IIT Bombay विवाद में नया मोड़: प्रो. डूला को सस्पेंड नहीं किया गया, Faculty Forum ने बताया आखिर क्या कार्रवाई हुई
छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद प्रो. सूर्यनारायण डूला पर कार्रवाई को लेकर IIT Bombay Faculty Forum ने स्थिति स्पष्ट की है। Forum के मुताबिक वह faculty में बने हुए हैं, उन्हें Dean की जिम्मेदारी से अस्थायी रूप से मुक्त किया गया है।
IIT Bombay में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद जारी विवाद के बीच Faculty Forum प्रो. सूर्यनारायण डूला के समर्थन में सामने आया है। Forum का कहना है कि डूला को संस्थान से suspend नहीं किया गया है, बल्कि जांच के दौरान Dean की जिम्मेदारी से अस्थायी रूप से हटाया गया है।
IIT Bombay विवाद में नया मोड़: प्रो. डूला को सस्पेंड नहीं किया गया, Faculty Forum ने बताया आखिर क्या कार्रवाई हुई
छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद IIT Bombay में विरोध के बीच Faculty Forum प्रो. डूला के समर्थन में सामने आया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मुंबई | 21 सितंबर 2026
खबर में खास
प्रो. सूर्यनारायण डूला के समर्थन में आया Faculty Forum
Forum का दावा- संस्थान की faculty से नहीं हुए suspend
Dean की जिम्मेदारी से अस्थायी रूप से किया गया मुक्त
छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में जारी है जांच
IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद जारी विरोध-प्रदर्शन और प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर हुई कार्रवाई को लेकर सोमवार को एक नया मोड़ सामने आया। IIT Bombay Faculty Forum ने प्रो. डूला का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया है कि उन्हें संस्थान की faculty से suspend नहीं किया गया है।
Forum के मुताबिक प्रो. डूला को फिलहाल Dean (Administrative Affairs) की जिम्मेदारी से अस्थायी रूप से मुक्त किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र की मौत से जुड़े मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना है।
यानी यहां दो बातें अलग-अलग हैं—Dean पद की जिम्मेदारी से हटाया जाना और IIT Bombay की faculty से suspend किया जाना।
आखिर प्रो. डूला पर क्या कार्रवाई हुई?
Faculty Forum के मुताबिक प्रो. सूर्यनारायण डूला IIT Bombay के faculty member बने हुए हैं। कार्रवाई उनकी Dean (Administrative Affairs) की जिम्मेदारी को लेकर हुई है।
Forum ने कहा कि उन्हें Dean की जिम्मेदारी से अस्थायी रूप से मुक्त करने का फैसला जांच को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।
IIT Bombay की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध functionaries listing में भी प्रो. डूला का संबंध Dean (Administrative Affairs) पद से दिखता है।
Faculty Forum क्यों आया समर्थन में?
Faculty Forum ने प्रो. डूला को लेकर सामने आई कुछ सूचनाओं पर आपत्ति जताई है।
Forum का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले प्रोफेसर की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली बातें सामने आ रही हैं। उसने निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि छात्र की मौत पर संवेदना और जांच के दायरे में आए लोगों के प्रति निष्पक्षता—दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए।
Forum ने प्रो. डूला के शैक्षणिक रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया और उनके teaching तथा student welfare से जुड़े पिछले कामों की ओर ध्यान दिलाया।
18 सितंबर को क्या हुआ था?
मामला IIT Bombay में पढ़ने वाले BTech छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को हुई मौत से जुड़ा है।
सामने आई जानकारी के मुताबिक साहिल को उसी दिन एक mid-semester examination के दौरान कथित तौर पर smartphone इस्तेमाल करते देखा गया था। Faculty Forum का कहना है कि प्रो. डूला उस समय परीक्षा से जुड़ी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और मामले को संस्थान की निर्धारित academic procedure के तहत आगे बढ़ाया गया।
बाद में साहिल अपने hostel room में मृत मिले। इसके बाद campus में विरोध शुरू हो गया। छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों और संस्थान के व्यवहार को लेकर कई सवाल उठे।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
साहिल के परिवार की ओर से प्रो. डूला सहित संबंधित लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज हुआ है और जांच जारी है। परिवार ने जातिगत उत्पीड़न और प्रताड़ना से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। ये आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही संस्थान में छात्रों का विरोध भी तेज हुआ।
तीन दिन का प्रदर्शन, छात्रों ने रखीं 18 मांगें
इस मामले की कहानी केवल एक professor पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है।
तीन दिनों तक चले विरोध के दौरान छात्रों ने प्रशासन के सामने 18 सूत्रीय मांगों का charter रखा। इसमें मामले की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई, छात्र प्रतिनिधित्व बढ़ाने, mental-health sensitisation, student concerns portal और प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने जैसी मांगें शामिल हैं।
IIT Bombay के Director प्रो. शिरीष केदारे ने रविवार रात छात्रों के साथ लंबी बैठक के दौरान इस 18-point charter पर हस्ताक्षर किए। हालांकि मांगों के implementation में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जाने की बात भी सामने आई है।
यही कारण है कि मामले को केवल एक professor और एक examination incident के रूप में देखने के बजाय campus administration और student welfare से जुड़े व्यापक विवाद के रूप में भी देखा जा रहा है।
Professor के समर्थन में faculty की लामबंदी
छात्रों के विरोध के समानांतर IIT Bombay के faculty members भी प्रो. डूला के समर्थन में सामने आए हैं।
सोमवार को faculty members ने campus के main building के भीतर प्रो. डूला के समर्थन में प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले जांच पूरी होने दी जानी चाहिए।
इससे IIT Bombay परिसर में इस पूरे मामले को लेकर दो अलग-अलग चिंताएं स्पष्ट दिखाई देती हैं—एक तरफ छात्र जवाबदेही और संस्थागत बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं Faculty Forum निष्पक्ष जांच पूरी होने से पहले प्रोफेसर को दोषी मानने का विरोध कर रहा है।
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चीज जांच का परिणाम होगा।
छात्रों के 18-point charter में स्वतंत्र जांच की मांग के साथ interim और final findings के लिए समयसीमा भी प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा छात्रों ने मांगों के implementation पर नियमित progress update की मांग की है।
इसलिए आने वाले दिनों में जांच, प्रशासन की कार्रवाई और 18 मांगों पर implementation से जुड़ी जानकारी इस मामले में अगला बड़ा development हो सकती है।