10 अक्टूबर से पहले बढ़ा तनाव: CJP विरोध में ‘लाठी लेकर पहुंचो’ की अपील, जंतर-मंतर पर पुलिस की चुनौती

सोशल मीडिया influencer के वीडियो में दिल्ली-UP-हरियाणा के पहलवानों और जिम जाने वाले युवाओं से CJP के खिलाफ जुटने की अपील; उधर संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर उसके विरोध में जुटने की अपीलों ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक influencer के वायरल वीडियो में पहलवानों और जिम जाने वाले युवाओं से लाठी लेकर पहुंचने और CJP समर्थकों को खदेड़ने की बात कही गई है। दूसरी ओर CJP ने अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और बैरिकेडिंग पहले ही बढ़ा दी है।

10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर टकराव वाली अपीलें

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10 अक्टूबर के CJP प्रदर्शन से पहले विरोध में जुटने की ऑनलाइन अपीलें सामने आई हैं।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 7 अक्टूबर 2026

खबर में खास

  • CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है
  • मुख्य मांग—CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
  • प्रदर्शन SIR से जुड़े विवाद को लेकर बुलाया गया है
  • CJP ने कहा है कि उसका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा
  • दूसरी ओर सोशल मीडिया पर CJP विरोधी वीडियो वायरल
  • एक influencer ने पहलवानों और जिम जाने वाले युवाओं को जुटने को कहा
  • वीडियो में लाठी लेकर आने और CJP को खदेड़ने जैसी बातें
  • influencer को सोशल मीडिया पर करीब साढ़े चार लाख followers बताए गए हैं
  • ऑनलाइन comments में भी कुछ लोगों ने counter-mobilisation की बात कही
  • दिल्ली पुलिस ने आज से ही जंतर-मंतर और आसपास सुरक्षा बढ़ाई
  • Parliament Street, Sansad Marg और आसपास बैरिकेडिंग
  • पुलिसकर्मियों को 150 से ज्यादा body cameras दिए गए
  • CJP आज प्रदर्शन की सूचना/अनुमति संबंधी पत्र देने पुलिस के पास पहुंची
  • 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति की अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं
  • CJP ने अपने volunteers को दूसरे राज्यों में पुलिस notices मिलने का भी दावा किया है
  • CJP ने संभावित हिंसा को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है 

10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले नया विवाद

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले दिल्ली में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें CJP के खिलाफ लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की जा रही है। एक वायरल वीडियो में पहलवानों और जिम जाने वाले युवाओं को लाठी लेकर पहुंचने तथा प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ने जैसी बातें कही गई हैं। Live Hindustan
इन अपीलों के सामने आने के बाद सवाल यह है कि एक ही जगह पर विरोधी समूह जुटने की कोशिश करते हैं तो दिल्ली पुलिस कानून-व्यवस्था कैसे संभालेगी।

वीडियो में कौन कर रहा है अपील?

वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान कुमुद राव उर्फ रिंकू यादव के रूप में बताई गई है।
वह हरियाणा से जुड़ा सोशल मीडिया influencer है और fitness तथा wrestling से संबंधित content बनाता है। उसके Facebook, Instagram और YouTube accounts पर मिलाकर करीब साढ़े चार लाख followers बताए गए हैं। Live Hindustan
पिछले कुछ दिनों में उसके कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें वह CJP की 10 अक्टूबर की सभा का विरोध करने की बात कर रहा है।

क्या कहा गया है वायरल वीडियो में?

वीडियो में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पहलवानों और gym जाने वाले युवाओं से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई है।
उसमें सिर्फ राजनीतिक विरोध या नारेबाजी की बात नहीं है, बल्कि लाठी लेकर आने और CJP समर्थकों को जबरन खदेड़ने जैसी बातें भी कही गई हैं। Live Hindustan
हम यहां उन हिंसक अपीलों को शब्दशः दोहरा नहीं रहे हैं।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इन वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने कोई अलग मामला दर्ज किया है या नहीं।

वीडियो क्यों बने सुरक्षा का बड़ा सवाल?

