डॉ. नीरज बोरा कौन हैं? डॉक्टर से लगातार दो बार BJP विधायक बनने तक का पूरा सफर
2012 में महज 2,219 वोट से हारने के बाद डॉ. नीरज बोरा ने 2017 और 2022 में लखनऊ उत्तर सीट से लगातार दो बड़ी चुनावी जीत दर्ज कीं।
जानिए लखनऊ उत्तर से भाजपा विधायक डॉ. नीरज बोरा की उम्र, शिक्षा, परिवार, चिकित्सा एवं समाजसेवा का सफर, राजनीतिक करियर, चुनाव परिणाम और 2022 के शपथपत्र में घोषित संपत्ति की पूरी जानकारी।
डॉ. नीरज बोरा कौन हैं? डॉक्टर से दो बार BJP विधायक बनने तक का सफर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की राजनीति में डॉ. नीरज बोरा ऐसा नाम हैं, जिनकी पहचान केवल एक विधायक तक सीमित नहीं है। वह पेशे से चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षाविद्, समाजसेवी और भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। वर्तमान में वह 172–लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
डॉ. नीरज बोरा ने 2012 में इसी क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 2,219 मतों से हार गए थे। पांच साल बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर न केवल चुनाव जीता, बल्कि 2022 में दोबारा जीत दर्ज करके लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।
उनकी राजनीतिक यात्रा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि वह बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस में रहने के बाद भाजपा से जुड़े। उनके पिता स्वर्गीय डी.पी. बोरा भी दो बार विधायक रहे थे। इस तरह राजनीति और समाजसेवा से उनका पारिवारिक संबंध काफी पुराना है।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
डॉ. नीरज बोरा का जन्म 31 मार्च 1967 को हुआ था। उनके जन्मस्थान को लेकर ऑनलाइन स्रोतों में एकरूपता नहीं है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट केवल जन्मतिथि की पुष्टि करती है, जबकि कुछ द्वितीयक स्रोत उनका जन्मस्थान उत्तर प्रदेश का शोहरतगढ़ बताते हैं। इसलिए किसी आधिकारिक दस्तावेज के बिना जन्मस्थान को निश्चित रूप से लिखना उचित नहीं होगा।
उनके पिता स्वर्गीय डी.पी. बोरा लखनऊ की राजनीति और छात्र आंदोलनों से जुड़े प्रमुख नाम थे। डॉ. बोरा की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, डी.पी. बोरा 1967 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष बने थे। वह 1969 और 1977 में तत्कालीन लखनऊ पश्चिम क्षेत्र से विधायक भी निर्वाचित हुए।
डॉ. नीरज बोरा की पत्नी का नाम बिंदू बोरा है। 2022 के चुनावी शपथपत्र में उनकी पत्नी का पेशा नर्सिंग कॉलेज की निदेशक और राधा मेडिकल्स से जुड़ा बताया गया है। परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
डॉ. नीरज बोरा की शिक्षा
डॉ. नीरज बोरा ने बेंगलुरु के डॉ. बी.आर. आंबेडकर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने मानव संसाधन यानी HR विषय में एमबीए किया।
उनके 2022 के चुनावी शपथपत्र में एमबीए की डिग्री वर्ष 2009 में राजस्थान स्थित Institute of Advanced Studies in Education University से प्राप्त करना दर्ज है।
ऑनलाइन कुछ परिचयों में उनके नाम के साथ PhD भी लिखी गई है, लेकिन उनकी आधिकारिक वेबसाइट और 2022 के चुनावी शपथपत्र में शैक्षणिक योग्यता के रूप में MBBS और MBA ही स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इसलिए सत्यापित प्रोफाइल में इन्हीं दो योग्यताओं का उल्लेख करना सुरक्षित है।
चिकित्सक और शिक्षाविद् के रूप में पहचान
राजनीति में आने से पहले डॉ. नीरज बोरा ने चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वह सेवा अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र तथा बोरा इंस्टीट्यूट ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज से जुड़े हैं।
उनकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। वह लायंस क्लब इंटरनेशनल में मंडलाध्यक्ष और काउंसिल चेयरपर्सन जैसी जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं।
आधिकारिक जीवनी में दावा किया गया है कि उनके मार्गदर्शन में 25 हजार से अधिक निःशुल्क नेत्र ऑपरेशन कराए गए और रक्तदान अभियानों के जरिए पांच हजार यूनिट से अधिक रक्त एकत्र कराया गया। इन आंकड़ों को डॉ. बोरा की अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित दावों के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।
समाजसेवा के प्रमुख क्षेत्र
डॉ. नीरज बोरा चिकित्सा और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कई प्रकार के कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर
- जरूरतमंद मरीजों के नेत्र ऑपरेशन में सहायता
- रक्तदान शिविर और रक्तदान जागरूकता
- दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण
- महिलाओं के लिए सिलाई एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण
- बाढ़ और अग्निकांड पीड़ित परिवारों की सहायता
- गरीब एवं कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं
- सामाजिक समरसता और नागरिक जागरूकता कार्यक्रम
ये विवरण मुख्यतः उनकी आधिकारिक जीवनी और उनसे जुड़े संस्थानों की सार्वजनिक जानकारी पर आधारित हैं।
राजनीति में कैसे आए नीरज बोरा?
