CJP प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपी रविंदर गोविंद हिंदू जेल से रिहा, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत

दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों से मारपीट के मामले में गिरफ्तार रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू जेल से बाहर आए। हिंदू रक्षा दल ने स्वागत किया। रविंदर ने आत्मरक्षा का दावा किया।

दिल्ली के CJP प्रदर्शन में मारपीट के आरोप में गिरफ्तार रविंदर गोविंद हिंदू की रिहाई के बाद फूल-मालाओं से स्वागत हुआ। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार घेर ली थी और मारपीट आत्मरक्षा में हुई।

कनॉट प्लेस में मारपीट के वायरल वीडियो के बाद हुई थी गिरफ्तारी, अब रिहाई पर रविंदर ने बताया अपना पक्ष

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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपी रविंदर गोविंदा का रिहाई के बाद फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मारपीट के आरोप में गिरफ्तार रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू जेल से बाहर आ गए हैं। रिहाई के बाद हिंदू रक्षा दल के सदस्यों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया।
रविंदर ने घटना को लेकर अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पहले उनकी कार को घेर लिया था। उनका कहना है कि उन्होंने किसी पर हमला करने की शुरुआत नहीं की, बल्कि अपने और साथियों के बचाव में मारपीट की थी।
इससे पहले दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने रविंदर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था।

खबर में खास

  • CJP प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपी रविंदर गोविंद हिंदू जेल से रिहा।
  • हिंदू रक्षा दल के सदस्यों ने फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया।

  • रविंदर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पहले उनकी कार घेरकर गाली-गलौज की।

  • दिल्ली पुलिस ने मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया था।

जेल से बाहर आते ही फूल-मालाओं से हुआ स्वागत

रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू की जेल से रिहाई के बाद हिंदू रक्षा दल के सदस्य उनका स्वागत करने पहुंचे।
रविंदर को फूल-मालाएं पहनाई गईं। स्वागत की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।
रविंदर का नाम 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों के साथ हुई मारपीट के मामले में सामने आया था। पुलिस ने वीडियो के आधार पर कार्रवाई करते हुए उन्हें और तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।
हालांकि, जेल से रिहाई का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में गलत साबित हो गए हैं।

रविंदर गोविंदा ने मारपीट पर क्या सफाई दी?

रिहाई के बाद रविंदर ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ झंडेवालान मंदिर जा रहे थे।
उनके मुताबिक, कार पर भगवा झंडा लगा था और उस पर धार्मिक नारा लिखा हुआ था।
रविंदर ने आरोप लगाया कि रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार घेर ली और गाली-गलौज करने लगे।
उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने कार पर लातें भी मारीं। उनके अनुसार, जब मौके पर पुलिस दिखाई दी, तब वे कार से बाहर निकले।
रविंदर का कहना है कि इसके बाद हुई मारपीट आत्मरक्षा में की गई थी।
हालांकि, रविंदर के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच में घटना की पूरी परिस्थितियों और सभी पक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

वायरल वीडियो में क्या दिखाई दिया था?

10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
वीडियो में कुछ लोग युवा प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट करते दिखाई दिए थे।
मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया और आरोपियों की पहचान शुरू की।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया था। CJP ने इस घटना की निंदा की और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई।
वहीं अब रविंदर गोविंदा ने दावा किया है कि वायरल वीडियो में घटना की शुरुआत नहीं दिखाई गई है।

दिल्ली पुलिस ने किन चार लोगों को गिरफ्तार किया था?

इस घटना में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों की पहचान की थी।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के नाम हैं:
  1. रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू

  2. रमन सैनी

  3. विवेकानंद उर्फ विवेक

  4. कपिल कुमार

पुलिस ने वायरल वीडियो सामने आने के बाद मारपीट के मामले में कार्रवाई की थी।
हिंदू रक्षा दल के पदाधिकारियों ने इन लोगों के अपने संगठन से जुड़े होने का दावा किया था।
फिलहाल रविंदर की रिहाई की जानकारी सामने आई है। अन्य आरोपियों की वर्तमान कानूनी स्थिति और सभी के खिलाफ जारी कार्रवाई की अलग पुष्टि आवश्यक है।

'जिसे लड़की बताया, वह लड़का था', रविंदर का दावा

रविंदर गोविंदा ने वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले काली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति की पहचान पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया की कुछ पोस्ट में उस व्यक्ति को लड़की बताया गया, जबकि वह लड़का था।
दिल्ली पुलिस ने भी अपने बयान में मारपीट के शिकार एक व्यक्ति को पुरुष प्रदर्शनकारी बताया था।
हालांकि, वीडियो में मौजूद अलग-अलग लोगों की पहचान और घटना में घायल अन्य व्यक्तियों को लेकर सभी दावों का स्वतंत्र मिलान जरूरी है।
रविंदर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल उठाए।
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी व्यक्ति की पहचान को लेकर गलत जानकारी साझा होना और मारपीट की घटना में कानूनी जिम्मेदारी दो अलग मुद्दे हैं।

CJP प्रदर्शन के दौरान क्यों हुआ था विवाद?

10 अक्टूबर को CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।
संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा था।
CJP और अन्य प्रदर्शनकारी संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद राजधानी में सुरक्षा बढ़ाई गई और अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शनकारियों को रोका गया।
इसी दौरान कुछ स्थानों पर मारपीट और टकराव की घटनाएं सामने आई थीं।

क्या रविंदर गोविंदा को अदालत ने निर्दोष घोषित कर दिया?

रविंदर गोविंदा की जेल से रिहाई की खबर सामने आई है, लेकिन उन्हें इस मामले में अदालत द्वारा पूरी तरह दोषमुक्त घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
किसी आरोपी को जमानत या अन्य कानूनी आधार पर रिहा किया जाना और मुकदमे में बरी होना अलग-अलग स्थितियां हैं।

इस मामले में रिहाई के विस्तृत न्यायिक आदेश और शर्तों की पुष्टि जरूरी है।

अब आगे क्या होगा?

रविंदर गोविंदा की रिहाई और स्वागत के बाद मारपीट के वायरल वीडियो को लेकर फिर चर्चा शुरू हुई है।
रविंदर ने अपने बचाव में कार घेरने और पहले हमला होने का दावा किया है। दूसरी तरफ वीडियो के आधार पर पुलिस पहले ही चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी।
आगे पुलिस की जांच, उपलब्ध वीडियो रिकॉर्ड और न्यायिक कार्यवाही से घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
CJP प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोप में गिरफ्तार रविंदर गोविंदा जेल से बाहर आ गए हैं। हिंदू रक्षा दल ने उनका स्वागत किया, जबकि रविंदर ने पूरी घटना को आत्मरक्षा से जुड़ा बताया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वायरल वीडियो, पुलिस जांच और न्यायिक रिकॉर्ड में मारपीट की शुरुआत तथा जिम्मेदारी को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

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