‘राजभर का दिमाग खिसक गया है, अच्छे डॉक्टर की जरूरत’, शिवपाल यादव का पलटवार; आखिर किस बात पर छिड़ी जुबानी जंग?
UP चुनाव 2027 से पहले ओमप्रकाश राजभर और शिवपाल यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राजभर के बयानों पर शिवपाल ने पलटवार करते हुए डॉक्टर से सलाह लेने की टिप्पणी की।
सपा नेता शिवपाल यादव ने योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बयानों पर तीखा पलटवार किया है। राजभर सपा की अंदरूनी स्थिति और UP के बंटवारे को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं। जानिए दोनों नेताओं के बीच विवाद कहां से बढ़ा।
‘राजभर का दिमाग खिसक गया है, अच्छे डॉक्टर की जरूरत’, शिवपाल यादव का पलटवार; आखिर किस बात पर छिड़ी जुबानी जंग?
UP चुनाव 2027 से पहले शिवपाल यादव और ओमप्रकाश राजभर के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | देवरिया | 22 सितंबर 2026
खबर में खास
ओमप्रकाश राजभर पर शिवपाल यादव का तीखा पलटवार
बोले- राजभर को अच्छे डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत
सपा में कलह का दावा करते रहे हैं राजभर
UP के चार हिस्से और अलग पूर्वांचल का मुद्दा भी चर्चा में
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव और सुभासपा प्रमुख व योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
देवरिया पहुंचे शिवपाल यादव से जब ओमप्रकाश राजभर के बयानों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बेहद तीखा जवाब दिया। शिवपाल ने कहा कि राजभर का “दिमाग खिसक गया है” और उन्हें अच्छे डॉक्टर की जरूरत है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर राजभर को डॉक्टर नहीं मिल रहा है तो वह उन्हें किसी अच्छे डॉक्टर का नाम बता सकते हैं। यह शिवपाल यादव की राजनीतिक टिप्पणी है, कोई चिकित्सकीय आकलन नहीं।
लेकिन सवाल है कि शिवपाल और राजभर के बीच बयानबाजी अचानक इतनी तीखी क्यों हो गई?
इसके पीछे सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि पिछले कुछ समय से दोनों तरफ से जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की लंबी कड़ी है।
राजभर के किन बयानों पर आया शिवपाल का जवाब?
ओमप्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं।
22 सितंबर को सामने आए एक ताजा बयान में राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है और अखिलेश यादव तथा शिवपाल यादव के बीच विवाद है। यह राजभर का राजनीतिक दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले भी राजभर सपा के भीतर टूट और नेताओं के बीच मतभेद को लेकर दावे करते रहे हैं।
शिवपाल यादव इन दावों को पहले भी खारिज कर चुके हैं।
यह पहली बार नहीं, जून में भी भिड़े थे दोनों
शिवपाल और राजभर की यह जुबानी जंग नई नहीं है।
जून 2026 में जब राजभर ने समाजवादी पार्टी में टूट को लेकर दावा किया था, तब भी शिवपाल यादव ने इसे खारिज किया था। शिवपाल ने आरोप लगाया था कि ऐसे बयान राजनीतिक लाभ के लिए दिए जा रहे हैं और कहा था कि सपा का कोई सांसद टूटने वाला नहीं है।
यानी सितंबर की मौजूदा बयानबाजी को समझने के लिए जून का यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है।
दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव पिछले कई महीनों से चलता आ रहा है।
‘अहीर-जहीर’ वाले पोस्ट पर भी हुआ था विवाद
इसी महीने दोनों नेताओं के बीच एक और विवाद सामने आया था।
9 सितंबर को शिवपाल यादव ने राजभर की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि BJP के साथ जाने के बाद राजभर की “बुद्धि फिर गई है” और उनका इलाज हो जाएगा।
अब करीब दो सप्ताह बाद शिवपाल ने एक बार फिर डॉक्टर और इलाज वाला तंज दोहराया है।
यानी मौजूदा बयान को अकेले देखने के बजाय यह शिवपाल-राजभर के बीच चल रही लगातार राजनीतिक बयानबाजी की अगली कड़ी है।
UP को चार हिस्सों में बांटने के दावे से भी चर्चा में राजभर
इस विवाद के बीच ओमप्रकाश राजभर का एक और बड़ा बयान चर्चा में है।
राजभर ने उत्तर प्रदेश को भविष्य में चार हिस्सों में बांटे जाने का दावा किया है। उन्होंने प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य को लेकर कहा कि अगर ऐसा होता है तो वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होना चाहिए।
राजभर ने यह भी दावा किया कि इस मुद्दे पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात हुई है और जाति जनगणना पूरी होने के बाद राज्य के विभाजन के रास्ते में बाधा नहीं रहेगी।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह राजभर का दावा है। उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने का कोई घोषित सरकारी फैसला इन बयानों से स्थापित नहीं होता।
UP के बंटवारे की मांग नई नहीं
राजभर के ताजा बयान के कारण UP के विभाजन का मुद्दा दोबारा चर्चा में आया है, लेकिन इसकी राजनीतिक कहानी पुरानी है।
2011 में तत्कालीन मायावती सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्य को पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश में बांटने का प्रस्ताव पारित कराया था। हालांकि यह प्रस्ताव आगे राज्य के वास्तविक विभाजन में तब्दील नहीं हुआ।
इस पुराने संदर्भ को समझना जरूरी है, क्योंकि राजभर का मौजूदा बयान किसी पहली बार सामने आए प्रस्ताव के बारे में नहीं है, बल्कि वर्षों पुराने राजनीतिक मुद्दे को फिर चर्चा में ला रहा है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर क्या बोले शिवपाल?
देवरिया में शिवपाल यादव से 2027 के विधानसभा चुनाव और सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर भी सवाल हुआ।
उन्होंने कहा कि गठबंधन और सीटों से जुड़े फैसले दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होंगे। इससे पहले 2 सितंबर को शिवपाल ने कहा था कि सपा और कांग्रेस 2027 का विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ेंगे।
हालांकि सीटों के बंटवारे या अंतिम चुनावी समझौते की विस्तृत घोषणा अभी अलग राजनीतिक प्रक्रिया का विषय है।
2027 से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह जुबानी जंग?
राजभर की सुभासपा इस समय BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ है, जबकि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं।
ऐसे में दोनों नेताओं की बयानबाजी सिर्फ व्यक्तिगत कटाक्ष तक सीमित नहीं है। इसमें सपा की अंदरूनी स्थिति, पिछड़ा वर्ग की राजनीति, प्रस्तावित पूर्वांचल, गठबंधन और 2027 के विधानसभा चुनाव जैसे कई मुद्दे एक साथ जुड़ रहे हैं।
फिलहाल राजभर के सपा में अंदरूनी कलह वाले दावों और शिवपाल के जवाब को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी भी पक्ष के दावे को स्वतंत्र तथ्य मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी है।