Ram Mandir News: ₹2 करोड़ की जमीन ₹18.5 करोड़ में क्यों खरीदी? कांग्रेस ने BJP से फिर पूछे 3 सवाल, ट्रस्ट का पुराना जवाब भी जानिए
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के 2021 के जमीन सौदे पर फिर सवाल उठाए। उन्होंने ₹2 करोड़ और ₹18.5 करोड़ की खरीद का हवाला देते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। ट्रस्ट पहले आरोपों से इनकार कर चुका है।
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Ram Mandir News: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राम मंदिर के चंदे और 2021 के जमीन सौदे पर भाजपा से नए सवाल किए। जानिए ₹2 करोड़ और ₹18.5 करोड़ के सौदे, जाँच और मंदिर ट्रस्ट के पक्ष का पूरा मामला।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/अयोध्या | 22 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अयोध्या राम मंदिर के चंदे और जमीन खरीद से जुड़े पुराने विवाद पर फिर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है।
रमेश ने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे के साथ निर्माण के लिए एकत्र चंदे में भी अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, उनके आरोपों को जाँच से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
खबर में खास
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जयराम रमेश ने 22 अक्टूबर को राम मंदिर के चंदे पर नए सवाल उठाए।
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2021 के ₹2 करोड़ और ₹18.5 करोड़ के जमीन सौदे का मुद्दा फिर उठाया।
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जमीन की दोनों रजिस्ट्रियों के गवाहों को लेकर सवाल किए।
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कांग्रेस ने 2021 की जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
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मंदिर ट्रस्ट पहले जमीन खरीद में अनियमितताओं के आरोप खारिज कर चुका है।
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चढ़ावे की कथित चोरी के अलग मामले में SIT चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
पांच मिनट में जमीन ₹2 करोड़ से ₹18.5 करोड़ कैसे हुई?
जयराम रमेश ने 18 मार्च 2021 को अयोध्या के बाग बिजैसी क्षेत्र में हुए जमीन सौदे का उल्लेख किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिस जमीन को दो संपत्ति कारोबारियों ने ₹2 करोड़ में खरीदा था, उसे कुछ ही मिनट बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ₹18.5 करोड़ में क्यों खरीदा?
कांग्रेस नेता ने सौदे के गवाहों का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, दोनों रजिस्ट्रियों में तत्कालीन भाजपा महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा गवाह थे।
रमेश ने पूछा कि जमीन खरीद को लेकर 2021 की जाँच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
राम मंदिर ट्रस्ट ने पहले क्या सफाई दी थी?
यह विवाद पहली बार जून 2021 में सामने आया था। तब समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने जमीन खरीद में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।
मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को खारिज किया था।
ट्रस्ट का कहना था कि जमीन से जुड़े पुराने समझौते पहले से मौजूद थे और बाद में अयोध्या में जमीन के बाजार मूल्य बढ़ गए थे।
ट्रस्ट ने दावा किया था कि संपत्ति की खरीद पारदर्शी तरीके से हुई और भुगतान बैंक खातों में किया गया। जुलाई 2021 में ट्रस्ट ने विशेषज्ञों की जाँच में अनियमितता का प्रमाण नहीं मिलने की बात भी कही थी।
क्या मामले में कोई जाँच नहीं हुई?
यहाँ दो अलग मामलों को समझना जरूरी है।
पहला मामला राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन के सौदों से संबंधित है। दूसरा मामला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी और अन्य दान की कथित चोरी से जुड़ा है।
जून 2026 में दान की कथित चोरी की जाँच के लिए SIT गठित हुई थी। जुलाई में रिपोर्ट सामने आई थी कि जाँच का दायरा मंदिर ट्रस्ट की कुछ जमीन खरीद तक भी बढ़ाया गया।
सितंबर 2026 में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने की खबर आई थी।
इसलिए किसी भी प्रकार की जाँच न होने का व्यापक दावा सही नहीं होगा। हालाँकि, 2021 के विशेष जमीन सौदे पर अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष अलग से स्पष्ट करना जरूरी हैl
BJP और कांग्रेस की राजनीति में अब क्या सवाल?
