देहरादून में नस्लीय हिंसा का शिकार बना त्रिपुरा का छात्र एंजेल चकमा
17 दिन बाद इलाज के दौरान मौत
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ग्राफिक एरा अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा—सिर, रीढ़ और मस्तिष्क में गंभीर चोटें, सीएम धामी ने परिवार को दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पढ़ाई कर रहे त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की कथित नस्लीय हमले के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। 9 दिसंबर को हुए इस हमले के बाद एंजेल पिछले 17 दिनों से अस्पताल में भर्ती था। 26 दिसंबर को गंभीर चोटों के चलते उसकी मौत हो गई, जिससे पूरे देश में आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया है।
ग्राफिक एरा अस्पताल की मेडिकल जांच रिपोर्ट में छात्र को लगी गंभीर और जानलेवा चोटों की पुष्टि हुई है।
मेडिकल रिपोर्ट में क्या आया सामने
अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार एंजेल के साथ हुई हैवानियत का खुलासा किया है। उनके पीठ और सिर पर गहरे घाव थे।
शरीर के दाहिने हिस्से (ऊपरी व निचले अंग) में भी गंभीर चोटें थीं और शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया था.. अस्पताल की जांच में आगे पता चला कि एंजल की रीढ़ की हड्डी में भी गंभीर चोटें आई थी। इतना ही नहीं उसके मस्तिष्क में दरारें (ब्रेन फिशर) भी आ गई थी और पैरों पर कई खरोंच के निशान थे।
डॉक्टरों के अनुसार, ये चोटें किसी भीषण और बेरहमी भरे हमले की ओर इशारा करती हैं।
क्या है पूरा मामला
यह घटना देहरादून के सेलाकुई थाना क्षेत्र की है। 9 दिसंबर की रात सड़क किनारे स्थित एक ढाबे पर एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल चकमा के साथ कथित तौर पर कुछ नशे में धुत युवकों ने नस्लीय टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर मामला हाथापाई में बदल गया।
आरोप है कि इसी दौरान एंजेल पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़ा। उन्हें तत्काल ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
एसएसपी देहरादून का बयान
देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपी नशे में थे और कुछ ही मिनटों में स्थिति हिंसक हो गई।
उन्होंने कहा,
“सिर और पीठ पर गंभीर चोट लगने के कारण एंजेल गिर पड़ा। इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही और 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।”
अब तक कितने गिरफ्तार
पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच टीम (SIT) गठित की।
अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.. जिसमें 2 नाबालिग भी हैं जिन्हें किशोर सुधार गृह भेजा जा चुका है।
गिरफ्तार किये गये आरोपियों के नाम अवनीश नेगी, शौर्य राजपूत, सूरज ख्वास, सुमित और आयुष बरोनी हैं।
एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसके नेपाल भागने की आशंका है। पुलिस ने उसकी सूचना देने पर 25,000 रुपये के इनाम की भी घोषणा की है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुख
घटना के बाद बढ़ते दबाव के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार (29 दिसंबर) को एंजेल चकमा के पिता से फोन पर बातचीत की।
सीएम ने कहा, “यह एक अत्यंत दुखद और अमानवीय घटना है। दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।”
मुख्यमंत्री ने बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए लिखा कि यह घटना राज्य में किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बयान
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस हत्या को भयावह घृणा अपराध (Hate Crime) करार दिया।
उन्होंने X पर लिखा—
“देहरादून में एंजेल चकमा और उनके भाई के साथ जो हुआ, वह भयानक है। नफरत अचानक पैदा नहीं होती, इसे रोजाना युवाओं को परोसा जा रहा है।”
राहुल गांधी ने कहा कि भारत सम्मान और विविधता पर बना देश है, न कि भय और दुर्व्यवहार पर।
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि नस्लीय असहिष्णुता और सामाजिक संवेदनहीनता का आईना है।
देहरादून जैसे शिक्षा केंद्र में इस तरह की घटना—
कानून-व्यवस्था पर सवाल
ऐसी घटनाएं बाहरी छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता और समाज में बढ़ती नफरत की खतरनाक तस्वीर पेश करती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोषियों को सख्त सजा मिलेगी, या फिर यह मामला भी आंकड़ों में सिमट जाएगा?