डॉ. नीरज बोरा का राजनीतिक सफर एक ही पार्टी तक सीमित नहीं रहा। शुरुआती दौर में वह बहुजन समाज पार्टी से जुड़े और 2007 का विधानसभा चुनाव बसपा उम्मीदवार के रूप में लखनऊ पश्चिम सीट से लड़ा।
इसके बाद वह उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम में उपाध्यक्ष एवं निदेशक रहे। इस पद को राज्य सरकार में राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त बताया गया था।
बाद में वह कांग्रेस से जुड़े। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ नगर निगम के महापौर का चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। वह लखनऊ शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे।
कांग्रेस छोड़ने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। भाजपा ने उन्हें 2017 में लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया।
2012 में केवल 2,219 वोट से हारे
वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव डॉ. नीरज बोरा के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ उत्तर सीट से चुनाव लड़ा।
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा को 47,580 वोट मिले, जबकि डॉ. नीरज बोरा ने 45,361 वोट हासिल किए। वह केवल 2,219 मतों से हार गए।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट |
| अभिषेक मिश्रा | समाजवादी पार्टी | 47,580 |
| डॉ. नीरज बोरा | कांग्रेस | 45,361 |
| आशुतोष टंडन | भाजपा | 45,245 |
इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार आशुतोष टंडन भी नीरज बोरा से केवल 116 वोट पीछे रहे थे। यानी लखनऊ उत्तर पर मुकाबला बेहद करीबी और त्रिकोणीय था।
2017 में पहली बार बने विधायक
भाजपा में शामिल होने के बाद डॉ. नीरज बोरा को 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ उत्तर से टिकट मिला। इस बार उन्होंने 1,09,315 वोट हासिल किए।
समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा को 82,039 वोट मिले। डॉ. बोरा ने उन्हें 27,276 मतों के अंतर से पराजित किया और पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट |
| डॉ. नीरज बोरा | भाजपा | 1,09,315 |
| अभिषेक मिश्रा | समाजवादी पार्टी | 82,039 |
| अजय कुमार श्रीवास्तव | बसपा | 29,955 |
2022 में दूसरी बार जीत
वर्ष 2022 में भाजपा ने डॉ. नीरज बोरा पर दोबारा भरोसा जताया। इस चुनाव में उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी की पूजा शुक्ला से हुआ।
डॉ. बोरा ने 1,39,159 वोट प्राप्त किए, जबकि पूजा शुक्ला को 1,05,206 वोट मिले। जीत का अंतर 33,953 मत रहा।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | मत प्रतिशत |
| डॉ. नीरज बोरा | भाजपा | 1,39,159 | 53.30% |
| पूजा शुक्ला | समाजवादी पार्टी | 1,05,206 | 40.29% |
इस जीत के साथ वह लगातार दूसरी बार लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक बने।
विधानसभा और संगठन में जिम्मेदारियां
डॉ. नीरज बोरा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वह विधानसभा, भाजपा विधानमंडल दल और विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं में कई जिम्मेदारियों से जुड़े रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
- भाजपा विधानमंडल दल के सचेतक
- भाजपा विधानमंडल दल के सचिव एवं कोषाध्यक्ष
- सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति के सदस्य
- एसजीपीजीआई लखनऊ में शासन द्वारा नामित सदस्य
- दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य
- स्थानीय निकायों के लेखा परीक्षण से संबंधित समिति के पूर्व सदस्य
- MSME मंत्रालय के अधीन आगरा स्थित Process and Product Development Centre की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य
- उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के पूर्व उपाध्यक्ष एवं निदेशक
चूंकि संगठनात्मक और समिति संबंधी जिम्मेदारियां समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए इन पदों को उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित विवरण के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए।
वैश्य समाज और सामाजिक संगठनों में भूमिका
डॉ. नीरज बोरा वैश्य समाज से जुड़े संगठनों में भी सक्रिय रहे हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार वह इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन के संस्थापक पदाधिकारियों में शामिल थे और संगठन में राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों में सामाजिक सम्मेलन और संपर्क कार्यक्रमों से जुड़े अभियान चलाए। वह ‘वैश्य स्वाभिमान’ नामक समाचारपत्र का संपादन भी कर चुके हैं।
कितनी संपत्ति के मालिक हैं डॉ. नीरज बोरा?
