Amit Shah in Siliguri: 'सिंडिकेट और कट-मनी राज का अंत करते नए कानून', ममता सरकार पर अमित शाह का बड़ा हमला
सिलीगुड़ी में तीन नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी का उद्घाटन; अमित शाह बोले- अब बंगाल में 'भय' की जगह 'भरोसे' और कानून का राज स्थापित करने की दिशा में काम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। शाह ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने सिंडिकेट, कट-मनी और रंगदारी की व्यवस्था बचाने के लिए नए कानूनों के क्रियान्वयन में बाधा डाली।
सिलीगुड़ी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार, 21 अगस्त को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में तीन नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। शाह ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन से जुड़े जरूरी कदम नहीं उठाए, क्योंकि ये कानून राज्य में कथित “सिंडिकेट, कट-मनी और रंगदारी” की व्यवस्था के लिए खतरा थे।
सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
ममता सरकार पर क्या बोले अमित शाह?
अमित शाह ने कहा कि जब पूरे देश में नए आपराधिक कानूनों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, तब पश्चिम बंगाल की तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने राज्य स्तर पर इनके क्रियान्वयन से जुड़े कदमों में देरी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को पता था कि नए कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य में कथित सिंडिकेट, कट-मनी और रंगदारी की व्यवस्था के लिए “मौत की घंटी” साबित होगा।
यह अमित शाह का राजनीतिक आरोप है। पूर्व TMC सरकार नए आपराधिक कानूनों पर पहले भी आपत्ति जताती रही थी और ममता बनर्जी ने 2024 में केंद्र से इनके क्रियान्वयन को स्थगित कर नए सिरे से संसदीय विचार-विमर्श की मांग की थी।
'भय से भरोसे की ओर बढ़ रहा बंगाल'
अमित शाह ने मौजूदा पश्चिम बंगाल सरकार की तारीफ करते हुए दावा किया कि नए आपराधिक कानूनों को लागू करने के साथ राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बंगाल अब “भय” के माहौल से “भरोसे” की व्यवस्था की तरफ आगे बढ़ रहा है।
शाह ने नए कानूनों को आम नागरिक, पीड़ित और शिकायतकर्ता केंद्रित बताते हुए कहा कि इनका उद्देश्य सिर्फ अपराधी को दंड देना नहीं, बल्कि पीड़ित को समय पर न्याय दिलाना है।
Zero FIR का भी किया जिक्र
केंद्रीय गृह मंत्री ने नए कानूनों के तहत Zero FIR की व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
Zero FIR में पीड़ित किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध उस थाना क्षेत्र में न हुआ हो। बाद में मामला संबंधित पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर किया जा सकता है।
शाह का कहना है कि इससे पीड़ितों को क्षेत्राधिकार के नाम पर अलग-अलग थानों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और न्याय प्रक्रिया तेजी से शुरू हो सकेगी।
कौन से हैं तीन नए आपराधिक कानून?
भारत में तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुए थे।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने Indian Penal Code यानी IPC की जगह ली।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) ने Code of Criminal Procedure यानी CrPC की जगह ली।
वहीं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) ने पुराने Indian Evidence Act का स्थान लिया।
केंद्र सरकार का कहना है कि इन कानूनों का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के दौर में बने आपराधिक कानूनों को बदलकर भारतीय जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था विकसित करना है।
26 अगस्त तक चलेगी प्रदर्शनी
सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में आयोजित प्रदर्शनी का नाम “Five Pillars: Transformed Justice System” रखा गया है।
यह प्रदर्शनी 21 से 26 अगस्त तक चलेगी। इसका उद्देश्य आम लोगों को नए कानूनों, पुलिस प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्य, FIR, जांच और न्याय प्रणाली में हुए बदलावों की जानकारी देना है।
अमित शाह ने लोगों, खासकर कानून से जुड़े लोगों और युवाओं से प्रदर्शनी देखने की अपील की।
घुसपैठ पर भी दिया बड़ा बयान
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है और अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वालों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
शाह ने इसके लिए “Detect-Delete-Deport” व्यवस्था का उल्लेख किया—यानी पहले अवैध घुसपैठिए की पहचान, फिर संबंधित रिकॉर्ड से नाम हटाने की कानूनी प्रक्रिया और उसके बाद निर्वासन।
हालांकि किसी व्यक्ति को विदेशी या अवैध प्रवासी घोषित करने तथा देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया लागू कानून और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होती है।
CAA को लेकर भी ममता बनर्जी को घेरा
अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA का भी जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने सत्ता में रहते हुए पश्चिम बंगाल में CAA का विरोध किया और इसे लागू होने से रोकने की कोशिश की।
CAA को लेकर TMC और BJP के बीच लंबे समय से राजनीतिक टकराव रहा है। TMC ने इस कानून के कई प्रावधानों और इसके राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे, जबकि BJP इसे पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न के कारण आए पात्र गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने वाला कानून बताती रही है।
सीमा सुरक्षा पर भी फोकस
अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा सिर्फ नए कानूनों तक सीमित नहीं है।
इस दौरे के दौरान उन्होंने Sashastra Seema Bal यानी SSB से जुड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। सिलीगुड़ी क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब है।
यहीं स्थित Siliguri Corridor को आम तौर पर “Chicken's Neck” कहा जाता है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है।
शाह के दौरे में BSF, SSB, खुफिया एजेंसियों और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच सीमा सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा भी शामिल है।
नए कानूनों पर पहले सवाल उठाती रही थीं ममता
यह भी ध्यान देने योग्य है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नए आपराधिक कानूनों का शुरुआत से विरोध करती रही थीं।
जून 2024 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तीनों कानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित करने और संसद में फिर से व्यापक चर्चा कराने की मांग की थी।
ममता का तर्क था कि इतने व्यापक कानूनी बदलाव पर सभी पक्षों के बीच पर्याप्त विचार-विमर्श होना चाहिए।
इसलिए अमित शाह के मौजूदा आरोप और TMC के पुराने रुख को अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के रूप में देखना जरूरी है।
बंगाल की राजनीति में फिर कानून-व्यवस्था केंद्र में
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था, घुसपैठ, कट-मनी और सिंडिकेट जैसे मुद्दों को नई BJP सरकार लगातार प्रमुखता से उठा रही है।
वहीं विपक्षी TMC नए शासन की कार्रवाई और पुराने मामलों को दोबारा खोलने को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है।
ऐसे में नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी के मंच से अमित शाह का ममता बनर्जी पर हमला आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
