सड़क पर सवाल, फिर ‘थप्पड़’? अब हाईकोर्ट पहुंचा मामला; प्रवेश वर्मा-पुलिस को नोटिस, मांगी पूरी रिपोर्ट
AAP कार्यकर्ता साहिब सिंह का आरोप—सड़क निरीक्षण के दौरान थप्पड़, मारपीट और धमकी; मोबाइल छीनकर नुकसान पहुंचाने का भी दावा, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगी केस की स्थिति
दिल्ली के कथित ‘थप्पड़ मामले’ में अब हाईकोर्ट ने प्रवेश वर्मा और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता साहिब सिंह ने आरोप लगाया है कि 27 सितंबर को सड़क निरीक्षण के दौरान उन्हें थप्पड़ मारा गया, उनके साथ मारपीट हुई और मोबाइल छीनकर नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने स्वतंत्र जांच, अपने और परिवार की सुरक्षा तथा CCTV और अन्य electronic evidence सुरक्षित रखने की मांग की है। अदालत ने पुलिस से status report मांगी है और अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
वायरल वीडियो से हाईकोर्ट तक पहुंचा ‘थप्पड़’ विवाद
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित थप्पड़ मामले में पुलिस से status report मांगी है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | दिल्ली डेस्क | 8 अक्टूबर 2026
खबर में खास
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवेश वर्मा और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया
पुलिस से मामले की Status Report मांगी गई
अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026
याचिका AAP कार्यकर्ता साहिब सिंह ने दाखिल की
आरोप—27 सितंबर को सड़क निरीक्षण के दौरान थप्पड़ और मारपीट
मोबाइल छीनकर नुकसान पहुंचाने का भी दावा
घटना के बाद धमकी भरे calls/messages मिलने का आरोप
अपने और परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग
CCTV और electronic evidence सुरक्षित रखने की मांग
स्वतंत्र पुलिस टीम/एजेंसी से जांच की मांग
वैकल्पिक तौर पर पूर्व हाईकोर्ट जज की निगरानी वाली inquiry committee की मांग
पुलिस पहले प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज कर चुकी है
NCR BNS की धारा 115(2) के तहत दर्ज हुई थी
अलग मामले में AAP विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ FIR दर्ज है
प्रवेश वर्मा की तरफ से आरोप था कि AAP कार्यकर्ताओं ने सरकारी काम में बाधा डाली
हाईकोर्ट ने अभी किसी को दोषी नहीं ठहराया है Moneycontrol
वायरल थप्पड़ मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट में
नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली में सड़क निरीक्षण के दौरान सामने आए कथित थप्पड़ मामले ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के डिप्टी CM और PWD मंत्री प्रवेश वर्मा तथा दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए पुलिस से मामले की मौजूदा स्थिति पर status report मांगी है। Moneycontrol
मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत में हुई। पुलिस ने याचिका की maintainability पर आपत्ति जताई, लेकिन कोर्ट ने उससे मामले की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। Moneycontrol
साहिब सिंह ने हाईकोर्ट में क्या कहा?
याचिका साहिब सिंह ने दाखिल की है। उनका आरोप है कि 27 सितंबर को वह तिलक नगर विधायक जरनैल सिंह के साथ पश्चिमी दिल्ली में Outer Ring Road पर सड़क निर्माण कार्य के निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।
साहिब के मुताबिक वह मोबाइल फोन से वहां हो रही बातचीत और निरीक्षण को रिकॉर्ड कर रहे थे। उसी दौरान सड़क की गुणवत्ता और कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। Moneycontrol
उनका आरोप है कि इसी दौरान प्रवेश वर्मा ने उन्हें थप्पड़ मारा और बाद में वहां मौजूद कुछ अन्य लोगों ने उन्हें घेरकर मारपीट की तथा धमकाया। ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं और इन पर अदालत ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। Moneycontrol
वायरल वीडियो में क्या दिखाई दिया था?
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में सड़क निरीक्षण के दौरान मंत्री और वहां मौजूद लोगों के बीच तीखी बातचीत दिखाई देती है।
एक हिस्से में साहिब सिंह का मोबाइल नीचे किए जाने के बाद उन्हें थप्पड़ लगने जैसा दृश्य नजर आता है। इसी वीडियो के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया था।
सड़क की गुणवत्ता को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?
