परंपरागत युद्ध में भारत को नहीं हरा सकता पाकिस्तान
12 जनवरी 2026 पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर अक्सर दुनिया भर में बहस होती है, लेकिन अब पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी ने इस पर से पर्दा उठा दिया है। सेठी ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि पाकिस्तान का परमाणु बम कोई 'इस्लामिक बम' नहीं है, बल्कि यह शुद्ध रूप से एक 'एंटी-इंडिया बम' है।
पाकिस्तानी टीवी चैनल 'दुनिया न्यूज' से बातचीत करते हुए नजम सेठी ने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यह हकीकत जानता है कि वह परंपरागत युद्ध (Conventional War) में भारत का मुकाबला नहीं कर सकता।
नजम सेठी के अनुसार, "हम पारंपारिक जंग में भारत को कभी नहीं रोक सकते। यही कारण है कि हमें कभी भी 'नो फर्स्ट यूज' (No First Use) पॉलिसी पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।"
दुनिया के कई परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं कि वे युद्ध की स्थिति में 'पहले' परमाणु हमला नहीं करेंगे। भारत भी इस नीति का पालन करता है। लेकिन पाकिस्तान इससे हमेशा बचता रहा है।
सेठी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी 'पहले परमाणु हमला करने' की धमकी को एक रक्षात्मक कवच की तरह इस्तेमाल करता है। अगर वह 'नो फर्स्ट यूज' पर हस्ताक्षर कर देता है, तो उसकी भारत को डराने की एकमात्र शक्ति खत्म हो जाएगी।
अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर चिंता जताई जाती है कि कहीं इनका इस्तेमाल इजरायल या पश्चिमी देशों के खिलाफ न हो जाए। इस पर सेठी ने कहा:
"हम अपना बम इजरायल पर नहीं गिराएंगे और न ही अमेरिका पर। हमारा बम सिर्फ और सिर्फ भारत के खिलाफ है। यह एक रक्षात्मक लेकिन एंटी-इंडिया बम है।"
नजम सेठी का यह बयान पाकिस्तान की उस कूटनीति की पुष्टि करता है जिसे 'परमाणु ब्लैकमेलिंग' कहा जाता है। पाकिस्तान अपनी आर्थिक और सैन्य बदहाली को छिपाने के लिए अक्सर परमाणु हथियारों का डर दिखाता है। हालांकि, भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि उसकी परमाणु नीति जिम्मेदारीपूर्ण है, लेकिन वह किसी भी दुस्साहस का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।
मुख्य बिंदु:
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पाकिस्तान परंपरागत युद्ध में भारत से नहीं जीत सकता।
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परमाणु बम का उद्देश्य केवल भारत को रोकना है।
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पाकिस्तान 'No First Use' समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा।
