SIR विवाद पर चिराग के बाद उपेंद्र कुशवाहा भी बोले- जनता में कंफ्यूजन है, चुनाव आयोग तुरंत सफाई दे

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि SIR को लेकर जनता में उलझन की स्थिति बनी है और चुनाव आयोग को सही स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इससे पहले चिराग पासवान भी आयोग से जनता की शंकाएं दूर करने की मांग कर चुके हैं।

SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद के बीच NDA के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर जनता में कंफ्यूजन पैदा हुआ है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कहा था कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह नहीं रहना चाहिए।

विपक्ष के बाद अब NDA सहयोगियों ने भी उठाए सवाल, EC से मांगी स्थिति साफ करने की मांग

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SIR विवाद पर उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से जनता के मन में बनी उलझन दूर करने के लिए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बिहार डेस्क | 25 सितंबर 2026

खबर में खास

  • SIR विवाद पर उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण
  • कहा- जनता में इस मुद्दे को लेकर काफी कंफ्यूजन है
  • चिराग पासवान भी EC से जनता की शंकाएं दूर करने को कह चुके हैं
  • दोनों नेता NDA के सहयोगी हैं
  • चुनाव आयोग पहले कह चुका है कि अलग-अलग राय आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सहमति से हुए
पटना। Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से खुलकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पूरे मामले को लेकर जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है और चुनाव आयोग को बिना देर किए सही स्थिति सामने रखनी चाहिए।
उपेंद्र कुशवाहा का बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय मंत्री और NDA सहयोगी चिराग पासवान भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देने की बात कह चुके हैं।

उपेंद्र कुशवाहा ने क्या कहा?

उपेंद्र कुशवाहा ने X पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि SIR से जुड़े विवाद के कारण जनता में काफी कंफ्यूजन पैदा हुआ है। उनके मुताबिक इस मुद्दे को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि सही स्थिति पर तत्काल स्पष्टीकरण जारी किया जाए, ताकि लोगों के मन में बनी उलझन दूर हो सके।
कुशवाहा ने अपने बयान में किसी विपक्षी दल के आरोप को सही या गलत ठहराने के बजाय चुनाव आयोग से स्थिति साफ करने पर जोर दिया है।

चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग से क्या कहा था?

इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।
चिराग ने कहा कि अगर चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था पर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को अपना पक्ष स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होना चिंता की बात होगी।
चिराग पासवान ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को केवल विपक्षी नेताओं के आरोपों का जवाब देने के नजरिए से नहीं, बल्कि आम जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

दो NDA सहयोगियों के बयान क्यों अहम हैं?

उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान दोनों NDA से जुड़े नेता हैं। ऐसे में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगने वाले उनके बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बने हैं। हालांकि दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है; उनका जोर जनता के बीच पैदा हुई शंकाओं को दूर करने पर है।
इसलिए उनके बयानों को चुनाव आयोग के खिलाफ निष्कर्ष के रूप में देखने के बजाय आयोग से अधिक स्पष्टता की मांग के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।

SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?

हालिया विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में SIR, मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची और Form-6 से जुड़े विषय भी शामिल थे।
इसके बाद राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आयोग से ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

चुनाव आयोग पहले क्या सफाई दे चुका है?

चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि लिखित टिप्पणियां, सवाल और अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संस्था में सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।
आयोग का कहना है कि SIR समेत अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए सवालों को अंतिम असहमति नहीं माना जाना चाहिए।
Form-6 को लेकर भी आयोग ने स्पष्ट किया कि मूल Form-6 में बदलाव नहीं किया गया और SIR से जुड़ा हिस्सा अलग annexure के रूप में जोड़ा गया था।

अब सवाल जनता के भरोसे का

मौजूदा विवाद में राजनीतिक आरोप और चुनाव आयोग की सफाई दोनों सामने आ चुके हैं। उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान का जोर इस बात पर है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर आम मतदाता के मन में किसी तरह की उलझन या अविश्वास नहीं रहना चाहिए।
अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इन बयानों के बाद कोई नया या विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है या अपनी पहले दी गई सफाई पर ही कायम रहता है।
SIR विवाद अब केवल विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच की बहस तक सीमित नहीं रहा है। NDA के सहयोगी चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा भी आयोग से जनता की शंकाएं दूर करने की बात कह रहे हैं। हालांकि दोनों नेताओं ने आरोपों पर अपना कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। ऐसे में अब पूरी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग जनता के सामने इस विवाद को लेकर और कितनी स्पष्टता लाता है।

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