पर उतरी BJP! लखनऊ में शिवराज, बरेली में नड्डा; UP के 6 शहरों में पदयात्रा

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उत्तर प्रदेश में भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान, 3 नवंबर 2026।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 3 नवंबर 2026

खबर में खास

  • राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के आरोपों के जवाब में BJP ने शुरू किया नया अभियान।
  • लखनऊ में शिवराज सिंह चौहान, बरेली में जेपी नड्डा को जिम्मेदारी।
  • उत्तर प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में तीन दिन तक पदयात्राओं का कार्यक्रम।
  • उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया।
  • UP चुनाव 2027 से पहले सड़क पर तेज हुआ राजनीतिक मुकाबला।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव अब सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार, 3 नवंबर से 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है।
अभियान के पहले दिन लखनऊ में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बरेली में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के नेतृत्व में कार्यक्रम तय किए गए हैं। भाजपा अगले तीन दिनों में प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राओं के जरिए जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की तैयारी में है।

आखिर भाजपा को सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ी?

इस राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि में विपक्ष का 'वोट चोरी' अभियान और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद है।
राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक अभियान बताते हुए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने का आरोप लगा रही है।
हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोप और उनसे जुड़े किसी व्यापक चुनावी हेरफेर की पुष्टि को अलग-अलग समझना आवश्यक है।

लखनऊ में शिवराज, बरेली में जेपी नड्डा

लखनऊ में पदयात्रा का कार्यक्रम लोकभवन से परिवर्तन चौक तक रखा गया है। इसमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी तय की गई।
पार्टी ने राजधानी के कार्यक्रम में 30 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी का दावा किया था। यह आयोजकों का अनुमान है, वास्तविक उपस्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
उधर, बरेली में जेपी नड्डा के साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के कार्यक्रम निर्धारित हैं। यहां भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने INDIA गठबंधन पर देश में राजनीतिक अराजकता का माहौल बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के जरिए जनता तक पहुंचेगी और विपक्ष की राजनीति को उजागर करेगी।
भाजपा नेताओं नीरज सिंह, मनोज पांडे और रजनी तिवारी ने भी विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।
ये भाजपा नेताओं के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।

अगले दो दिन किन शहरों में होगी पदयात्रा?

भाजपा के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 4 नवंबर को गोरखपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रयागराज में केशव प्रसाद मौर्य और कानपुर में ब्रजेश पाठक के नेतृत्व में कार्यक्रम होंगे।
इसके बाद 5 नवंबर को गाजियाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने का कार्यक्रम है।

क्या 2027 चुनाव की लड़ाई अब सड़कों पर होगी?

उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी पहले से ही आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हैं। अब मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद ने एक नया राजनीतिक मुद्दा दे दिया है।
विपक्ष चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा अपने अभियान के जरिए जनता के बीच विपक्ष के आरोपों का जवाब देना चाहती है।
इस घटनाक्रम का चुनावी महत्व इसलिए भी है क्योंकि पदयात्राएं केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता दिखाने का माध्यम भी हैं।
अब सवाल यह है कि 2027 के चुनाव में जनता के लिए बड़ा मुद्दा क्या बनेगा—मतदाता सूची पर उठे सवाल, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप या स्थानीय विकास और रोजगार?

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