CEC के खिलाफ जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन: आतिशी-संजय सिंह समेत सैकड़ों हिरासत में, इंटरनेट बंद; मुंबई में CJP का मोर्चा

SIR और मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरे विपक्षी दल और छात्र संगठन; दिल्ली में धारा 163 लागू, 12 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक प्रदर्शन तेज हो गया। जंतर-मंतर पर आतिशी, संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज समेत सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए।

जंतर-मंतर पर हिरासत, इंटरनेट पर रोक और बंद मेट्रो स्टेशन—ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेती दिल्ली पुलिस।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 2 अक्टूबर 2026

खबर में खास

  • जंतर-मंतर पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी हिरासत में
  • आतिशी, संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज पर पुलिस कार्रवाई
  • प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट सेवा प्रभावित
  • दिल्ली के 12 मेट्रो स्टेशनों की एंट्री-एग्जिट बंद
  • मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने खोला मोर्चा
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ शुक्रवार को दिल्ली से मुंबई तक विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन की कोशिश की, जबकि मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत की।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू करने के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया।

आतिशी-संजय सिंह समेत कई नेता हिरासत में

जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे AAP नेता आतिशी, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और संजीव झा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। AISA, SFI, NSUI, यूथ कांग्रेस और वामपंथी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी अलग-अलग स्थानों पर रोका गया।
अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या 500 से 700 के बीच बताई गई है। पुलिस के अनुसार बड़ी संख्या में SFI कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की थी, जिन्हें अशोका रोड के पास रोक दिया गया।

इंटरनेट सेवा प्रभावित, 12 मेट्रो स्टेशन बंद

प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवा प्रभावित होने की खबर सामने आई। सुरक्षा कारणों से जनपथ, पटेल चौक, राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, मंडी हाउस, नई दिल्ली और बाराखंभा रोड समेत 12 मेट्रो स्टेशनों की एंट्री और एग्जिट बंद की गई।
कुछ प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के लिए इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ ड्रोन से भी पूरे इलाके की निगरानी की।

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी घायल

नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को चोट लगने की सूचना मिली है। पुलिस घटनाक्रम का आकलन कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
वहीं पुलिस का पक्ष है कि धारा 163 लागू होने के कारण बिना अनुमति किसी धरने, मार्च या सार्वजनिक प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जा सकती।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग

CPI(M), SFI और DYFI से जुड़े प्रदर्शन के दौरान माकपा महासचिव एमए बेबी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाया जाना गंभीर मामला है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिए थे।

मुंबई में CJP का प्रदर्शन

दिल्ली के प्रदर्शन से अलग मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक शिवाजी पार्क के गेट नंबर-6 के पास पहुंचे।
CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया पर रोक, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग रखी है।

6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च

INDIA गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर के बीच देशभर के जिलों में ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च निकालने की योजना बनाई है। विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं।

दिल्ली में हिरासत और मुंबई में CJP के प्रदर्शन ने SIR विवाद को चुनाव आयोग के दफ्तर से निकालकर सड़कों की बड़ी राजनीतिक लड़ाई बना दिया है

अब निगाह 6 अक्टूबर के प्रस्तावित मार्च पर रहेगी। विपक्ष यदि इन प्रदर्शनों को साझा देशव्यापी अभियान में बदलता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।

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