पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर J&K विधानसभा में बवाल, BJP विधायक को मार्शलों ने निकाला; उमर बोले- सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं
उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य बहाली का प्रस्ताव रखा। 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के जिक्र पर BJP ने विरोध किया, हंगामे के बीच विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने बाहर निकाला।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और BJP आमने-सामने आ गए। भाजपा ने प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का जिक्र किए जाने का विरोध किया। हंगामा बढ़ने पर BJP विधायक विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकाला गया और कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी गई।
स्टेटहुड प्रस्ताव पर भिड़े सत्ता पक्ष और BJP, 2000 के जिक्र से बढ़ा विवाद
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य बहाली के प्रस्ताव पर हुए हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 25 सितंबर 2026
खबर में खास
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने का प्रस्ताव पेश किया
प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 के पुराने प्रस्तावों का जिक्र
2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ पर BJP ने जताई आपत्ति
BJP विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ीं और सदन के वेल में पहुंचे
हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को बाहर निकाला गया
सदन की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में एक प्रस्ताव पेश कर केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की। प्रस्ताव सामने आते ही BJP विधायकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
विवाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से ज्यादा प्रस्ताव में शामिल एक पुराने संदर्भ को लेकर बढ़ा। प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पारित प्रस्तावों का उल्लेख किया गया था। BJP ने खास तौर पर वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के जिक्र पर आपत्ति जताई।
BJP ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
वर्ष 2000 में तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार के दौरान जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अधिक स्वायत्तता की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। शुक्रवार को उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश नए प्रस्ताव में उसी पुराने प्रस्ताव का उल्लेख किए जाने पर BJP विधायकों ने विरोध किया।
BJP विधायकों का कहना था कि वे सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे। इसके बाद पार्टी के विधायक अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे और कुछ सदस्यों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं।
यह भी महत्वपूर्ण है कि BJP का तत्काल विरोध प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ को लेकर था; इसे केवल पूर्ण राज्य की मांग के विरोध के रूप में पेश करना पूरी तस्वीर नहीं होगी।
हंगामे के बीच विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकाला
विरोध बढ़ने के बाद BJP विधायक सदन के वेल में पहुंचे और नारेबाजी जारी रही। सत्ता पक्ष की ओर से भी जवाबी नारे लगाए गए, जिससे सदन का माहौल और गरमा गया।
हंगामे के दौरान BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों ने सदन से बाहर निकाला। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक रंधावा आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद उन्हें बाहर ले जाया गया। लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
उमर अब्दुल्ला ने BJP को क्या जवाब दिया?
विरोध के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी मांग उनकी पार्टी या सरकार के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की है। उन्होंने BJP नेताओं की ओर से लगाए गए राष्ट्र-विरोधी होने के आरोपों का भी जवाब दिया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश के लिए कई बलिदान दिए हैं और उन्हें BJP से किसी तरह के “सर्टिफिकेट” की जरूरत नहीं है। यह प्रतिक्रिया BJP सदस्यों की ओर से नेशनल कॉन्फ्रेंस पर लगाए गए आरोपों के जवाब में आई।
प्रस्ताव में आखिर लिखा क्या है?
मुख्यमंत्री की ओर से पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को सदन द्वारा पारित प्रस्तावों के अतिरिक्त विधानसभा भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग करती है और इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय करती है।
उमर अब्दुल्ला ने सदन में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से परिसीमन, चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की तीन चरणों वाली प्रक्रिया का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि परिसीमन और विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, इसलिए अब राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। यह मुख्यमंत्री का पक्ष है।
कांग्रेस, PDP और AAP का क्या रुख रहा?
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस सदस्यों ने भी प्रस्ताव का स्वागत किया। PDP के सदस्यों और सदन में AAP के एकमात्र विधायक ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया।
दूसरी तरफ BJP ने स्पष्ट किया कि उसकी आपत्ति प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को शामिल किए जाने पर है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी हुई।
2000 और 2024 के प्रस्ताव क्यों बने विवाद का कारण?
26 जून 2000 को फारूक अब्दुल्ला सरकार के समय जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अधिक स्वायत्तता से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया था। शुक्रवार के प्रस्ताव में इसका उल्लेख होने के कारण BJP ने इसे स्वीकार करने से इनकार किया।
वहीं 6 नवंबर 2024 के प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली से जुड़ी मांग की गई थी। शुक्रवार के नए प्रस्ताव में दोनों पुराने प्रस्तावों का संदर्भ शामिल किया गया।
अब आगे क्या होगा?
शुक्रवार को भारी हंगामे के कारण प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्ताव को सोमवार को मतदान के लिए रखे जाने की संभावना है। वहीं विधानसभा की कार्यवाही भी सोमवार तक स्थगित कर दी गई है।
ऐसे में अब नजर सोमवार की कार्यवाही पर रहेगी—क्या प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान हो पाएगा, और 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ को लेकर सत्ता पक्ष और BJP के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विवाद केवल पूर्ण राज्य की मांग तक सीमित नहीं रहा। असली टकराव नए प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ जोड़ने पर हुआ। उमर अब्दुल्ला इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार से जोड़ रहे हैं, जबकि BJP उस पुराने स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ का विरोध कर रही है। अब सोमवार की कार्यवाही तय करेगी कि यह प्रस्ताव आगे किस रूप में बढ़ता है।