ग्राफिक एरा अस्पताल की मेडिकल जांच रिपोर्ट में छात्र को लगी गंभीर और जानलेवा चोटों की पुष्टि हुई है।
मेडिकल रिपोर्ट में क्या आया सामने
अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार एंजेल के साथ हुई हैवानियत का खुलासा किया है। उनके पीठ और सिर पर गहरे घाव थे।
शरीर के दाहिने हिस्से (ऊपरी व निचले अंग) में भी गंभीर चोटें थीं और शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया था.. अस्पताल की जांच में आगे पता चला कि एंजल की रीढ़ की हड्डी में भी गंभीर चोटें आई थी। इतना ही नहीं उसके मस्तिष्क में दरारें (ब्रेन फिशर) भी आ गई थी और पैरों पर कई खरोंच के निशान थे।
डॉक्टरों के अनुसार, ये चोटें किसी भीषण और बेरहमी भरे हमले की ओर इशारा करती हैं।
क्या है पूरा मामला
यह घटना देहरादून के सेलाकुई थाना क्षेत्र की है। 9 दिसंबर की रात सड़क किनारे स्थित एक ढाबे पर एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल चकमा के साथ कथित तौर पर कुछ नशे में धुत युवकों ने नस्लीय टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर मामला हाथापाई में बदल गया।
आरोप है कि इसी दौरान एंजेल पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़ा। उन्हें तत्काल ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
एसएसपी देहरादून का बयान
देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपी नशे में थे और कुछ ही मिनटों में स्थिति हिंसक हो गई।
उन्होंने कहा,
“सिर और पीठ पर गंभीर चोट लगने के कारण एंजेल गिर पड़ा। इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही और 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।”
अब तक कितने गिरफ्तार
पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच टीम (SIT) गठित की।
अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.. जिसमें 2 नाबालिग भी हैं जिन्हें किशोर सुधार गृह भेजा जा चुका है।
गिरफ्तार किये गये आरोपियों के नाम अवनीश नेगी, शौर्य राजपूत, सूरज ख्वास, सुमित और आयुष बरोनी हैं।
एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसके नेपाल भागने की आशंका है। पुलिस ने उसकी सूचना देने पर 25,000 रुपये के इनाम की भी घोषणा की है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुख
घटना के बाद बढ़ते दबाव के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार (29 दिसंबर) को एंजेल चकमा के पिता से फोन पर बातचीत की।
सीएम ने कहा, “यह एक अत्यंत दुखद और अमानवीय घटना है। दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।”
मुख्यमंत्री ने बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए लिखा कि यह घटना राज्य में किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बयान
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस हत्या को भयावह घृणा अपराध (Hate Crime) करार दिया।
उन्होंने X पर लिखा—
“देहरादून में एंजेल चकमा और उनके भाई के साथ जो हुआ, वह भयानक है। नफरत अचानक पैदा नहीं होती, इसे रोजाना युवाओं को परोसा जा रहा है।”
राहुल गांधी ने कहा कि भारत सम्मान और विविधता पर बना देश है, न कि भय और दुर्व्यवहार पर।
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि नस्लीय असहिष्णुता और सामाजिक संवेदनहीनता का आईना है।
देहरादून जैसे शिक्षा केंद्र में इस तरह की घटना—
कानून-व्यवस्था पर सवाल
ऐसी घटनाएं बाहरी छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता और समाज में बढ़ती नफरत की खतरनाक तस्वीर पेश करती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोषियों को सख्त सजा मिलेगी, या फिर यह मामला भी आंकड़ों में सिमट जाएगा?
