बिहार, महाराष्ट्र के बाद अब UP में गठबंधन तलाश रहे ओवैसी, पुराने चुनावों के आंकड़े क्या कहानी बताते हैं?
UP चुनाव 2027 से पहले AIMIM ने गठबंधन की संभावना खुली रखी है। बिहार में पार्टी ने सीटें जीतीं, महाराष्ट्र में भी चुनावी तालमेल किया, लेकिन UP में अब तक विधानसभा सीट नहीं मिली। जानिए पुराने चुनावों के आंकड़े।
असदुद्दीन ओवैसी UP चुनाव 2027 से पहले गठबंधन की संभावनाएं तलाश रहे हैं। लेकिन इससे पहले बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में AIMIM के चुनावी प्रयोग कैसे रहे? आंकड़ों के जरिए समझिए पूरी तस्वीर।
बिहार, महाराष्ट्र के बाद अब UP में गठबंधन तलाश रहे ओवैसी, पुराने चुनावों के आंकड़े क्या कहानी बताते हैं?
UP चुनाव 2027 से पहले AIMIM ने दूसरे दलों के साथ गठबंधन की संभावना खुली रखी है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 22 सितंबर 2026
खबर में खास
UP 2027 से पहले गठबंधन की कोशिश में AIMIM
बिहार में AIMIM ने 2020 में जीती थीं पांच सीटें
महाराष्ट्र में VBA के साथ हुआ था चुनावी तालमेल
UP में 2017, 2022 और 2024 में अलग-अलग प्रयोग
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM एक बार फिर गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। ओवैसी ने हाल में कहा है कि उनकी पार्टी की राज्य इकाई दूसरे राजनीतिक दलों के साथ बातचीत कर रही है और गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला आने वाले समय में किया जाएगा।
लेकिन UP में ओवैसी की नई गठबंधन कोशिश के बीच एक सवाल स्वाभाविक है—इससे पहले AIMIM ने जिन राज्यों में अकेले या दूसरे दलों के साथ चुनावी प्रयोग किए, वहां नतीजे कैसे रहे?
बिहार से महाराष्ट्र और तेलंगाना से उत्तर प्रदेश तक के चुनावी आंकड़े अलग-अलग तस्वीर दिखाते हैं।
UP में फिर गठबंधन की कोशिश क्यों?
ओवैसी ने हाल के UP दौरे में कहा कि उनकी पार्टी उन राजनीतिक दलों के साथ काम करने के लिए तैयार है जो BJP के खिलाफ साथ आना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई एक दल अकेले यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता और AIMIM बातचीत के लिए तैयार है।
अब ओवैसी ने यह भी कहा है कि उनकी राज्य इकाई राजनीतिक दलों के संपर्क में है और गठबंधन की तस्वीर आने वाले समय में साफ होगी।
अगर AIMIM अकेले चुनाव लड़ती है तो पार्टी नेताओं की ओर से बड़ी संख्या में सीटों पर तैयारी की बात कही गई है, हालांकि अंतिम संख्या गठबंधन की बातचीत पर निर्भर कर सकती है।
बिहार में AIMIM ने जीती थीं पांच सीटें
ओवैसी की पार्टी के लिए बिहार का 2020 विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण रहा।
उस चुनाव में AIMIM ने 20 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे और पांच सीटें जीतीं। पार्टी को अमौर, बहादुरगंज, बायसी, जोकीहाट और कोचाधामन में सफलता मिली।
उस समय AIMIM ने उपेंद्र कुशवाहा की तत्कालीन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी समेत अन्य दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था।
नतीजों में AIMIM को पांच और BSP को एक सीट मिली, जबकि RLSP सीट नहीं जीत सकी।
हालांकि बाद में AIMIM के पांच में से चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे।
यानी बिहार में गठबंधन के भीतर AIMIM अपनी सीटें जीतने में सफल रही, लेकिन गठबंधन के सभी घटकों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं था।
महाराष्ट्र में दलित-मुस्लिम समीकरण का प्रयोग
महाराष्ट्र में AIMIM ने प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ 2019 लोकसभा चुनाव में तालमेल किया।
इस प्रयोग के पीछे दलित और मुस्लिम सामाजिक आधार को एक राजनीतिक मंच पर लाने की कोशिश भी देखी गई।
