अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच UN में भारत की आवाज बनेंगे जयशंकर, 26 सितंबर को दुनिया के सामने रखेंगे देश का पक्ष
विदेश मंत्री एस जयशंकर न्यूयॉर्क में UNGA के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। 26 सितंबर को उनका संबोधन होगा, जबकि दौरे के दौरान कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर UN महासभा के 81वें सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करने न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। उनका संबोधन 26 सितंबर को होगा। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब रूसी ऊर्जा खरीद और अमेरिकी टैरिफ को लेकर भारत के सामने नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी है।
अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच UN में भारत की आवाज बनेंगे जयशंकर, 26 सितंबर को दुनिया के सामने रखेंगे देश का पक्ष
विदेश मंत्री एस जयशंकर 26 सितंबर को UNGA के 81वें सत्र को संबोधित करेंगे।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | 21 सितंबर 2026
खबर में खास
26 सितंबर को UNGA में जयशंकर का संबोधन
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे विदेश मंत्री
कई देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें
रूसी ऊर्जा और अमेरिकी टैरिफ के बीच अहम दौरा
विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के हाई-लेवल वीक में भारत का नेतृत्व करने न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण तारीख 26 सितंबर होगी, जब जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित कर दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखेंगे।
जयशंकर का यह अमेरिका दौरा केवल UN में भाषण तक सीमित नहीं रहने वाला है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक वह न्यूयॉर्क में कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे।
इस बार उनके दौरे की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वैश्विक मंच पर युद्ध, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक दबाव जैसे मुद्दे छाए हुए हैं। भारत के लिए इनमें एक बड़ा सवाल ऊर्जा सुरक्षा का है।
26 सितंबर को UN में भारत की बात रखेंगे जयशंकर
UNGA का 81वां सत्र 8 सितंबर से शुरू हो चुका है। विश्व नेताओं की उच्च स्तरीय बैठकों और General Debate के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह में दुनिया के तमाम नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं।
भारत की ओर से इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बजाय विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका UNGA संबोधन 26 सितंबर के लिए निर्धारित है।
यात्रा के दौरान जयशंकर अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। ऐसे में UNGA के मंच के साथ-साथ उसके बाहर होने वाली कूटनीतिक मुलाकातें भी भारत के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
अमेरिकी टैरिफ के कारण क्यों बढ़ गई दौरे की अहमियत?
जयशंकर की न्यूयॉर्क यात्रा ऐसे समय हो रही है जब रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से कड़े आर्थिक कदम उठाने का मुद्दा चर्चा में है।
18 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत पर स्वतः 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है; कानून अमेरिकी प्रशासन को ऐसे कदम उठाने की शक्ति देता है।
भारत रूस से ऊर्जा खरीदता रहा है, इसलिए इस घटनाक्रम का भारत-अमेरिका संबंधों और नई दिल्ली की ऊर्जा रणनीति के संदर्भ में महत्व है।
भारत का तर्क- 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा जरूरी
भारत ने इस मुद्दे पर अपनी प्राथमिकता पहले ही स्पष्ट कर दी है।
नई दिल्ली का कहना है कि वह अपने करीब 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीदने की नीति जारी रखेगा।
यही वजह है कि जयशंकर की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका संबंध और ऊर्जा सुरक्षा महत्वपूर्ण कूटनीतिक पृष्ठभूमि बने हुए हैं।
हालांकि यहां एक बात स्पष्ट रखना जरूरी है—26 सितंबर के UNGA भाषण में जयशंकर अमेरिकी टैरिफ या रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर क्या कहेंगे, इसका विस्तृत आधिकारिक एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
क्या अमेरिकी अधिकारियों से होगी मुलाकात?
जयशंकर के कार्यक्रम में कई bilateral और plurilateral meetings शामिल हैं, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक कार्यक्रम में हर बैठक और हर नेता का नाम अभी सार्वजनिक नहीं है।
इसलिए किसी खास अमेरिकी अधिकारी के साथ बैठक को तब तक निश्चित नहीं माना जाना चाहिए जब तक उसका आधिकारिक कार्यक्रम या बैठक सामने नहीं आती।
फिर भी UNGA का High-Level Week दुनिया के नेताओं और विदेश मंत्रियों के बीच औपचारिक बैठकों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण diplomatic engagements का मंच होता है।
दुनिया के सामने इस बार कौन-कौन से बड़े संकट?
इस बार UNGA ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है। युद्ध और संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु संकट, बढ़ती असमानता और Artificial Intelligence के नियमन जैसे मुद्दे वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं।
81वें सत्र की थीम है—“Restoring trust, managing transformation: A United Nations that delivers for all.” यानी भरोसा बहाल करने, बदलाव को संभालने और सभी के लिए परिणाम देने वाले संयुक्त राष्ट्र पर जोर दिया गया है।
22 सितंबर से General Debate
संयुक्त राष्ट्र महासभा की General Debate 22 सितंबर से शुरू होगी। अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि इसमें अपने देश की प्राथमिकताएं और वैश्विक मुद्दों पर अपना रुख सामने रखेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी 22 सितंबर को महासभा को संबोधित करने वाले हैं।
भारत की नजर इसके चार दिन बाद 26 सितंबर पर होगी, जब जयशंकर संयुक्त राष्ट्र के मंच से बोलेंगे।
26 सितंबर को किन बातों पर रहेगी नजर?
जयशंकर के संबोधन का विस्तृत विषय अभी सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह किन मुद्दों को कितनी प्रमुखता देंगे।
फिर भी मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक संघर्ष, बहुपक्षीय सहयोग और भारत के अंतरराष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दे इस यात्रा की व्यापक कूटनीतिक पृष्ठभूमि में हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण अगला अपडेट 26 सितंबर का वास्तविक भाषण होगा। भाषण आने के बाद इसी खबर को अपडेट करके यह जोड़ा जाना चाहिए कि जयशंकर ने किन मुद्दों को उठाया, अमेरिका या रूस को लेकर क्या कहा और भारत ने दुनिया के सामने कौन-सी प्राथमिकताएं रखीं।