UP चुनाव 2027: BJP में टिकट चाहने वालों की बनेगी अलग लिस्ट! पुराने नाराज नेताओं की भी वापसी की तैयारी, जिलाध्यक्षों को निर्देश

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जिलाध्यक्षों को नए नेताओं, टिकट के दावेदारों और निष्क्रिय पुराने पदाधिकारियों की अलग-अलग सूची बनाने को कहा है। प्रदेश मुख्यालय में होगी रिपोर्ट की समीक्षा।

UP Election 2027: भाजपा ने यूपी में टिकट चाहने वाले और बिना टिकट पार्टी से जुड़ने के इच्छुक लोगों की अलग सूची बनाने को कहा है। पुराने नाराज नेताओं से भी संपर्क होगा। जानिए नई संगठनात्मक तैयारी।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 2 नवंबर 2026
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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने जिलाध्यक्षों को टिकट के इच्छुक लोगों और अन्य संभावित नए सदस्यों की अलग-अलग सूची तैयार करने को कहा है।

 खबर में खास

  • भाजपा जिलाध्यक्षों को पार्टी में शामिल होने के इच्छुक लोगों की अलग-अलग सूची तैयार करने के निर्देश।
  • टिकट चाहने वालों और बिना टिकट की अपेक्षा वाले लोगों की अलग पहचान होगी।

  • पुराने सांसदों, विधायकों, जिलाध्यक्षों और निष्क्रिय पदाधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।

  • डॉक्टरों, वकीलों, व्यापारियों और अन्य पेशेवर समूहों के प्रभावशाली लोगों की भी सूची तैयार होगी।

  • जिला स्तर की रिपोर्ट प्रदेश भाजपा मुख्यालय भेजी जाएगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए एक नई कवायद शुरू की है। पार्टी अब केवल नए नेताओं को जोड़ने पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि कौन विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखता है और कौन बिना टिकट की अपेक्षा के पार्टी के साथ काम करना चाहता है।
सोमवार, 2 नवंबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने सभी जिलाध्यक्षों को इन दोनों श्रेणियों के लोगों की अलग-अलग सूची तैयार करने को कहा है। इसके अलावा पार्टी उन पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी संपर्क करेगी, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय नहीं हैं या खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

टिकट चाहने वालों की अलग सूची क्यों?

भाजपा की नई संगठनात्मक कवायद में विधानसभा टिकट के इच्छुक लोगों और बिना टिकट की अपेक्षा के पार्टी में आने वालों की पहचान करने पर जोर दिया गया है।
जिलाध्यक्ष अपने अंतर्गत आने वाले मंडलों से जानकारी जुटाएंगे। इसमें संभावित नए सदस्यों, पूर्व पदाधिकारियों और क्षेत्र में सक्रिय प्रभावशाली लोगों का विवरण शामिल होगा।
ये सूचियाँ प्रदेश भाजपा मुख्यालय भेजी जाएंगी, जहाँ वरिष्ठ नेता आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे।
हालांकि, इस प्रक्रिया को उम्मीदवार चयन या टिकट मिलने की गारंटी नहीं माना जा सकता। अभी पार्टी ने इसके आधार पर कोई नई उम्मीदवार सूची घोषित नहीं की है।

पुराने नाराज नेताओं को भी मनाने की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ऐसे पूर्व जिलाध्यक्षों, विधायकों, सांसदों और अन्य पदाधिकारियों की पहचान करेगी, जो लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों से दूर हैं।
इन नेताओं से व्यक्तिगत संपर्क किया जाएगा और उनकी शिकायतों को समझने का प्रयास होगा।
इससे पहले 30 अक्टूबर को लखनऊ में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत नाराजगी छोड़कर एकजुट होने की अपील की थी।
अब जिला स्तर पर पुराने नेताओं तक पहुँचने की नई कवायद उसी व्यापक संगठनात्मक प्रयास का हिस्सा है।

डॉक्टर, वकील और कारोबारियों पर भी ध्यान

भाजपा की नई योजना में सिर्फ राजनीतिक नेताओं को ही नहीं, बल्कि अलग-अलग पेशेवर समूहों के प्रभावशाली लोगों को भी शामिल किया गया है।
जिलाध्यक्षों को डॉक्टरों, वकीलों, व्यापारियों, उद्योगपतियों और अन्य पेशेवरों की क्षेत्रवार सूची तैयार करने के लिए कहा गया है।
पार्टी इन लोगों से संपर्क करके स्थानीय समस्याओं, सरकार की योजनाओं और संगठन से जुड़ी अपेक्षाओं पर बातचीत करना चाहती है।
पेशेवर तथा कारोबारी समूहों तक पहुँच बढ़ाने और संगठनात्मक प्रकोष्ठों को सक्रिय करने की भाजपा की तैयारी का उल्लेख किया गया है।

31 अक्टूबर की बैठक में क्या फैसला हुआ?

भाजपा की इस संगठनात्मक पहल से जुड़े निर्देश शनिवार, 31 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित बैठक में सामने आए थे।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी मौजूद थे।
बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, पुराने पदाधिकारियों को जिम्मेदारियाँ देने और अलग-अलग सामाजिक समूहों से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया।
पार्टी पदाधिकारियों से कहा गया कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को उनकी क्षमता और जिम्मेदारी के अनुसार काम सौंपा जाए।

2027 के चुनाव से पहले क्या हैं राजनीतिक मायने?

उत्तर प्रदेश में भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी अपनी-अपनी संगठनात्मक तैयारियों में जुटी हैं।
समाजवादी पार्टी भी उम्मीदवारों का आकलन और स्थानीय स्तर पर फीडबैक जुटाने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। ऐसे में भाजपा का टिकट चाहने वालों और संगठन से जुड़ने के इच्छुक लोगों की अलग-अलग पहचान करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, इन तैयारियों के आधार पर अभी चुनावी परिणाम या किसी पार्टी की संभावित जीत-हार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
आगे किस बात पर नजर रहेगी?
अब देखना होगा कि भाजपा जिलाध्यक्ष कब तक अपनी रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय को सौंपते हैं और इन सूचियों के आधार पर पार्टी क्या संगठनात्मक निर्णय लेती है।
यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि नए लोगों को जोड़ने और पुराने नेताओं से संपर्क के लिए जिलावार कोई औपचारिक समयसीमा घोषित की जाएगी या नहीं।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भाजपा इस कवायद को केवल सूची तैयार करने तक सीमित रखेगी या पुराने पदाधिकारियों और नए लोगों को संगठन में नई जिम्मेदारियाँ भी देगी।

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