2019 के लोकसभा चुनाव में AIMIM ने औरंगाबाद सीट जीती, जबकि वंचित बहुजन आघाड़ी कोई लोकसभा सीट नहीं जीत सकी।
इस चुनावी प्रयोग ने AIMIM को महाराष्ट्र में लोकसभा प्रतिनिधित्व दिलाया, लेकिन गठबंधन सहयोगी के लिए परिणाम सीट में तब्दील नहीं हुआ।
तेलंगाना में तस्वीर अलग
AIMIM का सबसे मजबूत राजनीतिक आधार तेलंगाना और खासकर हैदराबाद रहा है।
2018 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में AIMIM ने आठ सीटों पर चुनाव लड़ा और सात सीटें जीतीं। उस समय तत्कालीन TRS और AIMIM के बीच औपचारिक सीट-बंटवारे वाले गठबंधन के बजाय राजनीतिक तालमेल की स्थिति थी।
2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भी AIMIM ने नौ सीटों पर उम्मीदवार उतारे और सात सीटें जीतीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद लोकसभा सीट बरकरार रखी।
इसलिए तेलंगाना का AIMIM मॉडल UP और बिहार से अलग है, क्योंकि हैदराबाद में पार्टी का पुराना संगठनात्मक और चुनावी आधार मौजूद है।
UP में 2017 में 38 सीटों पर उतरी थी AIMIM
अब उत्तर प्रदेश का रिकॉर्ड देखिए।
2017 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को लगभग 2.04 लाख वोट मिले, लेकिन कोई विधानसभा सीट नहीं मिली। 37 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी।
इसके पांच साल बाद AIMIM ने UP में अपना दायरा काफी बढ़ा दिया।
2022 में 95 सीटें, लेकिन जीत नहीं
2022 के UP विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा।
इसके बावजूद पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी और राज्य स्तर पर उसका वोट शेयर करीब 0.49% रहा।
यानी 2017 से 2022 के बीच AIMIM ने उम्मीदवारों की संख्या जरूर बढ़ाई, लेकिन विधानसभा में प्रतिनिधित्व हासिल नहीं कर सकी।
2024 में आया PDM न्याय मोर्चा
2024 के लोकसभा चुनाव में रणनीति फिर बदली।
AIMIM ने पल्लवी पटेल की अपना दल (कमेरावादी) समेत अन्य दलों के साथ PDM न्याय मोर्चा बनाया। PDM को पिछड़ा, दलित और मुस्लिम सामाजिक समीकरण के राजनीतिक प्रयास के रूप में पेश किया गया।
मोर्चे ने UP की कई लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन कोई उम्मीदवार लोकसभा सीट नहीं जीत पाया। AIMIM का अपना कोई उम्मीदवार इस मोर्चे के तहत मैदान में नहीं था।
इस तरह UP में AIMIM ने पिछले वर्षों में अकेले चुनाव लड़ने से लेकर गठबंधन/मोर्चे तक अलग-अलग रणनीतियां आजमाई हैं, लेकिन अब तक राज्य से विधानसभा या लोकसभा सीट हासिल नहीं हुई।
अब 2027 में क्या बदलना चाहती है AIMIM?
2027 के चुनाव से पहले ओवैसी UP में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों में उन्होंने बहराइच, बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर और कानपुर समेत कई स्थानों पर सभाएं की हैं। आगे श्रावस्ती और आजमगढ़ में भी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
ओवैसी मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं को केवल वोट देने तक सीमित न रहकर राजनीतिक हिस्सेदारी हासिल करनी चाहिए। यह ओवैसी का राजनीतिक तर्क है।
2 अक्टूबर और गठबंधन की चर्चा
कानपुर दौरे के दौरान ओवैसी ने गठबंधन को लेकर 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात कही थी। इसके बाद उन्होंने यह भी बताया कि AIMIM की प्रदेश इकाई दूसरे दलों के साथ बातचीत कर रही है।
फिलहाल किसी बड़े गठबंधन या सीट-बंटवारे की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि AIMIM गठबंधन चाहती है या नहीं—वह इच्छा जाहिर कर चुकी है।
अगला बड़ा अपडेट यह होगा कि AIMIM की बातचीत आखिर किस दल के साथ आगे बढ़ती है, कितनी सीटों पर सहमति बनती है और पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारती है।