किसी राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी दूसरे समूह के खिलाफ हिंसा या हथियारनुमा वस्तुएं लेकर जुटने की अपील अलग कानून-व्यवस्था की चिंता पैदा करती है।
खासतौर पर तब, जब उसी दिन एक बड़ी भीड़ पहले से प्रदर्शन के लिए आने वाली हो।
वीडियो के comments में भी कई users ने जंतर-मंतर पहुंचकर CJP का विरोध करने की बातें लिखी हैं। 
इसलिए पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ CJP के प्रदर्शन को संभालने की नहीं, बल्कि संभावित counter-mobilisation को रोकने की भी हो सकती है।

CJP ने 10 अक्टूबर को क्यों बुलाया प्रदर्शन?

Cockroach Janta Party यानी CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली आने का आह्वान किया है।
CJP का आरोप है कि SIR से जुड़ी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और कहता रहा है कि आयोग के प्रमुख फैसले सामूहिक प्रक्रिया से लिए गए हैं।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को घोषणा की थी कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते तो संगठन दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगा। 

CJP ने खुद आंदोलन को क्या बताया?

यहां दूसरा पक्ष भी साफ रखना जरूरी है।
CJP नेतृत्व ने अपने 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को शांतिपूर्ण आंदोलन बताया है।
अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन की घोषणा के समय कहा था कि संगठन शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करेगा और अहिंसक रास्ता अपनाएगा। NDTV
संगठन के दूसरे नेताओं ने भी कहा है कि अगर उन्हें जंतर-मंतर तक नहीं जाने दिया जाता है तो जहां रोका जाएगा, वहीं शांतिपूर्ण तरीके से बैठकर विरोध करेंगे।
इसलिए सोशल मीडिया पर CJP के खिलाफ चल रही हिंसक अपीलों और CJP की घोषित protest line को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आज दिल्ली पुलिस के पास क्यों पहुंची CJP?

7 अक्टूबर को CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने घोषणा की कि संगठन 10 अक्टूबर के मार्च के संबंध में पुलिस के पास intimation letter देने जाएगा।
इसके बाद Parliament Street पुलिस स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई।
पुलिस ने जंतर-मंतर, निर्वाचन सदन और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त बैरिकेडिंग और checking शुरू कर दी। 
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में 10 अक्टूबर की सभा को अंतिम पुलिस अनुमति मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

150 से ज्यादा Body Cameras क्यों?

हाल के प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने इस बार अपनी तैयारी में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
नई दिल्ली इलाके में तैनात पुलिसकर्मियों को 150 से ज्यादा body cameras दिए गए हैं ताकि प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, detention और किसी संभावित टकराव का वीडियो रिकॉर्ड मौजूद रहे। 
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों को लेकर आरोप और वीडियो तेजी से फैलने के कारण घटनाओं का अपना रिकॉर्ड रखना जरूरी हो गया है।

पिछले कुछ दिनों से जंतर-मंतर क्यों संवेदनशील है?

2 अक्टूबर के बाद से SIR और CEC के खिलाफ अलग-अलग संगठनों ने लगातार प्रदर्शन करने की कोशिश की है।
कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बैरिकेडिंग को लेकर टकराव हुआ, गिरफ्तारियां और detentions हुईं और कई FIR दर्ज की गईं।
दिल्ली पुलिस ने हाल के विरोध प्रदर्शनों को संभालने के लिए केंद्रीय दिल्ली के कई हिस्सों में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए हैं।
यही हालिया तनाव 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को और संवेदनशील बनाता है।

CJP volunteers को police notices मिलने का दावा

इस बीच CJP ने एक और आरोप लगाया है।
अभिजीत दीपके का कहना है कि महाराष्ट्र और राजस्थान में संगठन के कुछ volunteers को पुलिस की ओर से notices मिले हैं, जिनमें उनसे 10 अक्टूबर के दिल्ली प्रदर्शन में भाग लेने को लेकर सवाल पूछे गए हैं। 
महाराष्ट्र पुलिस की ओर से इन notices को सामान्य preventive procedure बताया गया है और कहा गया है कि उनका उद्देश्य किसी खास संगठन को निशाना बनाना नहीं, बल्कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति में हिंसा और भड़काऊ गतिविधि से आगाह करना है। 

CJP ने हिंसा की आशंका पर क्या आरोप लगाया?

