'छात्रों पर डंडे चलाना समाधान नहीं', BJP के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का बयान

भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि छात्रों की जायज मांगें सहानुभूति से सुनी जानी चाहिए। उन्होंने छात्र आंदोलनों में बल प्रयोग के बजाय बातचीत पर जोर दिया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने छात्र आंदोलनों पर कहा कि डंडे चलाने से समस्याओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने छात्रों की मांगें सुनने और बातचीत से रास्ता निकालने की सलाह दी।

छात्र आंदोलनों पर मुरली मनोहर जोशी की सलाह, बोले—समस्या है तो छात्रों की बात सुनिए, डंडे मत चलाइए

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पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों की मांगों को सुनने और बल प्रयोग से बचने की सलाह दी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 8 अक्टूबर 2026
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने छात्र आंदोलनों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की जायज मांगों को सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए। विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ डंडे चलाना किसी समस्या का समाधान नहीं है।
मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 21वें फिक्की उच्च शिक्षा सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उनका कहना था कि छात्र हमारे बच्चे हैं और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान निकालने की जरूरत है।
 खबर में खास
  • भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने छात्र आंदोलनों पर बयान दिया।
  • कहा कि छात्रों की जायज मांगों को सहानुभूति से सुनना चाहिए।

  • जोशी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ डंडे चलाने को गलत तरीका बताया।

  • उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाला जाए।

  • दिल्ली के भारत मंडपम में उच्च शिक्षा सम्मेलन के दौरान दिया बयान।

  • जोशी ने शिक्षा में भौतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास के संतुलन पर भी जोर दिया।

'डंडे चलाने से समाधान नहीं निकल सकता'

मुरली मनोहर जोशी ने छात्र आंदोलनों के दौरान बल प्रयोग पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि छात्रों की उचित और जायज मांगों को हमेशा सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए।
जोशी ने साफ कहा, 'डंडे चलाने का तरीका उचित नहीं है। आप इस तरह कभी समाधान नहीं निकाल सकते। अगर कोई समस्या है तो उनकी बात सुनिए। वे हमारे बच्चे हैं।'
उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी छात्रों की बात सुने बिना केवल बल प्रयोग करने से उनकी समस्याएं दूर नहीं होंगी।

छात्र आंदोलनों को लेकर क्या बोले जोशी?

पत्रकारों से बातचीत में मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
उन्होंने छात्रों को देश की आने वाली पीढ़ी बताते हुए उनके साथ संवेदनशील व्यवहार करने पर जोर दिया।
जोशी के मुताबिक, यदि छात्रों की कोई उचित मांग है तो संबंधित अधिकारियों को उसे सुनना चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
उन्होंने छात्र आंदोलनों से निपटने के लिए लाठी या बल प्रयोग को सही तरीका नहीं माना।

दिल्ली के उच्च शिक्षा सम्मेलन में दिया बयान

मुरली मनोहर जोशी गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 21वें फिक्की उच्च शिक्षा सम्मेलन में शामिल हुए थे।
यह दो दिवसीय कार्यक्रम उच्च शिक्षा में सुधार, नई चुनौतियों और बदलती दुनिया में शिक्षा की भूमिका पर केंद्रित है।
सम्मेलन के दौरान पत्रकारों ने जोशी से छात्र आंदोलनों पर सवाल किया। इसी के जवाब में उन्होंने छात्रों की मांगों को सुनने और बल प्रयोग से बचने की बात कही।
जोशी इससे पहले केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुके हैं।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी रखे विचार

छात्र आंदोलनों के अलावा मुरली मनोहर जोशी ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल भौतिक विकास नहीं होना चाहिए।
उनके मुताबिक, शिक्षा में मनुष्य के भौतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास के बीच संतुलन जरूरी है।
जोशी ने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति के सभी पहलुओं का विकास करे और समाज के लिए उपयोगी साबित हो।
 

छात्र आंदोलनों के बीच क्यों चर्चा में है बयान?

मुरली मनोहर जोशी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र और युवा संगठनों के विरोध प्रदर्शन चर्चा में हैं।
दिल्ली सहित कई शहरों में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आए हैं।
हालांकि, मुरली मनोहर जोशी ने अपने बयान में किसी विशेष प्रदर्शन, पुलिस अधिकारी या राजनीतिक नेता का नाम नहीं लिया।
इसलिए उनके बयान को किसी एक घटना या सरकार पर सीधा हमला बतने के बजाय छात्रों से जुड़े आंदोलनों पर उनकी सामान्य प्रतिक्रिया के रूप में देखना चाहिए।
 

छात्रों की मांगों के समाधान पर दिया जोर

मुरली मनोहर जोशी के बयान का मुख्य संदेश यह है कि छात्रों की समस्याओं को सुनना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं, तो उनकी बात सुनकर समाधान तलाशना चाहिए।
उनके अनुसार, केवल डंडे चलाने से समस्या दूर नहीं होगी।
छात्रों की उचित मांगों को सहानुभूति के साथ सुनना और उनके साथ बातचीत करना अधिक जरूरी है।

अब आगे क्या होगा?

मुरली मनोहर जोशी के बयान के बाद छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और बातचीत की भूमिका पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि, उनके बयान के आधार पर किसी सरकारी नीति में बदलाव या पुलिस कार्रवाई पर नए आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों की जायज मांगों को सुनने और बल प्रयोग से बचने की सलाह दी है। उनका स्पष्ट संदेश है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान डंडे चलाकर नहीं, बल्कि उनकी बात सुनकर निकाला जाना चाहिए।

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