दिल्ली बनी दुनिया की कूटनीति का केंद्र: पुतिन-पेजेशकियन पहुंचे, 7 साल बाद आ रहे जिनपिंग; मोदी की 3 बड़ी बैठकों पर नजर

18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिल्ली पहुंच चुके हैं। शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आ रहे हैं। दुनिया की नजर प्रधानमंत्री मोदी की इन तीनों नेताओं के साथ होने वाली बातचीत पर है।

BRICS सम्मेलन 2026 के लिए प्रधानमंत्री मोदी, व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग और मसूद पेजेशकियन

BRICS सम्मेलन से पहले दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। पीएम मोदी की पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठकों में रक्षा, व्यापार, सीमा विवाद, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया जैसे मुद्दे उठ सकते हैं।

नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली इस समय दुनिया की कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS सम्मेलन से इतर पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठक करेंगे। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण इन तीनों मुलाकातों पर पूरी दुनिया की नजर है।

मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार; मोदी-पेजेशकियन वार्ता में पश्चिम एशिया, चाबहार एवं ऊर्जा सुरक्षा और मोदी-जिनपिंग मुलाकात में सीमा विवाद तथा दोनों देशों के संबंध प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं।

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के साथ साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता तथा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

दिल्ली पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया
brics-summit-2026-modi-putin-xi-pezeshkian-delhi.jpg
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत प्रस्तावित है। फोटो: सोशल मीडिया

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।

भारत और रूस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में पुरानी रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों के संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” कहा जाता है।

पुतिन की इस यात्रा को रूस पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और वैश्विक तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखने के साथ यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है।

आजतक के लाइव अपडेट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम BRICS सम्मेलन से पहले और उसके दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों से भरा हुआ है।

मोदी-पुतिन बैठक में किन मुद्दों पर होगी बात?

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में दोनों देशों के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों की समीक्षा होने की संभावना है। व्यापार, निवेश, तेल और गैस, परमाणु ऊर्जा, रक्षा तथा तकनीक प्रमुख विषय हो सकते हैं।

दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, लेकिन व्यापारिक असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। भारत रूस को अपने निर्यात में वृद्धि करना चाहता है। दवा, कृषि, मशीनरी और तकनीकी उत्पादों के कारोबार को बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।

रक्षा सहयोग भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। कुछ मीडिया रिपोर्टों में पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान और रक्षा उपकरणों से जुड़ी संभावित बातचीत का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी सौदे की पुष्टि दोनों देशों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।

इसके अतिरिक्त यूक्रेन संघर्ष और दुनिया की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों पर दोनों नेता अपने विचार साझा कर सकते हैं।

ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन भी पहुंचे भारत

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। भारत आने से पहले उन्होंने BRICS को एकतरफा वैश्विक नीतियों का मुकाबला करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया था।

उनका कहना था कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए। ईरान BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का समर्थन करता है।

प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियन के बीच होने वाली बैठक में भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।

मोदी-पेजेशकियन बैठक क्यों महत्वपूर्ण?

ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया गंभीर तनाव से गुजर रहा है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में शांति और होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है।

दोनों नेताओं की बैठक में क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। भारत विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की बात करता रहा है।

चाबहार बंदरगाह पर भी रहेगी नजर

भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह का विशेष महत्व है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान से होकर गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग देता है।

भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन में निवेश किया है। मोदी-पेजेशकियन बैठक में इस परियोजना की प्रगति और इसके माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।

हालांकि बैठक के विस्तृत एजेंडे और किसी संभावित समझौते की पुष्टि दोनों देशों के आधिकारिक बयान के बाद होगी।

सात वर्षों बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग

BRICS सम्मेलन की सबसे अधिक चर्चित यात्राओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा शामिल है। वह सात वर्षों बाद भारत आ रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारियों की पुष्टि की है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश मोदी-जिनपिंग बैठक की व्यवस्था कर रहे हैं।

चीन ने कहा है कि वह भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखता है। बीजिंग ने बातचीत तथा सहयोग बढ़ाने के साथ मतभेदों को उचित तरीके से संभालने की बात कही है।

मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

भारत और चीन के संबंध साल 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।

अब मोदी-जिनपिंग बैठक में सीमा पर शांति, सैनिकों की स्थिति, व्यापारिक असंतुलन, सीधी उड़ान, वीजा और आर्थिक संबंधों जैसे विषय उठ सकते हैं।

भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि सीमा पर शांति के बिना द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते। ऐसे में बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयान से दोनों देशों के रिश्तों की भावी दिशा का संकेत मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी का व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को राष्ट्रपति पुतिन, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात प्रस्तावित है।

इसके बाद वह चीन, इथियोपिया, मलेशिया, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात और कई अन्य देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे।

मोदी और शी जिनपिंग की बैठक शनिवार शाम प्रस्तावित बताई गई है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री कजाकिस्तान, फिलीपींस, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और युगांडा के नेताओं से भी बातचीत कर सकते हैं।

बैठकों का कार्यक्रम बदल सकता है, इसलिए किसी भी समझौते या परिणाम की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही की जाएगी।

BRICS सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्या है?

