Pellet Gun Row: घायल छात्र साहिल को लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी, बोले- जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
20 जुलाई के छात्र आंदोलन में घायल साहिल लोचब का मामला फिर गरमाया; पुलिस रिकॉर्ड में RAF के दो pellet rounds के इस्तेमाल की बात, सुप्रीम कोर्ट भी बना चुका है जांच समिति
20 जुलाई के छात्र आंदोलन में घायल साहिल लोचब का मामला फिर गरमाया; पुलिस रिकॉर्ड में RAF के दो pellet rounds के इस्तेमाल की बात, सुप्रीम कोर्ट भी बना चुका है जांच समिति
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट से घायल छात्र साहिल लोचब का मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार, 21 अगस्त को दिल्ली के Parliament Street Police Station पहुंचे और साहिल के मामले में कार्रवाई की मांग की।
राहुल गांधी इससे पहले भी छात्र प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने 24 जुलाई को साहिल को मीडिया के सामने लाकर दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट लगने से उसकी आंख गंभीर रूप से घायल हुई।
घायल साहिल के मामले में थाने पहुंचे राहुल
ABP की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी Parliament Street थाने में साहिल लोचब से जुड़े मामले को लेकर पहुंचे। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट के इस्तेमाल से छात्र को गंभीर चोट लगी और इस मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
राहुल गांधी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों पर इस तरह के हथियार के इस्तेमाल का आदेश किस अधिकारी ने दिया और इसके लिए किसकी जवाबदेही बनती है।
कौन है साहिल लोचब?
साहिल लोचब 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित छात्र प्रदर्शन में शामिल था। उस दिन CJP के नेतृत्व में परीक्षा और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। साहिल ने दावा किया कि इसी दौरान उसे पैलेट लगे, जिनमें से एक उसकी आंख में भी लगा और उसकी दृष्टि गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
राहुल गांधी ने 24 जुलाई को साहिल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।
शुरू में पुलिस ने किया था पैलेट के इस्तेमाल से इनकार
इस मामले में शुरुआत में दिल्ली पुलिस की ओर से पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने से इनकार किया गया था।
लेकिन बाद में Parliament Street Police Station की General Diary से जुड़ी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई। इसमें दर्ज विवरण के मुताबिक 20 जुलाई के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान Rapid Action Force यानी RAF ने anti-riot gun से दो ballistic cartridges और plastic pellet rounds का इस्तेमाल किया था।
यही रिकॉर्ड सामने आने के बाद पैलेट इस्तेमाल को लेकर विवाद और बढ़ गया।
किसके आदेश पर हुआ इस्तेमाल?
मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए General Diary के रिकॉर्ड के मुताबिक RAF के एक अधिकारी ने दर्ज कराया था कि Zone-1 में मौजूद DCP के निर्देश पर विभिन्न riot-control उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।
इनमें non-electrical shells, electrical shells, tear-smoke grenades और anti-riot gun rounds शामिल बताए गए।
हालांकि किस अधिकारी की व्यक्तिगत और कानूनी जिम्मेदारी बनती है, यह अभी जांच का विषय है। किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ दोष अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।
कितने लोग हुए थे घायल?
शुरुआती रिपोर्ट्स में कम से कम चार-पांच लोगों को pellet injuries होने की बात सामने आई थी। बाद में अस्पतालों से मिली जानकारी को लेकर किए गए दावों में संख्या ज्यादा बताई गई।
इस पूरे विवाद का केंद्र साहिल की आंख की चोट भी रही है, जिसे राहुल गांधी ने संसद के भीतर और बाहर सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाया।
हालांकि घायलों की अंतिम संख्या और प्रत्येक चोट किस हथियार से लगी, इन सभी पहलुओं की स्वतंत्र जांच अभी महत्वपूर्ण है।
राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से भी पूछे थे सवाल
राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखा था। उन्होंने पूछा था कि छात्रों पर पैलेट के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी और क्या गृह मंत्रालय को इसकी जानकारी थी।
राहुल ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
वहीं सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत BJP नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि पुलिस ने कठिन परिस्थिति में संयम बरता। सरकार और विपक्ष के बीच इसी मुद्दे को लेकर संसद में भी तीखी बहस हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई पांच सदस्यीय जांच समिति
इस मामले में एक बड़ा घटनाक्रम 20 अगस्त को सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई के छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए पांच सदस्यीय High-Powered Enquiry Committee गठित की।
समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।
समिति को केवल पुलिस और सुरक्षा बलों पर लगे अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की ही जांच नहीं करनी है, बल्कि प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित हिंसा और तोड़फोड़ के आरोपों को भी देखना है।
मामला अब सिर्फ राजनीतिक नहीं
राहुल गांधी का Parliament Street थाने पहुंचना ऐसे समय हुआ है जब पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति भी बन चुकी है।
ऐसे में अब तीन महत्वपूर्ण सवाल जांच के केंद्र में रहेंगे—पैलेट rounds के इस्तेमाल का आदेश किस स्तर पर दिया गया, उनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों दोनों को लगी चोटों के लिए किसकी क्या जिम्मेदारी बनती है।
फिलहाल राहुल गांधी ने घायल छात्र साहिल के लिए कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति के निष्कर्ष इस विवाद की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।
