Ram Mandir: चंपत राय का 9 पन्नों में बड़ा दावा- 'निर्माण के अहम फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा ही रहे प्रमुख'
SIT रिपोर्ट के बाद चुप्पी तोड़ते हुए पूर्व महासचिव ने 33 बिंदुओं में रखा पक्ष; L&T, Tata और अन्य निर्माण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की प्रमुख भूमिका का दावा
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने 9 पन्नों का बयान जारी कर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई दावे किए हैं। राय का कहना है कि निर्माण से जुड़े अधिकांश अहम फैसलों में मिश्रा की भूमिका प्रमुख रही और बिना समिति की मंजूरी के कोई काम नहीं हुआ।
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच और उसके बाद आए SIT के निष्कर्षों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। चंपत राय ने 9 पन्नों और 33 बिंदुओं में विस्तृत बयान जारी करते हुए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई अहम दावे किए हैं।
राय का कहना है कि मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका प्रमुख रही। निर्माण एजेंसियों के चयन से लेकर परिसर के अन्य भवनों के डिजाइन तक कई फैसलों में उन्होंने मिश्रा की सक्रिय भूमिका का जिक्र किया है।
SIT रिपोर्ट के बाद सामने आया बयान
चंपत राय का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच करने वाली SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है।
रिपोर्ट के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक मामले में दर्ज FIR में चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के नाम आरोपी के रूप में दर्ज नहीं हैं। SIT की जांच के दौरान आठ लोगों को नामजद किया गया था और अन्य अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की गई।
चंपत राय ने इससे पहले कहा था कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने तक वह आरोपों का विस्तार से जवाब नहीं देंगे। अब रिपोर्ट सामने आने के बाद उनका यह 9 पन्नों का बयान आया है।
L&T और Tata के चयन पर क्या बोले चंपत राय?
चंपत राय ने अपने बयान में दावा किया कि नृपेंद्र मिश्रा के सुझाव पर Larsen & Toubro यानी L&T को राम मंदिर के निर्माण कार्य के लिए चुना गया।
उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए उसी स्तर की Project Management Consultancy की जरूरत महसूस की गई, जिसके बाद Tata Consulting Engineers को चुना गया।
राय के मुताबिक इन फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
मंदिर के वास्तुकार पर भी दी सफाई
चंपत राय ने अपने बयान में राम मंदिर के वास्तुकार को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की।
उनके मुताबिक मुख्य राम मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा का चयन नृपेंद्र मिश्रा ने नहीं किया था। उनका चयन विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल ने वर्ष 1986 में ही कर लिया था और बाद में उन्हें ही इस परियोजना के साथ रखा गया।
हालांकि मंदिर परिसर में बनने वाले अन्य भवनों के लिए नोएडा की Design Associates को चुने जाने में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका होने का दावा चंपत राय ने किया है।
'निर्माण समिति में अपनी पसंद के लोगों को जोड़ा'
चंपत राय ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि नृपेंद्र मिश्रा ने अपनी सहायता के लिए निर्माण समिति में अपनी पसंद के कुछ लोगों को शामिल किया।
उन्होंने पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल का भी नाम लिया और कहा कि वह निर्माण समिति की बैठकों में लगातार नृपेंद्र मिश्रा के साथ मौजूद रहते थे।
राय के अनुसार समिति की बैठक सामान्य तौर पर हर महीने होती थी और कुछ समय तक हर 15 दिन में भी बैठक आयोजित की गई।
'बिना समिति के निर्णय कोई काम नहीं हुआ'
चंपत राय का सबसे महत्वपूर्ण दावा यह है कि राम मंदिर निर्माण में ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ जिसका फैसला निर्माण समिति में न हुआ हो।
उन्होंने कहा कि कई बार दूसरे लोगों की ओर से लिए गए निर्णय बाद में स्वीकार नहीं किए गए या उनमें बदलाव किया गया। उनका दावा है कि मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा स्वयं को प्रमुख भूमिका में रखते थे।
इस बयान को इस संदर्भ में भी देखा जा रहा है कि चढ़ावा विवाद के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई थी।
नृपेंद्र मिश्रा ने व्यवस्था पर उठाए थे सवाल
जून में चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्रा ने कहा था कि राम मंदिर परिसर का संचालन अब इतने बड़े स्तर पर पहुंच गया है कि इसके लिए एक पूर्णकालिक CEO या अनुभवी प्रशासक की जरूरत है।
उन्होंने उस समय चंपत राय की व्यक्तिगत ईमानदारी पर भरोसा भी जताया था, लेकिन मंदिर की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताई थी।
नृपेंद्र मिश्रा ने कथित चढ़ावा चोरी को मंदिर व्यवस्था पर गंभीर धब्बा बताते हुए पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही थी।
चढ़ावा मामले में क्या हुआ?
राम मंदिर में चढ़ावे की गणना और प्रबंधन को लेकर जून 2026 में विवाद सामने आया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय SIT गठित की थी।
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई, जिसमें आठ लोगों को नामजद किया गया। मामले में कई गिरफ्तारियां भी हुईं।
विवाद के बीच चंपत राय ने महासचिव पद और अनिल मिश्रा ने ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया था। बाद में ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए।
अंतिम SIT रिपोर्ट में क्या सामने आया?
18 अगस्त को सामने आई अंतिम SIT रिपोर्ट के अनुसार चंपत राय और अनिल मिश्रा FIR में आरोपी नहीं बनाए गए। रिपोर्ट राज्य के गृह विभाग की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपी गई है।
इसी घटनाक्रम के दो दिन बाद चंपत राय का 9 पन्नों का विस्तृत बयान सामने आया है।
नृपेंद्र मिश्रा का क्या जवाब आया?
चंपत राय की चिट्ठी सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर निर्माण की प्रगति पर कहा कि प्रारंभिक समीक्षा की जा चुकी है और मंदिर के अंदर का निर्माण कार्य 30 सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना से जुड़े सभी भुगतानों की समीक्षा की जा रही है।
फिलहाल चंपत राय के 33 बिंदुओं वाले बयान में किए गए प्रत्येक दावे पर नृपेंद्र मिश्रा की ओर से विस्तृत बिंदुवार प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चंपत राय के ताजा बयान ने राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर होगी कि ट्रस्ट इस बयान पर क्या रुख अपनाता है और नृपेंद्र मिश्रा इन दावों का विस्तृत जवाब देते हैं या नहीं।
