ट्रंप ने रूस प्रतिबंध कानून पर किए साइन, भारत पर 100% तक टैरिफ का खतरा; जानिए क्या होगा असर

डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध वाले कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे रूसी तेल-गैस के बड़े खरीदार देशों पर अमेरिका 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। भारत भी संभावित रूप से इसके दायरे में आ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है। इसमें रूसी तेल या गैस के बड़े खरीदार देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार है, इसलिए नई व्यवस्था का भारतीय निर्यात और भारत-अमेरिका व्यापार पर संभावित असर चर्चा में है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 19 सितंबर 2026

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रूस प्रतिबंध कानून पर ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद भारत पर संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

खबर में खास

  • ट्रंप ने रूस प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर
  • 100% तक अतिरिक्त टैरिफ का प्रावधान
  • भारत पर अभी 100% नया टैरिफ लागू होने की पुष्टि नहीं
  • रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर संभावित असर
भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों पर एक बार फिर नजरें टिक गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों वाले कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
इस कानून का नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है। इसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथ प्रतिबंधों से बचकर तेल पहुंचाने वाले तथाकथित 'shadow fleet' पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर लगाए जा सकने वाले नए अमेरिकी टैरिफ से जुड़ा है।

क्या भारत पर 100% टैरिफ लग गया?

नहीं। फिलहाल इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि अमेरिका ने भारत के सभी सामान पर तत्काल 100% नया टैरिफ लगा दिया है।
Reuters के मुताबिक नया कानून रूसी कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों और कुछ अन्य निर्धारित श्रेणियों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था करता है। कानून लागू करने में अमेरिकी प्रशासन के पास लक्ष्य तय करने और कुछ मामलों में छूट देने संबंधी अधिकार भी हैं।
भारत और चीन रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए दोनों देशों पर संभावित असर को लेकर चर्चा तेज है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नया कानून?

भारत दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों में शामिल है और हाल के वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है।
इसी वजह से अमेरिकी कानून के तहत भारत संभावित रूप से उन देशों में आ सकता है जिनके निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए। हालांकि कानून में देशों के चयन की प्रक्रिया को लेकर कुछ अस्पष्टता है और यह जरूरी नहीं कि अधिकतम 100% दर हर पात्र देश पर समान रूप से लागू हो।

भारतीय कंपनियों पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर भविष्य में भारतीय सामान पर इस कानून के तहत भारी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिका में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इससे अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
Reuters के अनुसार इस मुद्दे ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को भी जटिल बनाया है। भारतीय रिफाइनरियों और उद्योग जगत में संभावित tariff से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता है।
लेकिन वास्तविक आर्थिक असर किस दर से, किन भारतीय वस्तुओं पर और कब tariff लागू होता है, इस पर निर्भर करेगा। इसलिए इस समय किसी निश्चित नुकसान का आंकड़ा बताना जल्दबाजी होगी।

क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा?

भारत सरकार ने फिलहाल ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है।
नई दिल्ली ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है और तेल की खरीद बाजार की परिस्थितियों तथा अलग-अलग स्रोतों से आपूर्ति को ध्यान में रखकर की जाएगी। भारत ने अमेरिका को यह भी चेताया है कि रूसी तेल की खरीद को लेकर नए tariff कदम द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाल सकते हैं।

अमेरिका ने यह कानून क्यों बनाया?

अमेरिका का घोषित उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को सीमित करके यूक्रेन युद्ध के लिए उपलब्ध आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाना है।
कानून रूस के ऊर्जा और रक्षा उद्योग के अलावा प्रतिबंधों से बचने में इस्तेमाल होने वाले tanker network को भी निशाना बनाता है। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को इसे कानून बना दिया।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में यह विधेयक 262-159 मतों से पारित हुआ था, जबकि सीनेट इसे इससे पहले 86-11 मतों से पारित कर चुकी थी।

आगे क्या देखना होगा?

भारत के लिए अब सबसे अहम सवाल यह होगा कि अमेरिकी प्रशासन कानून के tariff प्रावधानों को किस तरह लागू करता है और भारत को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।
इसलिए “भारत पर 100% टैरिफ लग गया” और “भारत पर 100% तक टैरिफ का जोखिम पैदा हुआ”—इन दोनों बातों में अंतर है। फिलहाल दूसरी बात उपलब्ध जानकारी के ज्यादा करीब है।

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