मिशन पर गई टीम लौटी ही नहीं, फिर पता चला चीन की हिरासत में है; अजीत डोभाल बोले- लगा करियर खत्म

IIT रुड़की में NSA अजीत डोभाल ने सिक्किम में अपनी शुरुआती तैनाती का किस्सा सुनाया। खुफिया मिशन पर गई टीम चीन की हिरासत में पहुंच गई थी, जिसके बाद उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती intelligence career का करीब 50 साल पुराना किस्सा सुनाया। सिक्किम में तैनाती के दौरान उनके द्वारा भेजी गई टीम कई दिनों तक वापस नहीं लौटी और बाद में पता चला कि वह चीन की हिरासत में है। मामले की जांच के दौरान डोभाल को लगा था कि उनका करियर खत्म हो जाएगा, लेकिन जांच में उन्हें जिम्मेदार नहीं पाया गया।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | रुड़की | 19 सितंबर 2026

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NSA अजीत डोभाल ने IIT रुड़की में अपने शुरुआती खुफिया करियर का अनुभव साझा किया।

खबर में खास

  • IIT रुड़की में अजीत डोभाल ने सुनाया पुराना किस्सा
  • सिक्किम में intelligence mission पर भेजी थी टीम
  • कई दिन बाद पता चला- चीन की हिरासत में है टीम
  • एक तिब्बती शेरपा की ‘Map Reading’ वाली सीख भी बताई
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने शुरुआती करियर का एक ऐसा किस्सा सुनाया है, जब उन्हें लगा था कि उनकी नौकरी और पूरा करियर खत्म होने वाला है।
IIT रुड़की के 2026 दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डोभाल ने बताया कि युवा IPS अधिकारी के तौर पर सिक्किम में तैनाती के दौरान उनकी जिम्मेदारी intelligence से जुड़े कामों की थी। इसी दौरान सीमा क्षेत्र में भेजी गई उनकी एक टीम कई दिनों तक वापस नहीं लौटी। बाद में पता चला कि टीम चीन की हिरासत में पहुंच गई है।

जब सिक्किम में तैनात थे युवा अजीत डोभाल

डोभाल ने छात्रों को बताया कि यह उनके करियर के शुरुआती दौर की बात है। वह युवा IPS अधिकारी थे और intelligence के काम में भी नए थे।
उस समय सिक्किम आज की तरह भारत का पूर्ण राज्य नहीं था। सिक्किम 1975 में भारत का 22वां राज्य बना।
डोभाल के मुताबिक उस दौर में उनकी जिम्मेदारियों में सीमा क्षेत्र पर नजर रखना और चीन की People's Liberation Army यानी PLA की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाना भी शामिल था।

मिशन पर गई टीम वापस नहीं आई

इसी दौरान एक intelligence mission के लिए कुछ लोगों की टीम सीमा क्षेत्र में भेजी गई।
डोभाल के मुताबिक टीम को करीब आठ दिनों में वापस आ जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दिन गुजरते गए और टीम की कोई जानकारी नहीं मिली।
उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि पांच, दस और फिर करीब 15 दिन गुजरने जैसी स्थिति हो गई। उन्हें चिंता होने लगी कि टीम के सदस्य सुरक्षित हैं भी या नहीं। किसी avalanche या दूसरी दुर्घटना की जानकारी भी सामने नहीं आई थी।

फिर Headquarters से आया फोन

कई दिनों की चिंता के बीच डोभाल के पास headquarters से फोन आया।
उनके वरिष्ठ अधिकारी ने पूछा कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा की तरफ भेजा था। इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनकी टीम चीनी हिरासत में है।
डोभाल के मुताबिक चीनी पक्ष ने टीम के सदस्यों से पूछताछ की और बाद में बातचीत या किसी व्यवस्था के बाद उन्हें वापस छोड़ दिया गया। जब वे वापस आए तो उस अनुभव का उन पर गहरा असर था।

डोभाल को लगा- अब करियर खत्म

टीम के वापस आने के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
डोभाल ने छात्रों को बताया कि यह उनके जीवन के सबसे मुश्किल दौर में से एक था। उन्हें लगा कि इतनी गंभीर घटना के बाद उनका करियर खत्म हो सकता है और शायद उन्हें कोई दूसरा पेशा चुनना पड़ेगा।
लेकिन जांच का नतीजा अलग रहा।
डोभाल के मुताबिक जांच में उन्हें जिम्मेदार नहीं पाया गया। मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए sketches और maps में खामियां होने की बात सामने आई।

फिर एक शेरपा ने समझाई ‘Map Reading’

इस कहानी का दूसरा हिस्सा डोभाल ने IIT के छात्रों को जिंदगी की सीख समझाने के लिए सुनाया।
उन्होंने बताया कि उस समय उनके साथ Intelligence Bureau से जुड़ा एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा काम करता था।
डोभाल को परेशान देखकर उसने वजह पूछी। डोभाल ने अपने करियर को लेकर चिंता बताई तो शेरपा ने पूरे मामले को “Map Reading” से जोड़कर समझाया।

जिंदगी के लिए बताईं तीन बातें

डोभाल के मुताबिक शेरपा ने उन्हें तीन बुनियादी बातें समझाईं:
  1. जानो कि अभी तुम कहां हो।
  2. जानो कि तुम्हें कहां पहुंचना है।
  3. यह पता करो कि वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।
बर्फीले पहाड़ों में लंबे समय तक काम कर चुके उस शेरपा की यह सीख डोभाल के लिए जीवन का महत्वपूर्ण सबक बन गई।
उन्होंने इसी अनुभव के जरिए छात्रों को समझाया कि मुश्किल परिस्थितियों में व्यक्ति के लिए अपनी मौजूदा स्थिति, लक्ष्य और उस लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते की समझ जरूरी है।

IIT रुड़की के छात्रों को सुनाया अनुभव

अजीत डोभाल IIT रुड़की के 2026 Convocation में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संस्थान के दीक्षांत समारोह में इस साल कुल 2,701 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जानी है, जबकि पहले दिन 1,277 undergraduate students को degrees दी गईं।
डोभाल ने अपने पुराने intelligence mission की कहानी को केवल चीन से जुड़ी घटना के तौर पर नहीं, बल्कि जीवन में सही दिशा और निर्णय की अहमियत समझाने के लिए छात्रों के सामने रखा।

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