5 दिन की राहत या तूफान से पहले की शांति? ट्रंप ने ईरान पर हमले रोके
अमेरिका। मिडिल ईस्ट की लगातार बढ़ती जंग के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ऐलान किया है कि अगले 5 दिनों तक ईरान के किसी भी पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे थे और दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि हाल ही में हुई “बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव बातचीत” के बाद उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी साइट्स पर हमले को 5 दिन के लिए टाल दिया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी, यानी फिलहाल अमेरिका बातचीत के रास्ते को मौका देना चाहता है।दरअसल कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का सख्त अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी बाधा के पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरुआत करके पूरे एनर्जी सिस्टम को तबाह कर देगा। यह बयान अपने आप में बेहद आक्रामक था और इससे जंग का खतरा और बढ़ गया था।
होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत को समझना जरूरी है। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है और कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। हाल ही में इसी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से उछलते हुए देखे गए।लेकिन अब अमेरिका और ईरान के बीच वीकेंड पर हुई बातचीत ने हालात में थोड़ी नरमी लाई है। इसी बातचीत के बाद ट्रंप ने 5 दिन का यह “ब्रेक” देने का फैसला लिया है। इसे एक तरह से तनाव कम करने की कोशिश और बातचीत को आगे बढ़ाने का मौका माना जा रहा है।हालांकि इस फैसले के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ईरान की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, इजरायल और ईरान के बीच मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें अभी भी सामने आ रही हैं, जिससे यह साफ है कि जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह 5 दिन का ब्रेक जंग खत्म होने की शुरुआत है, या फिर यह सिर्फ एक रणनीतिक विराम है जिसके बाद हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। क्योंकि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो वही पावर प्लांट पर हमले की योजना फिर से सक्रिय हो सकती है।इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक, हर चीज इस तनाव से प्रभावित हो रही है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर करता है।
