राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान संभाल चुके हैं जितेंद्र मिश्रा; 5,585 आवेदनों के बाद हुआ चयन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक CEO चुना है। इसके साथ मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव को ट्रस्ट का नया सदस्य नियुक्त किया गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला पूर्णकालिक CEO
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। अयोध्या में हुई महत्वपूर्ण बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO चुना गया है।
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी पूर्व अधिकारी और फाइटर पायलट रहे हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में 39 वर्ष से अधिक समय तक सेवाएं दी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व भी किया था।
ट्रस्ट के CEO पद के लिए देशभर से हजारों आवेदन आए थे। लंबी स्क्रीनिंग और साक्षात्कार प्रक्रिया के बाद तीन उम्मीदवारों का अंतिम पैनल ट्रस्ट के सामने रखा गया था। बैठक में जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनने की खबर है। Aaj Tak की रिपोर्ट
तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त
CEO के चयन के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रिक्त तीन स्थानों पर नए सदस्यों को भी नियुक्त किया गया है।
नए ट्रस्टियों में:
- अयोध्या के मदन मोहन पांडेय
- दिल्ली के महेश भागचंदका
- शिकोहाबाद की निर्मला यादव
शामिल हैं। तीनों नए सदस्य ट्रस्ट की बैठक में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
मदन मोहन पांडेय राम जन्मभूमि मामले में मंदिर पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील रहे हैं। महेश भागचंदका दिवंगत विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल से पारिवारिक रूप से जुड़े बताए जाते हैं।
ट्रस्ट में खाली क्यों हुए थे तीन पद?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन पद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद खाली हुए थे।
इन पदों को भरने के लिए ट्रस्ट स्तर पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में चुना गया।
नई नियुक्तियों को ट्रस्ट के प्रशासनिक पुनर्गठन और भविष्य की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और अनुभवी फाइटर पायलट हैं। उन्होंने चार दशकों के करीब वायुसेना में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
जनवरी 2025 में उन्होंने भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली थी। यह वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों में गिनी जाती है।
पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी पाकिस्तान से लगती देश की पश्चिमी सीमा और वहां होने वाले प्रमुख वायु अभियानों से जुड़ी होती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इस कमान की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
उनके सैन्य और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था।
5,585 लोगों ने किया था आवेदन
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO पद के लिए देशभर से कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदन करने वालों में सेवानिवृत्त IAS, IPS, सैन्य अधिकारी, प्रशासनिक विशेषज्ञ और गैर-सरकारी संगठनों में काम करने वाले अनुभवी लोग शामिल थे।
इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की जांच के लिए एक विशेष स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाई गई। शुरुआती जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में छांटा गया।
अंत में 16 उम्मीदवारों को आमने-सामने के साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। इन्हीं में से तीन लोगों के नाम अंतिम पैनल में रखे गए थे।
तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने किया चयन
CEO चयन के लिए रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई गई थी। कमेटी में लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावड़े भी शामिल थे।
सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता, अनुभव, वित्तीय मामलों की समझ और किसी बड़े संस्थान का संचालन करने की योग्यता का आकलन किया।
साक्षात्कार के बाद कमेटी ने अंतिम नामों का सीलबंद पैनल ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपा। ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर चर्चा के बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम का चयन किया गया।
CEO को क्या जिम्मेदारी मिलेगी?
राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO के पास मंदिर परिसर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी होगी।
उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हो सकते हैं:
- ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन।
- राम मंदिर परिसर की दैनिक व्यवस्थाओं की निगरानी।
- वित्तीय और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन।
- ट्रस्ट की अलग-अलग समितियों के बीच समन्वय।
- श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं।
- मंदिर परिसर की भावी परियोजनाओं की निगरानी।
- ट्रस्ट के निर्णयों को प्रशासनिक स्तर पर लागू कराना।
- दान और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के मुताबिक, ट्रस्ट में पेशेवर प्रशासन और पारदर्शिता के लिए पूर्णकालिक CEO की जरूरत थी।
CEO किसे रिपोर्ट करेंगे?
नई व्यवस्था के मुताबिक CEO श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेंगे। उनके प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक अधिकारों की सीमा ट्रस्ट द्वारा तैयार नियमों के अनुसार निर्धारित होगी।
CEO ट्रस्ट के निर्वाचित या मनोनीत सदस्यों का स्थान नहीं लेंगे। वह ट्रस्ट के निर्णयों को लागू करने वाले प्रमुख पेशेवर अधिकारी के रूप में काम करेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ट्रस्ट के नीतिगत फैसलों और मंदिर के दैनिक प्रशासन के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना है।
ट्रस्ट के पुनर्गठन की जरूरत क्यों पड़ी?
राम मंदिर ट्रस्ट पिछले कुछ समय से संगठनात्मक बदलावों के दौर से गुजर रहा था। तीन सदस्यों के पद खाली होने और मंदिर परिसर की प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ने के बाद पुनर्गठन की जरूरत महसूस की गई।
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में दर्शन, सुरक्षा, सुविधाएं, निर्माण, दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कार्यों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को मंदिर के दीर्घकालीन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दान और वित्तीय पारदर्शिता पर रहेगा जोर
राम मंदिर ट्रस्ट में हाल में दान और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक आरोप भी लगाए गए थे। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे ‘राम धन’ की सुरक्षा से जोड़ते हुए पारदर्शिता की मांग की थी।
ट्रस्ट की तरफ से किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि नए CEO की जिम्मेदारियों में प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करना प्रमुख माना जा रहा है।
एक पेशेवर CEO की नियुक्ति से भुगतान, ऑडिट, दान, संपत्तियों और परियोजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सेना के अनुभव का ट्रस्ट को कैसे मिलेगा लाभ?
वायुसेना में लंबे समय तक जिम्मेदारी संभालने के कारण जितेंद्र मिश्रा को अनुशासन, बड़े संगठनों के संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने का अनुभव है।
राम मंदिर परिसर में हर दिन आने वाली बड़ी भीड़, संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्था और कई विभागों के बीच समन्वय को देखते हुए यह अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि मंदिर ट्रस्ट का संचालन सैन्य संस्था से अलग है। इसलिए नए CEO की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह धार्मिक परंपराओं, ट्रस्ट की संरचना और पेशेवर प्रशासन के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट में नए अध्याय की शुरुआत
तीन नए सदस्यों की नियुक्ति और पहले पूर्णकालिक CEO के चयन को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए प्रशासनिक अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले समय में नए CEO के अधिकार, कार्यकाल, वेतन और विस्तृत जिम्मेदारियों से संबंधित जानकारी औपचारिक रूप से सामने आ सकती है।
अब सबसे बड़ी चुनौती मंदिर की धार्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा, निर्माण और वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना होगी।
क्या सेना के अनुभवी पूर्व अधिकारी की नियुक्ति से राम मंदिर ट्रस्ट का प्रशासन और अधिक पारदर्शी एवं मजबूत होगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
