DK शिवकुमार-अडानी मुलाकात पर सियासी घमासान, पवन खेड़ा बोले- ‘उद्योगपति से नहीं, एकाधिकार से विरोध’
गौतम अडानी की कर्नाटक CM से करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद BJP ने कांग्रेस पर लगाया ‘डबल स्टैंडर्ड’ का आरोप; पवन खेड़ा बोले- किसी एक उद्योगपति का एकाधिकार देश के लिए अच्छा नहीं
गौतम अडानी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुलाकात पर सियासी बहस तेज है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी किसी उद्योगपति के खिलाफ नहीं, बल्कि किसी एक उद्योगपति के एकाधिकार के खिलाफ है।
नई दिल्ली/बेंगलुरु। उद्योगपति गौतम अडानी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुलाकात पर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब दिल्ली तक पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस पर ‘डबल स्टैंडर्ड’ अपनाने का आरोप लगाया, तो कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस किसी उद्योगपति के खिलाफ नहीं है, उसका विरोध किसी एक कारोबारी के एकाधिकार से है।
पवन खेड़ा ने सोमवार को डीके शिवकुमार और गौतम अडानी की मुलाकात से जुड़े सवाल पर कहा कि कांग्रेस ने अपना रुख पहले ही स्पष्ट किया हुआ है।
उन्होंने कहा, “हम किसी उद्योगपति के खिलाफ नहीं हैं।” खेड़ा के मुताबिक आपत्ति उस स्थिति से है जब किसी एक उद्योगपति का एकाधिकार स्थापित हो जाए, क्योंकि कांग्रेस इसे देश के हित में नहीं मानती।
इस बयान के जरिए कांग्रेस ने अडानी समूह को लेकर अपने राजनीतिक रुख और कांग्रेस शासित राज्य के मुख्यमंत्री की उद्योगपति से मुलाकात के बीच उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की है।
रविवार को हुई थी अडानी-DK शिवकुमार की मुलाकात
गौतम अडानी ने रविवार, 23 अगस्त को बेंगलुरु में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से उनके सदाशिवनगर स्थित आवास पर मुलाकात की थी। दोनों के बीच करीब एक घंटे बातचीत हुई। मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों और CMO ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया।
रिपोर्टों के मुताबिक अडानी Art of Living से लौटते समय एयरपोर्ट जाने से पहले मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।
डीके शिवकुमार ने बाद में कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बार था जब गौतम अडानी उनसे मिलने आए। उन्होंने यह भी कहा कि अडानी समूह के कर्नाटक में कई कारोबारी हित हैं और मुलाकात शिष्टाचार के तौर पर हुई।
BJP ने कांग्रेस पर क्यों उठाए सवाल?
गौतम अडानी से शिवकुमार की मुलाकात के तुरंत बाद कर्नाटक BJP ने कांग्रेस पर हमला बोला।
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने सवाल उठाया कि एक तरफ कांग्रेस के शीर्ष नेता राष्ट्रीय स्तर पर अडानी समूह को लेकर लगातार सवाल उठाते हैं, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस शासित कर्नाटक के मुख्यमंत्री गौतम अडानी से मुलाकात कर रहे हैं।
आर अशोक ने इसे कांग्रेस का “डबल स्टैंडर्ड” बताते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा।
यही आरोप अब पवन खेड़ा के बयान को राजनीतिक रूप से ज्यादा महत्वपूर्ण बनाता है।
पवन खेड़ा ने बताया- कांग्रेस का विरोध आखिर किससे?