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, व्यापार, निवेश, तकनीक, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

BRICS देश अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं में सुधार भी समूह का प्रमुख विषय रहा है।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सदस्य देशों के बीच भुगतान को आसान बनाने वाली व्यवस्था पर भी बातचीत हो सकती है। इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर को तुरंत हटाना नहीं, बल्कि व्यापार के लिए अधिक विकल्प तैयार करना है।

BRICS में कितने सदस्य देश हैं?

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया। वर्तमान में समूह में भारत सहित 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं।

पूर्ण सदस्यों के अलावा कई साझेदार देशों को भी सम्मेलन में बुलाया गया है। इस कारण दिल्ली में होने वाले आयोजन में 11 सदस्यों से अधिक देशों के प्रतिनिधि दिखाई देंगे। साझेदार देशों को पूर्ण सदस्य कहना सही नहीं होगा।

विस्तार के बाद BRICS दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

सम्मेलन के सामने बड़ी चुनौतियां

BRICS का आकार बढ़ने के साथ उसकी ताकत बढ़ी है, लेकिन सदस्य देशों के हितों में अंतर भी सामने आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता जैसे मुद्दों पर सभी देशों का रुख एक जैसा नहीं है।

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सम्मेलन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सदस्य देशों के अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक हितों के बीच सहमति बनाना है।

भारत की कोशिश BRICS को किसी पश्चिम-विरोधी सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के बजाय ग्लोबल साउथ के आर्थिक और विकास संबंधी हितों का मंच बनाए रखने की होगी।

BRICS के रंग में सजी दिल्ली

सम्मेलन का मुख्य आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा। विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के लिए दिल्ली के प्रमुख मार्गों, चौराहों और सरकारी क्षेत्रों को BRICS की थीम पर सजाया गया है।

एयरपोर्ट से प्रमुख होटलों और भारत मंडपम को जोड़ने वाले मार्गों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था, फूल और BRICS के संकेतक लगाए गए हैं। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 17 प्रमुख चौराहों को सजाया गया और करीब 15 हजार पौधे लगाए गए हैं।

इन तीन मुलाकातों से क्या निकलेगा?

दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की पुतिन, पेजेशकियन और शी जिनपिंग से होने वाली बातचीत BRICS सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में शामिल है।

पुतिन के साथ वार्ता से भारत-रूस रक्षा और ऊर्जा संबंधों, पेजेशकियन से मुलाकात से पश्चिम एशिया एवं चाबहार परियोजना और शी जिनपिंग के साथ बैठक से भारत-चीन संबंधों की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

अब दुनिया की नजर केवल नेताओं की तस्वीरों पर नहीं, बल्कि बैठकों के बाद होने वाली घोषणाओं पर होगी। असली सवाल यह है कि क्या दिल्ली का यह बड़ा कूटनीतिक जमावड़ा व्यापार, क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सहयोग को लेकर कोई ठोस रास्ता निकाल पाएगा।

About The Author

Advertisement

LatestNews

लखीमपुर खीरी कांड: मुठभेड़ के बाद आरोपी गिरफ्तार, अब मकान पर चला बुलडोजर; जानिए प्रशासन ने क्यों की कार्रवाई
चेहरे पर कपड़ा, हाथ में मिर्च पाउडर… SBI से ₹4.53 लाख लेकर भागा लुटेरा; पुलिस ने 30 मिनट में दबोचा
दिल्ली बनी दुनिया की कूटनीति का केंद्र: पुतिन-पेजेशकियन पहुंचे, 7 साल बाद आ रहे जिनपिंग; मोदी की 3 बड़ी बैठकों पर नजर
शुभेंदु की छोड़ी नंदीग्राम सीट पर BJP का भावुक दांव? मारे गए करीबी चंद्रनाथ रथ की मां हासी रथ टिकट की रेस में आगे
BRICS के लिए भारत रवाना हुए ईरानी राष्ट्रपति, पेजेशकियन ने दुनिया को दिया बड़ा संदेश; PM मोदी से होगी अहम मुलाकात
सहारनपुर मस्जिद केस में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: योगी सरकार से मांगा जवाब, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर लगाई रोक
अपनी ही सरकार में दूसरी बार धरने पर बैठे संजय निषाद, लखनऊ के बाद गोंडा में मोर्चा; जानिए किस मामले ने बढ़ाई नाराजगी