'कल तक रिहाई नहीं हुई तो अनशन करूंगा', CJP नेताओं की हिरासत पर सोनम वांगचुक की चेतावनी

सोनम वांगचुक ने CJP नेताओं की हिरासत को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने 11 अक्टूबर तक रिहाई नहीं होने पर अनशन या पदयात्रा पर विचार करने की बात कही।

दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत पर सोनम वांगचुक ने नाराजगी जताई है। उन्होंने देश में 'अघोषित आपातकाल' जैसे हालात होने का आरोप लगाया और जल्द रिहाई नहीं होने पर अनशन या पदयात्रा का संकेत दिया।

दिल्ली में CJP नेताओं की हिरासत पर सोनम वांगचुक नाराज, सरकार से रिहाई की मांग; 11 अक्टूबर तक का दिया समय

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सोनम वांगचुक ने CJP नेताओं की रिहाई नहीं होने पर अनशन या पदयात्रा पर विचार करने की बात कही।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 10 अक्टूबर 2026

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने देश में 'अघोषित आपातकाल' जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए हिरासत में लिए गए लोगों की जल्द रिहाई की मांग की है।
शनिवार, 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर जारी संदेश में वांगचुक ने कहा कि यदि अगले दिन यानी 11 अक्टूबर तक प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार करेंगे।
उनकी यह प्रतिक्रिया CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके सहयोगियों सौरव दास तथा आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद सामने आई है।
वांगचुक ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन से पहले युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और अलग-अलग संगठनों के बीच एकजुटता बनाए रखने की अपील की थी। लेकिन अब बड़ी संख्या में नेताओं की हिरासत से वह चिंतित हैं।

खबर में खास

  • सोनम वांगचुक ने दिल्ली में CJP नेताओं की हिरासत की आलोचना की।
  • देश में 'अघोषित आपातकाल' जैसे हालात होने का आरोप लगाया।

  • 11 अक्टूबर तक हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की।

  • रिहाई नहीं होने पर अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार करने की चेतावनी।

  • अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के बाद आया बयान।

  • वांगचुक ने युवाओं से शांति और अहिंसा बनाए रखने की अपील भी की।

'11 अक्टूबर तक रिहाई नहीं हुई तो अनशन पर विचार करूंगा'

सोनम वांगचुक ने शनिवार को जारी अपने संदेश में दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को जल्द रिहा किया जाना चाहिए।
वांगचुक के मुताबिक, यदि रविवार, 11 अक्टूबर तक हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई नहीं होती, तो उन्हें दोबारा अनशन या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण विरोध के तरीकों पर विचार करना पड़ सकता है।
हालांकि, वांगचुक ने अभी किसी नए अनशन की औपचारिक शुरुआत नहीं की है। उन्होंने इसे संभावित अगले कदम के रूप में रखा है।

'देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात', वांगचुक का आरोप

सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि देश में ऐसी परिस्थिति सामने आएगी, जिसे वह अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति मानते हैं।

वांगचुक का कहना था कि वह इस आंदोलन के लिए अलग-अलग नेताओं के आगे आने से खुश थे, लेकिन अब उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरों से चिंता हुई है।

यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि 'अघोषित आपातकाल' वांगचुक की राजनीतिक टिप्पणी है। भारत में संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत औपचारिक राष्ट्रीय आपातकाल घोषित होने की पुष्टि नहीं है।

अभिजीत दीपके और उनके सहयोगियों को कब हिरासत में लिया गया?

शनिवार सुबह CJP संस्थापक अभिजीत दीपके अपने सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ विमान से दिल्ली पहुंचे थे।
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फ्लाइट उतरने के बाद पुलिसकर्मी विमान के अंदर पहुंचे और तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया।
इस दौरान पुलिस अधिकारियों और अभिजीत दीपके के बीच बहस भी हुई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया।
तीनों नेता दिल्ली में प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे।
पुलिस ने CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पाबंदियां लागू की थीं।

वांगचुक ने युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की थी

सोनम वांगचुक ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भी युवाओं के नाम एक संदेश जारी किया था।
उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने वाले युवाओं से आग्रह किया था कि वे किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता न अपनाएं।
वांगचुक ने महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा था कि युवाओं को शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने अलग-अलग संगठनों के नेताओं से एकजुट रहने और आपसी मतभेदों के बजाय साझा मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की थी।

दिल्ली के प्रदर्शन में क्यों नहीं पहुंचे सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक ने पहले ही बताया था कि वह 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे।
उन्होंने इसकी वजह लद्दाख में चल रहे पर्यावरण और जल सुरक्षा संबंधी कार्यों को बताया था।
वांगचुक के अनुसार, सर्दियों से पहले लद्दाख में कृत्रिम ग्लेशियर तैयार करने और हिमनदी झीलों से अचानक बाढ़ आने के खतरे को समझने से जुड़े काम चल रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों से जुड़े संभावित खतरों को कम करने के लिए यह काम जरूरी है।
हालांकि, दिल्ली में मौजूद नहीं होने के बावजूद उन्होंने CJP के विरोध प्रदर्शन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था।

पहले भी लंबा अनशन कर चुके हैं सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक पहले भी छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अनशन कर चुके हैं।
साल 2026 में NEET-UG पेपर लीक विवाद के दौरान उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी।
जुलाई में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। उनका अनशन लगभग 26 दिनों तक चला था।
उस समय भी उन्होंने छात्रों की मांगों पर बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया था।
अब उन्होंने एक बार फिर अनशन का विकल्प सामने रखा है, हालांकि इस बार उन्होंने इसे हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई से जोड़ा है।

CJP क्यों कर रही है मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था।
संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
CJP और अन्य प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान गड़बड़ियां हुई हैं और इससे योग्य मतदाताओं का मतदान अधिकार प्रभावित हुआ है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता रहा है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए मृत, स्थानांतरित तथा दोहरे नामों की पहचान करना आवश्यक है।
चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच और प्रदर्शनकारियों की हिरासत की कानूनी स्थिति दो अलग मुद्दे हैं।

दिल्ली में पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़े सवाल

शनिवार को दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं।
पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई थी।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। वहीं प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दिया।
इसी परिस्थिति में सोनम वांगचुक ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की है।

क्या 11 अक्टूबर से अनशन शुरू करेंगे सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक ने अभी अनशन शुरू करने का अंतिम फैसला घोषित नहीं किया है।
उन्होंने कहा है कि यदि 11 अक्टूबर तक प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा के विकल्प पर विचार करेंगे।
इसका मतलब यह नहीं है कि अनशन का स्थान, समय या अवधि तय हो चुकी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई को लेकर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और सोनम वांगचुक आगे क्या निर्णय लेते हैं।
दिल्ली में CJP नेताओं की हिरासत के बाद सोनम वांगचुक ने सरकार से 11 अक्टूबर तक उनकी रिहाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर वह दोबारा अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल उनकी ओर से किसी नए अनशन की शुरुआत की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों की रिहाई और रविवार को वांगचुक का अगला कदम महत्वपूर्ण रहेगा।

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