पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे नवाजिश आलम के कांग्रेस में आने से पश्चिमी यूपी की राजनीति बदलती दिखाई दे रही है। इमरान मसूद की इस रणनीति को इकरा हसन और सपा पर दबाव बनाने से जोड़कर देखा जा रहा है।
पश्चिमी यूपी में इमरान मसूद और अमीर आलम की नई जोड़ी ने बदला सियासी खेल, क्या इकरा हसन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की तैयारी कर रही कांग्रेस?
इमरान मसूद और अमीर आलम की नई राजनीतिक जोड़ी से पश्चिमी यूपी में बदले समीकरण
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 25 सितंबर 2026
खबर में खास
पूर्व सांसद अमीर आलम और बेटे नवाजिश आलम कांग्रेस में शामिल
दोनों नेताओं को कांग्रेस में लाने में इमरान मसूद की अहम भूमिका
पश्चिमी यूपी में मजबूत मुस्लिम चेहरा बनकर उभरी हैं इकरा हसन
सीट बंटवारे को लेकर सपा-कांग्रेस में पहले से चल रही बयानबाजी
थानाभवन और मुजफ्फरनगर की सीटों पर बढ़ सकती है दावेदारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी यूपी में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। दोनों नेताओं को कांग्रेस में लाने में सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।
अमीर आलम परिवार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस की ताकत बढ़ाने के साथ सपा सांसद इकरा हसन के बढ़ते प्रभाव को भी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
अमीर आलम से कांग्रेस को क्या फायदा होगा?
अमीर आलम पश्चिमी यूपी के पुराने और प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में शामिल हैं। वह कई बार विधायक रहने के साथ कैराना से लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। उनके बेटे नवाजिश आलम वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर बुढ़ाना से विधायक चुने गए थे।
अमीर आलम और नवाजिश आलम ने हाल ही में चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी छोड़ दी थी। अब उनके कांग्रेस में आने से शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में पार्टी अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करेगी।
इकरा हसन के प्रभाव से जुड़ी चर्चा क्यों?
कैराना से सपा सांसद इकरा हसन पश्चिमी यूपी में एक मजबूत युवा मुस्लिम नेता के रूप में उभरी हैं। उनके परिवार का कैराना, शामली और मुजफ्फरनगर की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके भाई नाहिद हसन भी कैराना से सपा विधायक हैं।
वहीं, अमीर आलम और इकरा हसन के परिवारों की राजनीतिक जमीन लगभग एक ही क्षेत्र में रही है। इसी कारण इमरान मसूद और अमीर आलम की नई राजनीतिक साझेदारी को कुछ जानकार इकरा हसन के प्रभाव की घेराबंदी के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक दावा नहीं किया गया है।
सीट बंटवारे पर बढ़ सकता है दबाव
सपा और कांग्रेस के बीच 2027 का विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ने की संभावना है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर दोनों पार्टियों में दबाव की राजनीति शुरू हो चुकी है। इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के लिए अधिक सीटों की मांग करते रहे हैं।
अमीर आलम परिवार के कांग्रेस में आने के बाद थानाभवन, मुजफ्फरनगर सदर और आसपास की दूसरी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत हो सकती है। चर्चा है कि नवाजिश आलम थानाभवन सीट से कांग्रेस का टिकट मांग सकते हैं। ऐसी स्थिति में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।
इमरान और इकरा के बीच पहले भी हुई बयानबाजी
इकरा हसन ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने की ताकत समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के पास है। इसके जवाब में इमरान मसूद ने गठबंधन की जरूरत बताते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति एक जैसी नहीं है।
दोनों सांसदों की बयानबाजी के बाद यह सवाल उठने लगा कि पश्चिमी यूपी में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा आसानी से हो पाएगा या दोनों दलों के क्षेत्रीय नेताओं की दावेदारी गठबंधन की मुश्किल बढ़ाएगी।
अमीर आलम और नवाजिश आलम के कांग्रेस में आने से पश्चिमी यूपी में इमरान मसूद की ताकत बढ़ी है, लेकिन असली परीक्षा 2027 के सीट बंटवारे में होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस की बढ़ती दावेदारी सपा पर दबाव बनाएगी या इकरा हसन का राजनीतिक प्रभाव गठबंधन में समाजवादी पार्टी की पकड़ मजबूत करेगा।