साथ लड़ेंगे, फिर 403 सीटों पर अलग-अलग तैयारी क्यों? UP में सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का पेच
UP चुनाव 2027 में सपा-कांग्रेस साथ लड़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अभी तय नहीं है। कांग्रेस जल्द फैसला चाहती है, जबकि सपा पहले अपनी चुनावी तैयारी मजबूत करने पर जोर दे रही है।
On
UP विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन जारी रखने की बात तो है, लेकिन सीट बंटवारे पर तस्वीर साफ नहीं है। दोनों दल सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रहे हैं। जानिए कांग्रेस को जल्दी क्यों है और सपा इंतजार क्यों करना चाहती है।
साथ लड़ेंगे, फिर 403 सीटों पर अलग-अलग तैयारी क्यों? UP में सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का पेच
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 21 सितंबर 202
खबर में खास
-
2027 में साथ लड़ने की बात, लेकिन सीट शेयरिंग बाकी
-
कांग्रेस जल्द सीट और उम्मीदवार तय करना चाहती है
-
सपा का जोर पहले मजबूत चुनावी तैयारी पर
-
दोनों दल सभी 403 विधानसभा सीटों पर कर रहे तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस साथ रहेंगे या सीटों का बंटवारा दोनों के लिए नई मुश्किल खड़ी करेगा? चुनाव से पहले यह सवाल इसलिए बड़ा होता जा रहा है क्योंकि दोनों दल गठबंधन जारी रखने की बात कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस कितनी और कौन-सी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसका अंतिम फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है।
दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने स्तर पर UP की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस संगठन मजबूत करने और संभावित उम्मीदवार तलाशने में लगी है, जबकि सपा भी सीटवार अपनी स्थिति और संभावित उम्मीदवारों का आकलन कर रही है।
यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब दोनों को साथ चुनाव लड़ना है तो दोनों 403 सीटों की तैयारी क्यों कर रहे हैं?
कांग्रेस को सीट शेयरिंग में जल्दी क्यों?
कांग्रेस के भीतर एक राय यह है कि सीटों का फैसला जितना जल्दी होगा, पार्टी को उम्मीदवार चुनने और संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में संगठन तथा चुनावी तैयारी मजबूत करने के लिए उतना ज्यादा समय मिलेगा।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी सीट शेयरिंग को जल्दी अंतिम रूप देने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि इसमें देरी होने से जमीन पर नुकसान हो सकता है।
कांग्रेस के लिए दूसरी चिंता उसकी bargaining position की भी है।
अगर चुनाव के बेहद करीब सीटों पर समझौता होता है तो पार्टी के पास अपनी पसंद की सीटों और उम्मीदवारों को लेकर बातचीत करने का समय कम रह जाएगा। इसलिए कांग्रेस के कुछ नेता सीटों की संख्या ही नहीं, बल्कि कौन-सी सीट किसके हिस्से जाएगी, यह भी जल्द तय करना चाहते हैं।
सपा को जल्दी क्यों नहीं?
समाजवादी पार्टी की रणनीति इससे अलग दिखाई दे रही है।
सपा पहले विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति, संभावित उम्मीदवार और जीत की संभावना का आकलन करना चाहती है। इससे पहले भी सपा की ओर से सीटों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर सर्वे कराए जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं। जून में सामने आई जानकारी के मुताबिक पार्टी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों की जमीनी स्थिति का आकलन करा रही थी।
अखिलेश यादव की ओर से सीटों की संख्या के बजाय जीतने की क्षमता को महत्व देने की बात कही गई है। मौजूदा स्थिति में सपा सीट शेयरिंग पर तुरंत अंतिम फैसला करने के बजाय अपनी चुनावी तैयारी पूरी करने की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है।
403 सीटों की तैयारी का मतलब गठबंधन टूटना है?
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक रूप से सपा के साथ गठबंधन जारी रखने की बात कही है। जुलाई में UP कांग्रेस नेतृत्व ने भी कहा था कि दोनों दल 2027 का चुनाव साथ लड़ेंगे। कांग्रेस ने यह भी कहा कि सभी 403 सीटों पर संगठन मजबूत करना सहयोगी दल को कमजोर करना नहीं है।
इसलिए सभी सीटों पर तैयारी को फिलहाल गठबंधन टूटने की घोषणा की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
असल में दोनों पार्टियां सीट शेयरिंग की बातचीत से पहले अपनी संगठनात्मक और राजनीतिक स्थिति मजबूत रखना चाहती हैं।
असली लड़ाई सिर्फ ‘कितनी सीटें’ की नहीं
सपा-कांग्रेस के बीच संभावित समझौते में केवल सीटों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होगी।