घटना उस समय हुई जब इलाके में नई बनी सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे थे।
AAP विधायक जरनैल सिंह ने सड़क की ऊपरी परत हाथ से निकालकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। इसी दौरान प्रवेश वर्मा वहां निरीक्षण के लिए पहुंचे। The Indian Express
साहिब सिंह उस पूरे घटनाक्रम को मोबाइल से रिकॉर्ड कर रहे थे। उनका आरोप है कि इसी समय विवाद बढ़ा और उनके साथ मारपीट हुई।
मोबाइल छीनने और तोड़ने का भी आरोप
साहिब सिंह की याचिका सिर्फ थप्पड़ के आरोप तक सीमित नहीं है।
उन्होंने दावा किया है कि उनका मोबाइल फोन जबरन छीन लिया गया और उसे नुकसान पहुंचाया गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि वहां मौजूद एक अज्ञात व्यक्ति ने उनके शरीर के निजी हिस्से पर प्रहार किया। Moneycontrol
साहिब का कहना है कि मोबाइल में घटना से जुड़ी रिकॉर्डिंग मौजूद थी, इसलिए electronic evidence को सुरक्षित रखना जरूरी है।
CCTV बचाने के लिए कोर्ट क्यों पहुंचे?
याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि समय बीतने पर CCTV या दूसरे electronic records overwrite या नष्ट हो सकते हैं।
इसीलिए याचिका में अदालत से संबंधित जगहों की CCTV footage, PCR records, DD entries, videos और दूसरे electronic material को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है। खास तौर पर 25 से 30 सितंबर के बीच की footage सुरक्षित रखने की मांग की गई है। Moneycontrol
यह इस केस का महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है, क्योंकि वायरल clips के अलावा पूरी घटना की chronology समझने में original electronic evidence अहम हो सकता है।
साहिब ने अपने परिवार के लिए भी मांगी सुरक्षा
याचिका में साहिब सिंह ने अपने साथ-साथ परिवार के लिए भी पुलिस protection मांगी है।
उनका दावा है कि घटना के बाद उनका निजी मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से circulate हुआ और उसके बाद उन्हें WhatsApp तथा social-media accounts के जरिए abusive और threatening messages आने लगे। Moneycontrol
कुछ धमकियां परिवार के सदस्यों को लेकर भी होने का आरोप लगाया गया है।
उन्होंने इन calls और messages के source की cyber-forensic जांच कराने की मांग भी की है।
स्वतंत्र जांच की मांग क्यों?
साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि घटना के समय वहां मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप नहीं किया।
इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच ऐसे स्वतंत्र police team या agency को दी जाए, जिसका उन कर्मियों से संबंध न हो जिनकी भूमिका पर याचिका में सवाल उठाए गए हैं। Moneycontrol
वैकल्पिक मांग के तौर पर उन्होंने पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली independent inquiry committee बनाने की भी मांग की है।
क्या हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच का आदेश दे दिया?
नहीं।
अभी अदालत ने independent investigation का आदेश नहीं दिया है।
कोर्ट ने फिलहाल नोटिस जारी किया है और दिल्ली पुलिस से status report मांगी है। पुलिस का पक्ष और रिकॉर्ड आने के बाद आगे विचार होगा। Moneycontrol
इसलिए headline में “HC ने स्वतंत्र जांच का आदेश दिया” लिखना गलत होगा।
पुलिस ने पहले क्या कार्रवाई की थी?
साहिब सिंह की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ Non-Cognisable Report यानी NCR दर्ज की थी।
यह NCR भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) के तहत voluntarily causing hurt से जुड़े आरोप पर दर्ज हुई थी। India Today
लेकिन NCR और FIR में बड़ा कानूनी फर्क होता है।
NCR और FIR में क्या अंतर है?