पवन खेड़ा का कहना है कि कांग्रेस का रुख किसी व्यक्ति विशेष या उद्योगपति के कारोबार करने के खिलाफ नहीं है।
उनके बयान का मूल तर्क यह है कि भारत में उद्योग और निजी निवेश जरूरी है, लेकिन यदि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किसी एक कारोबारी समूह का अत्यधिक प्रभुत्व बन जाता है तो इससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस इससे पहले भी अपने अडानी संबंधी हमलों में यही तर्क देती रही है कि उसका विरोध corporates या private enterprise से नहीं बल्कि monopoly और कथित crony capitalism से है। पवन खेड़ा ने 2023 में भी कहा था कि कांग्रेस corporates के खिलाफ नहीं बल्कि किसी एक corporate monopoly के खिलाफ है।
यानी सोमवार का बयान कांग्रेस के पुराने सार्वजनिक रुख से पूरी तरह अलग नहीं है।
₹17,698 करोड़ के Tunnel Road Project के बीच हुई मुलाकात
अडानी और शिवकुमार की मुलाकात को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि यह बेंगलुरु के प्रस्तावित Hebbal-Silk Board Tunnel Road Project के बीच हुई है।
राज्य सरकार ने इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹17,698 करोड़ रखी है। Adani Enterprises परियोजना के दोनों packages में lowest bidder बनकर सामने आई थी। हालांकि कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से करीब ₹4,600 करोड़ अधिक बताई गई है, जिसके कारण परियोजना को कैबिनेट स्तर पर जांच और मंजूरी की आवश्यकता है।
प्रस्तावित underground corridor लगभग 17 किलोमीटर लंबा है और इसका उद्देश्य उत्तर बेंगलुरु के Hebbal को दक्षिण में Silk Board से जोड़कर शहर के व्यस्त मार्ग पर ट्रैफिक दबाव कम करना है।
क्या अडानी और शिवकुमार के बीच Tunnel Road पर बात हुई?
यहीं सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है।
यह तथ्य है कि Adani Enterprises tunnel road के लिए lowest bidder है और उसी पृष्ठभूमि में अडानी-शिवकुमार मुलाकात हुई। लेकिन अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्थापित नहीं हुआ है कि दोनों के बीच हुई बातचीत का विषय यही परियोजना थी।
PTI की रिपोर्ट में भी कहा गया कि यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि बैठक में tunnel project पर चर्चा हुई या मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित रही। Tender भी अभी आधिकारिक रूप से final नहीं हुआ है।
इसलिए headline में “अडानी ने टनल प्रोजेक्ट के लिए CM से मुलाकात की” नहीं लिखना चाहिए। वह अभी प्रमाणित तथ्य नहीं है।
राहुल गांधी के पुराने हमलों के कारण बढ़ी सियासी अहमियत
इस मुलाकात पर BJP के हमले की एक बड़ी वजह कांग्रेस नेता राहुल गांधी का अडानी समूह को लेकर लंबे समय से आक्रामक रुख रहा है।
राहुल गांधी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अडानी समूह को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। केंद्र सरकार और अडानी समूह ऐसे आरोपों को पहले खारिज कर चुके हैं।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण जब कांग्रेस शासित कर्नाटक के मुख्यमंत्री और गौतम अडानी की मुलाकात हुई तो विपक्ष को कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाने का मौका मिल गया।
कांग्रेस का जवाब- कारोबार नहीं, एकाधिकार मुद्दा
अब पवन खेड़ा के जवाब के बाद राजनीतिक बहस दो अलग-अलग narratives में बंट गई है।
BJP इसे कांग्रेस के कथित दोहरे रवैये से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि किसी सरकार का उद्योगपतियों से मिलना या निवेश को बढ़ावा देना उसकी monopoly और alleged preferential treatment के खिलाफ राजनीतिक आपत्तियों से अलग विषय है।
ऐसे में आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहेगा कि Bengaluru Tunnel Road project पर कर्नाटक सरकार क्या फैसला लेती है और Adani Enterprises की बोली को Cabinet से मंजूरी मिलती है या नहीं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि गौतम अडानी और डीके शिवकुमार की एक मुलाकात ने कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति और कर्नाटक की विकास राजनीति को एक ही बहस के केंद्र में ला दिया है।
नोट: पवन खेड़ा का ताजा बयान यूजर द्वारा साझा किए गए Navbharat Times/X पोस्ट में उपलब्ध वीडियो/टेक्स्ट पर आधारित है। अडानी-शिवकुमार बैठक से संबंधित अन्य तथ्य PTI, Economic Times और अन्य प्रकाशित रिपोर्टों से सत्यापित किए गए हैं। Tunnel Road पर बैठक में वास्तव में चर्चा हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
