दिल्ली एयरपोर्ट पर 3 घंटे रोके गए CM भगवंत मान? ₹50 हजार के चालान पर AAP ने केंद्र को घेरा, कस्टम की अलग कहानी

पेरिस से लौटे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को दिल्ली एयरपोर्ट पर तीन घंटे रोके जाने और 50 हजार रुपये का चालान काटे जाने का AAP ने दावा किया है। कस्टम सूत्रों ने सामान घोषित न करने की बात कही है।

पेरिस से लौटे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को दिल्ली एयरपोर्ट पर तीन घंटे रोके जाने और ₹50 हजार का चालान काटे जाने का AAP ने दावा किया है। वहीं कस्टम सूत्रों का कहना है कि मामला सामान घोषित नहीं करने से जुड़ा है।

खबर में खास

  • AAP का दावा—पेरिस से लौटे भगवंत मान को तीन घंटे तक एयरपोर्ट पर रोका गया।
  • पार्टी ने 50 हजार रुपये का चालान काटे जाने का आरोप लगाया।

  • कस्टम सूत्रों के मुताबिक, कुछ सामान घोषित नहीं करने पर शुल्क लगाया गया।

  • विदेश यात्रा की अनुमति को लेकर पहले भी केंद्र और पंजाब सरकार में विवाद हुआ था।
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पेरिस से लौटे पंजाब के CM भगवंत मान के एयरपोर्ट पर रोके जाने और चालान को लेकर राजनीतिक विवाद।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/चंडीगढ़ | 21 अक्टूबर 2026
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पेरिस यात्रा अब एक नए राजनीतिक विवाद में बदल गई है। आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि फ्रांस से लौटने के बाद मुख्यमंत्री को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर करीब तीन घंटे तक रोके रखा गया। इसके बाद उनके नाम पर 50 हजार रुपये का चालान जारी किया गया।
AAP ने इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार की ओर से राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। हालांकि, एयरपोर्ट के कस्टम विभाग से जुड़े सूत्रों ने सामान की घोषणा नहीं किए जाने से संबंधित अलग वजह बताई है। इस मामले में आधिकारिक चालान की पूरी प्रति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
पेरिस से लौटते ही एयरपोर्ट पर क्या हुआ?
मुख्यमंत्री भगवंत मान 19 अक्टूबर की रात पेरिस यात्रा से दिल्ली लौटे थे।
AAP पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को पहले सामान आने और फिर सामान की जाँच पूरी होने का हवाला देकर रोका गया।
पन्नू का दावा है कि करीब तीन घंटे बाद जब मुख्यमंत्री अपने वाहन से जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी अधिकारियों ने 50 हजार रुपये का चालान जारी कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने ऊपर से दबाव होने की बात कही थी। हालांकि, अधिकारियों द्वारा ऐसी बात कहे जाने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
AAP ने केंद्र सरकार पर क्यों लगाए आरोप?
आम आदमी पार्टी ने इस घटना को मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा को लेकर पहले हुए विवाद से जोड़ा है।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवंत मान पंजाब के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने के लिए पेरिस गए थे। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री के साथ इस प्रकार का व्यवहार अनुचित है।
बलतेज पन्नू ने भी दावा किया कि केंद्र सरकार पंजाब के मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं में बार-बार बाधा डालती रही है। उन्होंने इसे पंजाब के सम्मान से जुड़ा मामला बताया।
ये आम आदमी पार्टी के राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें केंद्र सरकार के निर्देश पर कार्रवाई होने का सिद्ध प्रमाण नहीं माना जा सकता।

कस्टम विभाग के सूत्रों ने क्या बताया?

इस विवाद में एक महत्वपूर्ण जानकारी कस्टम विभाग से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई है।
कस्टम सूत्रों का कहना है कि भगवंत मान के सामान में कुछ ऐसी वस्तुएँ थीं, जिन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घोषित नहीं किया गया था। इसी आधार पर करीब 50 हजार रुपये का सीमा शुल्क लगाया गया।
यह जानकारी AAP के राजनीतिक दबाव वाले आरोप से अलग तस्वीर प्रस्तुत करती है।
हालांकि, मूल चालान और वस्तुओं का आधिकारिक विवरण उपलब्ध हुए बिना यह अंतिम रूप से नहीं कहा जा सकता कि पूरी राशि शुल्क थी, जुर्माना था या उसमें दोनों शामिल थे।
 
विदेश यात्रा को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
भगवंत मान पेरिस में आयोजित SIAL 2026 अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार प्रदर्शनी से संबंधित कार्यक्रम में भाग लेने गए थे। इस यात्रा का उद्देश्य पंजाब के उत्पादों और मार्कफेड की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुँच बढ़ाना बताया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र ने पहले यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार किया था। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुँचा, जिसने केंद्र के फैसले को निरस्त करते हुए यात्रा का रास्ता साफ किया था।
AAP का आरोप है कि एयरपोर्ट की कार्रवाई भी उसी राजनीतिक विवाद की अगली कड़ी है। हालांकि, इन घटनाओं के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
 
अकाली दल ने भी उठाए सवाल
इस मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद लोगों के सामान को लेकर कस्टम अधिकारियों ने पूछताछ की थी। मजीठिया ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
मजीठिया के आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में घटनाक्रम को लेकर आम आदमी पार्टी और विपक्षी नेताओं के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

अब किन सवालों का जवाब बाकी?

इस विवाद में तीन बातें स्पष्ट होना आवश्यक हैं—मुख्यमंत्री को एयरपोर्ट पर कितनी देर और किस प्रक्रिया के तहत रोका गया, 50 हजार रुपये की राशि किस नियम के अंतर्गत निर्धारित हुई और क्या कार्रवाई में किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप था।
आधिकारिक दस्तावेज और संबंधित विभाग का विस्तृत बयान सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: मुख्यमंत्री हो या आम नागरिक, एयरपोर्ट पर जाँच की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए?

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