Association for Democratic Reforms के MyNeta पोर्टल पर उपलब्ध 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार डॉ. नीरज बोरा ने कुल ₹9,87,65,324 की संपत्ति घोषित की थी।
उनकी कुल देनदारी ₹1,19,09,517 दर्ज थी। इस आधार पर घोषित संपत्ति और देनदारी का अंतर लगभग ₹8.68 करोड़ बनता है।
| विवरण | 2022 में घोषित आंकड़ा |
| कुल संपत्ति | ₹9,87,65,324 |
| कुल देनदारी | ₹1,19,09,517 |
| संपत्ति-देनदारी का अंतर | लगभग ₹8.68 करोड़ |
| स्वयं का पेशा | डॉक्टर एवं प्रोफेसर |
| पत्नी का पेशा | नर्सिंग कॉलेज निदेशक एवं मेडिकल व्यवसाय |
| घोषित आपराधिक मामले | शून्य |
ये सभी आंकड़े उम्मीदवार द्वारा 2022 के चुनाव के समय दाखिल स्वघोषित शपथपत्र पर आधारित हैं। इन्हें अगस्त 2026 की वर्तमान संपत्ति या बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।
क्या डॉ. नीरज बोरा पर कोई आपराधिक मामला है?
2022 के नवीनतम उपलब्ध विधानसभा चुनावी शपथपत्र में डॉ. नीरज बोरा ने कोई लंबित आपराधिक मामला घोषित नहीं किया था।
हालांकि 2012 के पुराने शपथपत्र में दो और 2007 के शपथपत्र में एक मामला दर्ज होने का उल्लेख मिलता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वे मामले 2026 में भी लंबित हैं। नवीनतम उपलब्ध 2022 शपथपत्र में घोषित मामलों की संख्या शून्य है।
इसलिए सबसे सटीक वाक्य होगा:
“डॉ. नीरज बोरा ने 2022 के विधानसभा चुनावी शपथपत्र में कोई लंबित आपराधिक मामला घोषित नहीं किया था।”
डॉ. नीरज बोरा की राजनीतिक पहचान
डॉ. नीरज बोरा की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से तीन आधारों पर बनी है—चिकित्सा और समाजसेवा की पृष्ठभूमि, परिवार की पुरानी राजनीतिक विरासत और लखनऊ उत्तर में लगातार दो चुनावी जीत।
2012 में केवल 2,219 वोटों से हारने के बाद उन्होंने 2017 में 27,276 और 2022 में 33,953 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। यह चुनावी यात्रा लखनऊ उत्तर क्षेत्र में उनके बढ़ते राजनीतिक आधार को दिखाती है।
फिर भी उनके सामाजिक कार्यों, संस्थागत पदों और विकास संबंधी उपलब्धियों के कई विवरण उनकी अपनी आधिकारिक वेबसाइट से आते हैं। निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए ऐसे दावों को संबंधित सरकारी रिकॉर्ड या स्वतंत्र रिपोर्टिंग से अलग पहचान के साथ प्रकाशित करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
डॉ. नीरज बोरा डॉक्टर, शिक्षाविद्, समाजसेवी और राजनेता की कई भूमिकाओं में सक्रिय रहे हैं। पिता से मिली राजनीतिक विरासत के बावजूद उनका चुनावी सफर सीधी जीत से शुरू नहीं हुआ। बसपा और कांग्रेस के दौर से गुजरते हुए उन्होंने 2012 की मामूली हार देखी और इसके बाद भाजपा के टिकट पर लगातार दो चुनाव जीते।
फिलहाल वह लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। 2022 में मिला 53.30 प्रतिशत मत और 33,953 वोटों की जीत उनके राजनीतिक आधार का सबसे प्रमुख चुनावी संकेत है।