NCR आम तौर पर non-cognisable offence में दर्ज होती है।
ऐसे मामले में पुलिस सीधे अपनी तरफ से पूर्ण आपराधिक जांच शुरू नहीं कर सकती; जांच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति की जरूरत पड़ सकती है। पुलिस बिना warrant गिरफ्तारी भी नहीं कर सकती। India Today
FIR cognisable offence से जुड़ी प्रक्रिया होती है, जिसमें पुलिस को कानून के मुताबिक सीधे जांच शुरू करने के अधिक अधिकार होते हैं।
यही वजह है कि साहिब सिंह ने सिर्फ NCR से संतुष्ट न होकर FIR और स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर आगे कानूनी कदम उठाया।
पुलिस कमिश्नर तक भी पहुंचे थे साहिब
याचिका के अनुसार साहिब सिंह ने पहले विकासपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दी थी, जहां 27 सितंबर को उनकी शिकायत DD entry के रूप में दर्ज हुई।
बाद में उन्होंने 29 सितंबर को दिल्ली पुलिस कमिश्नर से भी संपर्क किया और FIR, कानूनी कार्रवाई तथा अपनी सुरक्षा की मांग की। Moneycontrol
इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
दूसरी तरफ जरनैल सिंह पर भी FIR
इसी सड़क निरीक्षण से जुड़ा दूसरा मामला भी दर्ज है।
PWD के एक Assistant Engineer की शिकायत पर AAP विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ सरकारी काम में बाधा, intimidation और संबंधित आरोपों को लेकर FIR दर्ज की गई थी। India Today
इसलिए पूरे घटनाक्रम में सिर्फ एक तरफ शिकायत नहीं हुई—दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप और पुलिस शिकायतें सामने आईं।
प्रवेश वर्मा का पक्ष क्या रहा?
प्रवेश वर्मा की ओर से पहले कहा गया था कि सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने और मौके पर confrontation पैदा करने की कोशिश की जा रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि AAP से जुड़े कार्यकर्ता inspection के दौरान सरकारी अधिकारियों को काम करने से रोक रहे थे। India Today
इसलिए घटना को लेकर दोनों पक्षों की कहानी अलग-अलग है और अब अदालत पुलिस रिकॉर्ड देखकर आगे की दिशा तय करेगी।
सड़क विवाद इतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा कैसे बना?
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सिर्फ कथित assault तक सीमित नहीं रहा।
एक तरफ सड़क की निर्माण गुणवत्ता और कथित corruption का सवाल उठा, दूसरी तरफ एक मंत्री द्वारा कथित तौर पर युवक को थप्पड़ मारने का वीडियो चर्चा में आया।
इसके बाद विपक्ष ने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने AAP नेताओं पर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया।
क्या वीडियो अपने आप दोष साबित करता है?
नहीं।
किसी वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला दृश्य जांच का महत्वपूर्ण evidence हो सकता है, लेकिन आपराधिक जिम्मेदारी तय करना पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया का काम है।
इसीलिए हाईकोर्ट ने अभी प्रवेश वर्मा को दोषी नहीं कहा है। उसने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है ताकि रिकॉर्ड और अब तक की कार्रवाई देखी जा सके। Moneycontrol
17 नवंबर को क्या हो सकता है?
अगली सुनवाई से पहले दिल्ली पुलिस को status report दाखिल करनी है।
इस रिपोर्ट में अदालत के सामने अब तक हुई कार्रवाई, शिकायतों, NCR और उपलब्ध evidence की स्थिति रखी जा सकती है।
इसके बाद कोर्ट यह देख सकता है कि:
मौजूदा पुलिस कार्रवाई पर्याप्त है या नहीं, electronic evidence को सुरक्षित करने के लिए अलग आदेश की जरूरत है या नहीं, याचिकाकर्ता की protection मांग पर क्या किया जाना चाहिए, और स्वतंत्र जांच की मांग पर आगे सुनवाई की जरूरत है या नहीं।
27 सितंबर को सड़क निरीक्षण के दौरान वायरल हुए थप्पड़ वीडियो से शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच चुका है। साहिब सिंह का आरोप सिर्फ थप्पड़ तक सीमित नहीं है—उन्होंने मारपीट, मोबाइल छीनने, धमकियों और पुलिस की कथित निष्क्रियता के सवाल भी उठाए हैं। दूसरी तरफ मंत्री का पक्ष है कि सरकारी काम में बाधा डाली जा रही थी। हाईकोर्ट ने फिलहाल किसी को दोषी नहीं माना है; उसने पुलिस से status report मांगी है। इसलिए इस मामले का अगला अहम पड़ाव 17 नवंबर की सुनवाई और उससे पहले आने वाली पुलिस रिपोर्ट होगी।