CJP नेतृत्व ने यह भी आरोप लगाया है कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में हिंसा भड़काने की कोशिश हो सकती है।
लेकिन यह अभी CJP का राजनीतिक आरोप है और इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है। The Economic Times
अब सोशल मीडिया पर CJP विरोधी हिंसक अपीलें सामने आने से सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर गंभीर हुए हैं, लेकिन किसी राजनीतिक दल या सरकार को सीधे उन वीडियो से जोड़ना तब तक सही नहीं होगा जब तक उसका प्रमाण सामने न आए।

influencer ने खुद को BJP supporter बताया?

वायरल वीडियो में संबंधित influencer ने खुद को BJP supporter न होने का दावा किया है।
उसने CJP की राजनीतिक associations और कुछ विपक्षी नेताओं तथा सार्वजनिक हस्तियों के समर्थन को लेकर अपनी आपत्ति बताई। Live Hindustan
इसलिए सिर्फ CJP-विरोधी वीडियो के आधार पर उस व्यक्ति को BJP का आधिकारिक कार्यकर्ता या प्रतिनिधि बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

क्या 10 अक्टूबर को दो समूह आमने-सामने होंगे?

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी।
CJP ने अपने समर्थकों को दिल्ली बुलाया है। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर उसके विरोध में भी लोगों से आने की अपील की जा रही है।
लेकिन counter-protest के लिए कोई औपचारिक अनुमति, संगठनात्मक सूची या अनुमानित संख्या अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
इसलिए headline में “10 अक्टूबर को हिंसा तय” या “दोनों समूह भिड़ेंगे” जैसी भाषा नहीं लिखनी चाहिए।
सही स्थिति यह है कि टकराव की आशंका को देखते हुए सुरक्षा चुनौती बढ़ गई है।

पुलिस के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

10 अक्टूबर को पुलिस के सामने मुख्य रूप से तीन स्थितियां महत्वपूर्ण होंगी।
पहली—CJP का घोषित प्रदर्शन और उसकी संख्या।
दूसरी—CJP के विरोध में किसी संगठित या असंगठित counter-group का पहुंचना।
तीसरी—सोशल मीडिया पर हिंसक अपीलों का वास्तविक ground mobilisation में बदलना या न बदलना।
इन सबके बीच पुलिस को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा।

किसी भी पक्ष की हिंसा खबर का हिस्सा, समर्थन नहीं

यह बात साफ रहनी चाहिए कि CJP के राजनीतिक दावों से सहमत या असहमत होना अलग बात है।
किसी भी पक्ष से लाठी, हमला या जबरन खदेड़ने की अपील लोकतांत्रिक राजनीतिक बहस का सामान्य हिस्सा नहीं मानी जा सकती।
इसी तरह किसी protest group की ओर से पुलिस या दूसरे नागरिकों के खिलाफ हिंसा होती है तो उस पर भी वही कानून लागू होगा।
10 अक्टूबर के कार्यक्रम की असली परीक्षा यही होगी कि अलग-अलग पक्ष अपनी राजनीतिक असहमति को शांतिपूर्ण दायरे में रखते हैं या नहीं।
10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले अब मामला सिर्फ SIR और CEC ज्ञानेश कुमार की राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है। CJP ने अपना आंदोलन शांतिपूर्ण रखने की बात कही है, लेकिन उसके विरोध में सोशल मीडिया पर लाठी लेकर जुटने जैसी अपीलों ने सुरक्षा का नया सवाल खड़ा कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने पहले ही बैरिकेडिंग और body-camera deployment बढ़ा दिया है। अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस 10 अक्टूबर की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था पर क्या फैसला करती है और ऑनलाइन टकराव की अपीलें जमीन पर पहुंचने से पहले रोकी जाती हैं या नहीं।

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