‘ज्ञानेश कुमार BJP के एजेंट थे, हैं और रहेंगे’, खरगे का बड़ा हमला; EVM छोड़ बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बैलेट पेपर से मतदान की मांग पूरी होने तक विपक्ष की लड़ाई जारी रहेगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR और मतदाता सूची में बदलाव पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई है।

खरगे के तीखे आरोप से फिर गरमाई चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस, बैलेट पेपर और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष ने बढ़ाया दबाव

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SIR विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।

खबर में खास

  • खरगे ने ज्ञानेश कुमार को बताया BJP का एजेंट
  • बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई
  • SIR और मतदाता सूची में बदलाव पर उठाए सवाल
  • हटाए गए मतदाताओं को अपील का अवसर देने की मांग
  • चुनाव आयोग ने पहले कहा था—सभी फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत
नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखा हमला किया है। खरगे ने आरोप लगाया कि “ज्ञानेश कुमार BJP के एजेंट थे, हैं और रहेंगे।” उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग पूरी होने तक कांग्रेस और विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। यह कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है और चुनाव आयोग अथवा ज्ञानेश कुमार की ओर से इस ताजा बयान पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

खरगे ने EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग दोहराई है। इससे पहले INDIA गठबंधन की बैठक के बाद उन्होंने दावा किया था कि विपक्षी दलों ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने के मुद्दे पर सहमति जताई है। विपक्ष ने SIR के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की योजना भी घोषित की है। 

मतदाता सूची में बदलाव पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं और योग्य मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है। उन्होंने मांग की कि सूची में हुए सभी बदलावों का डेटा सार्वजनिक किया जाए और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी देने के साथ अपील का अवसर भी मिले।
खरगे ने राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से संबंधित डेटा सरल प्रारूप में समय पर उपलब्ध कराने, गंभीर गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने और चुनावी फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी है।

चुनाव आयोग का क्या है पक्ष?

SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर चुनाव आयोग पहले स्पष्ट कर चुका है कि किसी संस्था में विचारों और सुझावों का अलग होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग का कहना है कि उसके आदेश कानूनी अधिकारों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार जारी किए गए हैं। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और आयोग की सफाई के बीच राजनीतिक विवाद और तेज होने की संभावना है।

खरगे के सीधे आरोप और बैलेट पेपर की मांग ने SIR विवाद को नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंचा दिया है। अब नजर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और विपक्ष के घोषित आंदोलन पर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह लड़ाई मतदाता सूची में पारदर्शिता बढ़ाएगी या पांच राज्यों के चुनाव से पहले सत्ता और विपक्ष के बीच नया चुनावी हथियार बनेगी।

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