अल्बानिया पर संजय राउत की पोस्ट से विवाद, BJP का हमला; प्रियंका चतुर्वेदी ने हिंसा का किया विरोध

संजय राउत ने अल्बानिया के घटनाक्रम से भारत को सबक लेने की बात कही। भाजपा ने इसे अराजकता का समर्थन बताया, जबकि शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने संस्थाओं के खिलाफ हिंसा को अस्वीकार्य कहा।

अल्बानिया के प्रदर्शनों पर संजय राउत की सोशल मीडिया पोस्ट से राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। भाजपा ने उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका चतुर्वेदी ने भी कानून हाथ में लेने और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का विरोध किया।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/मुंबई | 20 अक्टूबर 2026
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अल्बानिया संबंधी संजय राउत की पोस्ट पर राजनीतिक विवाद सामने आया है। तस्वीरों में संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी। फाइल तस्वीरों का कोलाज। NDTV
अल्बानिया में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करने वाली संजय राउत की सोशल मीडिया पोस्ट पर भारत में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। शिवसेना (UBT) सांसद ने इन घटनाओं से भारत समेत दूसरे देशों को सबक लेने की बात कही थी। भाजपा ने उनकी टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला संदेश बताया है। यह भाजपा का आरोप है, राउत की मंशा का स्थापित निष्कर्ष नहीं। 

खबर में खास

  • राउत की पोस्ट में अल्बानिया के प्रदर्शनों और अदालत में आग लगने का उल्लेख था।
  • भाजपा ने भारत से इसकी तुलना करने पर आपत्ति जताई।
  • स्थानीय रिपोर्ट में अदालत की इमारत के कुछ हिस्सों में आग की जानकारी है, पूरी इमारत नष्ट होने की नहीं।

संजय राउत ने अपनी पोस्ट में क्या कहा?

राउत ने अल्बानिया की घटना का उल्लेख करते हुए वहां की न्यायपालिका की भूमिका पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि लोगों का गुस्सा भ्रष्ट राजनीतिक नेतृत्व को संरक्षण मिलने के कारण बढ़ा। संसद, सरकारी कार्यालयों और अन्य स्थानों पर हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने भारत सहित देशों को इससे सीख लेने की बात कही।

हालांकि, अदालत में आग लगने की घटना और उसके पीछे राउत द्वारा बताई गई वजह अलग-अलग दावे हैं। किसी घटना के पीछे की मंशा सिर्फ एक राजनीतिक पोस्ट से प्रमाणित नहीं होती।

किरीट सोमैया ने क्यों जताई आपत्ति?

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया कि राउत अल्बानिया की हिंसा को भारत के लिए उदाहरण बनाकर पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता अराजकता स्वीकार नहीं करेगी।
सोमैया ने राउत की टिप्पणी को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनके रवैये से भी जोड़ा। हालांकि, किसी नेता के बयान की राजनीतिक व्याख्या और हिंसा के लिए वास्तविक उकसावे का निष्कर्ष एक ही बात नहीं हैं। 

प्रियंका चतुर्वेदी ने हिंसा पर क्या कहा?

शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत को दूसरे देशों की हिंसक घटनाओं से प्रेरणा लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों के कानून हाथ में लेने, व्यवस्था बाधित करने और संसद या सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं को अस्थिर करने का विरोध किया।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में हिंसक तरीके से सत्ता बदलने की जगह नहीं होनी चाहिए। 

राउत ने सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा भी जताया

आजतक की रिपोर्ट में राउत का एक अन्य बयान भी दर्ज है। इसमें उन्होंने मौजूदा सरकार के बने रहने पर अराजकता बढ़ने की आशंका जताई, लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है और अदालत को परिस्थितियों पर ध्यान देना चाहिए।

अल्बानिया की घटना के बारे में क्या पुष्ट है?

यूरोन्यूज अल्बानिया की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, तिराना में सुप्रीम कोर्ट के पास प्रदर्शन के दौरान आग लगी। आग ने अदालत की पहली मंजिल के कुछ हिस्सों और दो वाहनों को अपनी चपेट में लिया। रिपोर्ट पूरी अदालत की इमारत जलकर नष्ट होने की बात नहीं कहती।
इसलिए “सुप्रीम कोर्ट के हिस्से में आग लगी” और “पूरा सुप्रीम कोर्ट जला दिया गया” को एक जैसा नहीं लिखा जाना चाहिए। इसी तरह, राउत की पोस्ट पर भाजपा के आरोपों को भी आरोप के रूप में ही रखना जरूरी है। इस खबर का नया घटनाक्रम भारत में सामने आई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं, न कि आग लगने की घटना को आज की बताना।

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