लखनऊ में अपराध दर पर अंकुश

पुलिस की वार्षिक रिपोर्ट में साइबर ठगी पर कड़ा प्रहार, हत्याओं में कमी, डकैती शून्य

2025 में 6,456 साइबर शिकायतें निपटाईं, 11.68 करोड़ रुपये फ्रीज; गैंगस्टर एक्ट से 829 सजाएं, यातायात सुधार के दावे पर सवाल

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लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने जारी किया वार्षिक अपराध की रिपोर्ट

 

लखनऊ: लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने रविवार को अपनी वार्षिक अपराध समीक्षा रिपोर्ट पेश की, जो शहर की सुरक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलावों को रेखांकित करती है। एक जनवरी से 28 दिसंबर 2025 तक की अवधि में साइबर अपराधों की 6,456 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 90 फीसदी का निपटारा कर लिया गया। पुलिस ने ठगों के इस्तेमाल में आए करीब 10,000 मोबाइल नंबरों को ब्लॉक कराया और पीड़ितों के खातों से लूटी गई 11.68 करोड़ रुपये की राशि को विभिन्न खातों में ट्रांसफर होने से पहले फ्रीज करा लिया। यह रिपोर्ट न केवल डिजिटल अपराधों पर पुलिस की सतर्कता दर्शाती है, बल्कि पारंपरिक अपराधों में कमी को भी उजागर करती है, हालांकि यातायात और हाईवे सुरक्षा के दावों पर कई सवाल बाकी हैं।

साइबर ठगी पर पुलिस का अभूतपूर्व कार्रवाई का दावा
संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि साइबर क्राइम के खिलाफ अभियान ने अपराधियों को पस्त कर दिया है। ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों को तत्काल ब्लॉक करने और फंड ट्रांसफर को रोकने से हजारों संभावित पीड़ितों को राहत मिली। कुमार ने जोर देकर कहा, "डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा की कुंजी है। हमने न केवल शिकायतें निपटाईं, बल्कि अपराध की जड़ों को काटा।" यह आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में 15-20 फीसदी अधिक शिकायतों को दर्शाते हैं, जो जागरूकता बढ़ने का संकेत भी हैं।

हत्याओं में गिरावट, डकैती पर पूर्ण रोक: पारंपरिक अपराधों पर लगाम
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में हत्या के मामलों में पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। इन घटनाओं में शामिल 525 आरोपी जेल भेजे गए, जबकि तीन के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) की कठोर कार्रवाई की गई। पुलिस ने दावा किया कि पूरे वर्ष डकैती की कोई घटना नहीं घटी, जो कानून-व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत सैकड़ों नामजदियों ने अपराधियों में खौफ पैदा किया। 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत 829 अपराधियों को सजा सुनाई गई, जिसमें महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े गंभीर अपराधों में 139 दोषसिद्धियां शामिल हैं। एक मामले में आरोपी को फांसी की सजा भी हो गई, जो न्याय प्रक्रिया की गति को रेखांकित करता है।

महिला सुरक्षा और सामाजिक अभियान: मिशन शक्ति से सशक्तिकरण
रिपोर्ट में 'मिशन शक्ति' के तहत महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। नशा मुक्ति अभियान और 'ऑपरेशन पहचान' के माध्यम से सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत किया गया। पुलिस ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के दौरे, जंबूरी समारोह तथा अन्य खेल आयोजनों में अपनी भूमिका का उल्लेख किया, जहां सुरक्षा व्यवस्था बेदाग रही। ये अभियान न केवल अपराध रोकने में सहायक साबित हुए, बल्कि सामुदायिक विश्वास को भी बढ़ाया।

यातायात सुधार के दावे: सड़कें सुरक्षित, लेकिन हादसों का साया बरकरार
शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार को रिपोर्ट ने अपनी उपलब्धि बताया। व्यस्त चौराहों पर डायवर्जन और वन-वे सिस्टम लागू करने से ट्रैफिक फ्लो बेहतर हुआ। ब्लैक स्पॉट्स की पहचान और इंजीनियरिंग सुधारों पर काम तेजी से चला, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आई। हाईवे व मुख्य मार्गों पर गश्त बढ़ाने का दावा किया गया है। हालांकि, धरातल पर ये प्रयास पूरी तरह प्रभावी नजर नहीं आते। उदाहरणस्वरूप, 22 दिसंबर को आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर गलत दिशा में दौड़ रही बस ने एक बाइक सवार को कुचल दिया, जो गश्त की कमी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी निगरानी और सख्ती बढ़ाने की जरूरत है।

लखनऊ पुलिस की यह रिपोर्ट शहरवासियों के लिए आश्वासन का संदेश देती है, लेकिन साइबर युग के खतरे और सड़क सुरक्षा जैसी चुनौतियां बरकरार हैं। आने वाले वर्ष में इन पर और फोकस की उम्मीद है।

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