Gaganyaan-1 Launch: अंतरिक्ष में भारत की ऐतिहासिक छलांग
ISRO ने शुरू किया 'गगनयान-1' का काउंटडाउन, जानें कब उड़ान भरेगा पहला मानवरहित मिशन?
श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा 'व्योममित्र' रोबोट; गगनयान मिशन के जरिए भारत बनेगा अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला चौथा देश
बेंगलुरु/श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज घोषणा की है कि भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के पहले चरण (Gaganyaan-1) की लॉन्चिंग प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसरो चीफ एस. सोमनाथ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में यह मानवरहित मिशन अंतरिक्ष के लिए रवाना होगा।
'व्योममित्र' बनेगी भारत की पहली अंतरिक्ष यात्री
इस मिशन की सबसे खास बात इसमें जाने वाली 'व्योममित्र' (Vyommitra) है। यह एक महिला रोबोट (Humanoid) है, जिसे इसरो ने विशेष रूप से विकसित किया है।
काम क्या होगा? यह रोबोट अंतरिक्ष यान के अंदर ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे एक इंसान करता है। यह लाइफ सपोर्ट सिस्टम, पैनल ऑपरेशन्स और अंतरिक्ष के वातावरण का डेटा इकट्ठा करेगी।
सुरक्षा जांच: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्या हमारा 'क्रू मॉड्यूल' इंसानों के रहने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
भारत रचेगा इतिहास: दुनिया की नजरें टिकीं
अगर गगनयान के सभी चरण (G1, G2 और अंत में मानव मिशन) सफल रहते हैं, तो भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।
LVM3 रॉकेट का उपयोग: इस मिशन के लिए भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 (Launch Vehicle Mark 3) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे 'बाहुबली' रॉकेट भी कहा जाता है।
लैंडिंग: अंतरिक्ष में चक्कर लगाने के बाद यह मॉड्यूल बंगाल की खाड़ी में लैंड करेगा, जहां भारतीय नौसेना इसे रिकवर करेगी।
पीएम मोदी का 'स्पेस विजन 2040'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि "गगनयान सिर्फ एक मिशन नहीं है, यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं की उड़ान है।" भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाना और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय को उतारना है।
