जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया तो जेल होगी? जानें नए नियम, गैरकानूनी जमावड़े पर कितनी सजा
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। अब तीन दूसरी जगहों पर प्रदर्शन की व्यवस्था होगी। जानिए बिना अनुमति प्रदर्शन, धारा 163 और गैरकानूनी जमावड़े पर क्या सजा हो सकती है।
Jantar Mantar Protest: दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मान्यता खत्म। जानिए नए प्रदर्शन स्थल, धारा 163, BNS 189 और कानून तोड़ने पर संभावित सजा।
जंतर-मंतर पर अब नहीं होगा पहले जैसा प्रदर्शन, नियम तोड़े तो कितनी सजा? जानिए कानून क्या कहता है
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया, बिना अनुमति प्रदर्शन पर कानूनी कार्रवाई संभव।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 14 अक्टूबर 2026
दिल्ली में लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख केंद्र रहे जंतर-मंतर को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। अब राजधानी में विरोध प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं।
इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों को जेल हो सकती है? क्या बिना अनुमति एकत्र होने वाली हर भीड़ गैरकानूनी मानी जाएगी? और भारतीय न्याय संहिता में ऐसे मामलों के लिए कितनी सजा का प्रावधान है?
खबर में खास
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया।
रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल बनाया गया।
BNS की धारा 189 में गैरकानूनी जमावड़े पर छह महीने से दो साल तक की सजा के प्रावधान।
वैध सरकारी आदेश की अवहेलना पर BNS की धारा 223 के तहत भी कार्रवाई संभव।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति क्यों हटाई गई?
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को नया आदेश जारी किया था। इसके तहत जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया।
पुलिस के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक समिति ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों की समीक्षा की थी। उसी की सिफारिशों पर यह फैसला लिया गया।
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को यह भी बताया कि वैकल्पिक स्थान तय करने का कदम सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के बाद उठाया गया।
हालांकि, जंतर-मंतर की मान्यता हटाए जाने का मतलब दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का समाप्त होना नहीं है।
दिल्ली में अब कहां कर सकते हैं विरोध प्रदर्शन?
दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के लिए तीन स्थान निर्धारित किए हैं।
रामलीला मैदान — मध्य दिल्ली
बुराड़ी मैदान — उत्तरी दिल्ली
CBD ग्राउंड — पूर्वी दिल्ली
इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के विस्तृत नियम और नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जानी है।
प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों को संबंधित अधिकारियों से लागू अनुमति और सुरक्षा नियमों की जानकारी लेनी होगी।
क्या पांच लोगों का इकट्ठा होना गैरकानूनी जमावड़ा है?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 189 में गैरकानूनी जमावड़े की परिभाषा दी गई है।
कानून के अनुसार, पांच या अधिक लोगों की सभा उस स्थिति में गैरकानूनी हो सकती है, जब उनका साझा उद्देश्य आपराधिक बल का इस्तेमाल करना, कानून लागू होने से रोकना, आपराधिक अतिक्रमण करना या कोई अन्य निर्दिष्ट गैरकानूनी कार्य करना हो।
इसका मतलब है कि केवल पांच लोगों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने से अपने आप गैरकानूनी जमावड़े का अपराध नहीं बन जाता।
लेकिन अगर सभा कानूनी रूप से गैरकानूनी है और कोई व्यक्ति इसकी जानकारी होते हुए भी उसमें शामिल रहता है, तो धारा 189(2) के तहत छह महीने तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
वहीं, कानूनी आदेश के बावजूद गैरकानूनी जमावड़े से नहीं हटने पर धारा 189(3) के तहत दो साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
धारा 163 तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 प्रशासन को सार्वजनिक सुरक्षा, शांति और कानून-व्यवस्था से संबंधित तत्काल खतरे की स्थिति में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने की शक्ति देती है।
यदि कोई व्यक्ति जानते हुए वैध सरकारी आदेश का उल्लंघन करता है और उससे कानून में निर्धारित बाधा या नुकसान की स्थिति पैदा होती है, तो BNS की धारा 223 लागू हो सकती है।
इसके तहत सामान्य श्रेणी में अधिकतम छह महीने की कैद या ₹2,500 तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
अगर उल्लंघन से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा हो अथवा दंगे की आशंका उत्पन्न हो, तो अधिकतम एक साल की कैद या ₹5,000 तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
यदि गैरकानूनी जमावड़े के साझा उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा होती है, तो BNS की धारा 191 के तहत दंगे से संबंधित अतिरिक्त अपराध भी बन सकते हैं। इनकी सजा अलग है।
जरूरी बात यह है कि हर प्रदर्शन में ये धाराएं अपने आप लागू नहीं होतीं। कार्रवाई संबंधित आदेश, व्यक्ति के आचरण और कानूनी शर्तों पर निर्भर करती है।
CJP नेताओं की हिरासत से क्यों बढ़ी कानूनी बहस?
13 अक्टूबर को CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका अन्य कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस ने बिना अनुमति प्रवेश और पहले लागू शांति बनाए रखने की शर्तों के कथित उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की।
अगले दिन दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया।
यह न्यायिक हिरासत है, किसी अपराध में दोषसिद्धि के बाद सुनाई गई सजा नहीं।
क्या नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण, बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार देता है।
हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था तथा संविधान में निर्धारित अन्य आधारों पर उचित कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए पुलिस के प्रतिबंधात्मक आदेश और प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकार, दोनों की कानूनी सीमाएं हैं। किसी प्रतिबंध की वैधता को अदालत में चुनौती भी दी जा सकती है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा विवाद दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
फिलहाल जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है। लेकिन वहां जाने या किसी प्रदर्शन में शामिल होने से अपने आप जेल की सजा नहीं हो जाती। किसी भी आपराधिक कार्रवाई के लिए संबंधित कानून की शर्तें पूरी होना आवश्यक है।