‘धर्म हमारे DNA में है’, उज्जैन में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत; Religion और धर्म का बताया अंतर
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन की युवा धर्म संसद में कहा कि धर्म हमारे DNA में है और सभी के लिए कल्याणकारी है। उन्होंने Religion और धर्म का अंतर बताते हुए युवाओं से केवल यशस्वी नहीं बल्कि सार्थक बनने की अपील की।
उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने धर्म, Religion और युवाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि धर्म हमारे DNA में है और यह सभी के कल्याण की बात करता है। भागवत ने Religion और धर्म के बीच अंतर की अपनी व्याख्या बताते हुए कहा कि भारत के युवा दुनिया में केवल यशस्वी ही नहीं, बल्कि सार्थक भी बनें।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उज्जैन | 18 सितंबर 2026
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद को संबोधित किया।
खबर में खास
मोहन भागवत बोले- ‘धर्म हमारे DNA में है’
Religion और धर्म के अंतर पर रखी अपनी बात
कहा- धर्म जोड़ता है, बिखरने नहीं देता
युवाओं से केवल यशस्वी नहीं, सार्थक बनने को कहा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद को संबोधित करते हुए धर्म और युवाओं की भूमिका पर अपनी बात रखी।
भागवत ने कहा कि जीवन में सुख-दुख समेत कई चीजें बदलती रहती हैं, लेकिन धर्म नित्य है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि “धर्म हमारे DNA में है” और इसे सभी के लिए कल्याणकारी बताया।
Religion और धर्म में क्या अंतर बताया?
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में अंग्रेजी के ‘Religion’ और भारतीय संदर्भ में ‘धर्म’ को अलग अवधारणाओं के रूप में समझाया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम से आए लोगों ने धर्म को Religion के रूप में देखा और धीरे-धीरे भारत में भी इसका वही अर्थ लिया जाने लगा।
भागवत के मुताबिक Religion अनुशासन या नियमों के दायरे में रखने से जुड़ा है, जबकि धर्म का अर्थ इससे व्यापक है। उन्होंने कहा कि धर्म बांधने के बजाय मुक्त करता है। यह भागवत द्वारा अपने संबोधन में प्रस्तुत की गई व्याख्या है।
‘धर्म जोड़ता है, टूटने नहीं देता’
RSS प्रमुख ने ‘धर्म’ शब्द को ‘धारणा’ से जोड़ते हुए कहा कि जो धारण करता है, वह लोगों को जोड़ता है और बिखरने या टूटने नहीं देता।
उन्होंने धर्म को व्यक्ति के आचरण से जोड़ते हुए कहा कि नियमों का अनुसरण और अनुशासन भी इसका हिस्सा है।
‘धर्म हमारे DNA में है’
अपने संबोधन के दौरान भागवत ने कहा कि मनुष्य शारीरिक रूप से कई जीवों की तुलना में कमजोर हो सकता है, लेकिन बुद्धि के बल पर उसने अपनी अलग स्थिति बनाई है।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि धर्म हमारे DNA में है और धर्म सभी के लिए कल्याणकारी है।
यहां ‘DNA’ का इस्तेमाल उनके भाषण में सांस्कृतिक/वैचारिक अभिव्यक्ति के रूप में हुआ है; इसे वैज्ञानिक या आनुवंशिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
युवाओं को क्या संदेश दिया?
मोहन भागवत ने युवाओं को शक्ति, समृद्धि, बुद्धि और सार्थकता से जुड़ा संदेश भी दिया।
उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम बलवान, वैभवशाली, धनवान और बुद्धिमान बनें। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के युवा पूरी दुनिया में सिर्फ यशस्वी ही नहीं बल्कि सार्थक भी बनें।
इस तरह उज्जैन की युवा धर्म संसद में भागवत के संबोधन का मुख्य केंद्र धर्म की उनकी व्याख्या, व्यक्ति का आचरण और युवाओं की भूमिका रही।