समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए रामगोपाल यादव के साथ उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और गुजरात क्रिकेट से जुड़े धनराज के चयन ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
सपा की सूची में अचानक आया बड़ा कॉरपोरेट चेहरा, धनराज नथवानी के नाम ने बदल दी राज्यसभा चुनाव की चर्चा
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज नथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 30 सितंबर 2026
खबर में खास
धनराज नथवानी को सपा ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार
रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी
अंबानी परिवार के करीबी माने जाते हैं नथवानी
गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं
रामगोपाल यादव के साथ दाखिल करेंगे नामांकन
उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बड़ा राजनीतिक सरप्राइज दिया है। पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव के साथ कॉरपोरेट जगत के बड़े नाम धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित किया है। रामगोपाल यादव का नाम पहले से चर्चा में था, लेकिन धनराज नथवानी की उम्मीदवारी ने राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया है।
दोनों उम्मीदवार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। धनराज नथवानी सक्रिय दलगत राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा नहीं रहे हैं। इसलिए सवाल उठ रहा है कि आखिर वह कौन हैं और अखिलेश यादव ने राज्यसभा के लिए उन पर भरोसा क्यों जताया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज में बड़ी जिम्मेदारी
धनराज परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। वह कंपनी के कॉरपोरेट मामलों और गुजरात में रिलायंस के विभिन्न प्रोजेक्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। इसी कारण उन्हें उद्योगपति मुकेश अंबानी और अंबानी परिवार का करीबी माना जाता है।
धनराज नथवानी के पिता परिमल नथवानी भी रिलायंस इंडस्ट्रीज से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। वह वर्तमान में झारखंड से राज्यसभा के सदस्य हैं। इस तरह धनराज नथवानी का परिवार कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ राजनीति में भी प्रभावशाली पहचान रखता है।
क्रिकेट और फुटबॉल प्रशासन में सक्रिय
धनराज नथवानी केवल कॉरपोरेट जगत तक सीमित नहीं हैं। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और नरेंद्र मोदी स्टेडियम से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। वह गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर रहे हैं।
उनकी आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, वह खेल, सामाजिक कार्य, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। उन्हें कॉरपोरेट प्रशासन के साथ खेल प्रबंधन का भी लंबा अनुभव है।
लंदन से की इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई
धनराज नथवानी ने लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई की है। उन्होंने कॉरपोरेट लॉ और पब्लिक रिलेशन मैनेजमेंट में विशेषज्ञता के साथ MBA भी किया है। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने रिलायंस समूह में कई जिम्मेदारियां संभालीं।
वह द्वारका देवस्थान समिति के उपाध्यक्ष सहित कई सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं। उनकी पहचान एक कॉरपोरेट अधिकारी के साथ खेल प्रशासक और सामाजिक कार्यों में सक्रिय व्यक्ति के रूप में रही है।
अखिलेश यादव ने क्यों लगाया दांव?
समाजवादी पार्टी ने धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाने की आधिकारिक वजह विस्तार से नहीं बताई है। हालांकि, इस फैसले को पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच बढ़ाने और कॉरपोरेट तथा पेशेवर जगत के प्रभावशाली लोगों को साथ जोड़ने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
धनराज नथवानी का गुजरात, रिलायंस समूह और खेल प्रशासन से गहरा संबंध है। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी के जरिए सपा ने उत्तर प्रदेश से बाहर भी एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। हालांकि इस रणनीति का वास्तविक असर राज्यसभा चुनाव और आगे की पार्टी गतिविधियों में ही दिखाई देगा।
उत्तर प्रदेश में 10 सीटों का चुनाव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। समाजवादी पार्टी ने फिलहाल रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी की उम्मीदवारी घोषित की है। पार्टी के पास अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या मानी जा रही है।
अखिलेश यादव के तीसरा उम्मीदवार उतारने की संभावना को लेकर भी चर्चा चल रही है। यदि सपा तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारती है तो राज्यसभा की एक सीट पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
धनराज नथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर अखिलेश यादव ने सपा की राजनीति में एक नया कॉरपोरेट और राष्ट्रीय कनेक्शन जोड़ दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह चयन केवल राज्यसभा की सुरक्षित सीट तक सीमित रहता है या नथवानी आने वाले समय में समाजवादी पार्टी की बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनते हैं।