‘सरकारी नौकरी होगी तो कमीशन कैसे मिलेगा?’ आउटसोर्सिंग पर अखिलेश का बड़ा आरोप, पेपर लीक से भी जोड़ा कनेक्शन
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों की जगह आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है और कंपनियों से कमीशन मिलता है। उन्होंने पेपर लीक और आरक्षण को भी इसी मुद्दे से जोड़ा। सरकार UPCOS के जरिए पारदर्शी व्यवस्था का दावा करती है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आउटसोर्सिंग, सरकारी भर्ती और पेपर लीक को लेकर योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों से सीधे कमीशन मिलता है और सपा के PDA ऑडिट में हजारों आरक्षित पदों को लेकर गड़बड़ी सामने आई।
‘सरकारी नौकरी होगी तो कमीशन कैसे मिलेगा?’ आउटसोर्सिंग पर अखिलेश का बड़ा आरोप, पेपर लीक से भी जोड़ा कनेक्शन
अखिलेश यादव ने outsourcing, सरकारी भर्ती, आरक्षण और paper leak को लेकर सरकार पर कई आरोप लगाए।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 21 सितंबर 2026
खबर में खास
आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर अखिलेश यादव का गंभीर आरोप
पेपर लीक और आउटसोर्सिंग के बीच संबंध होने का किया दावा
सपा की PDA ऑडिट रिपोर्ट में 11 हजार से अधिक पदों का मुद्दा उठाया
सरकार ने इसी महीने UPCOS के जरिए नई outsourcing व्यवस्था लागू की
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी और आउटसोर्सिंग का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों की जगह आउटसोर्सिंग को इसलिए बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि इसमें निजी कंपनियों के जरिए कमीशन लेने की गुंजाइश रहती है।
अखिलेश ने यहीं बात खत्म नहीं की। उन्होंने पेपर लीक, आरक्षण और आउटसोर्सिंग को एक-दूसरे से जोड़ते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 20 से ज्यादा पेपर लीक हुए और इसके पीछे सरकारी नौकरी देने से बचने तथा आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देने की मंशा थी। इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई नया प्रत्यक्ष प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया; इसलिए इन्हें सपा प्रमुख के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आउटसोर्सिंग को लेकर अखिलेश ने क्या आरोप लगाया?
अखिलेश यादव का आरोप है कि सरकारी नौकरी होने पर वेतन सीधे सरकारी बजट से दिया जाता है, जबकि आउटसोर्स व्यवस्था में बीच में निजी एजेंसियां आती हैं।
इसी आधार पर उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों से सीधे कमीशन लिया जा सकता है और इसी वजह से इस व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह एक गंभीर राजनीतिक आरोप है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इस आरोप को साबित करने वाला कोई नया दस्तावेज या जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
पेपर लीक से कैसे जोड़ा कनेक्शन?
अखिलेश यादव ने अपने बयान में पेपर लीक को भी आउटसोर्सिंग से जोड़ा।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 20 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और आरोप लगाया कि ऐसा सरकारी भर्ती रोकने और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देने के लिए किया गया।
हालांकि पेपर लीक की अलग-अलग घटनाएं और भर्तियों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं को जानबूझकर outsourcing बढ़ाने के उद्देश्य से कराए जाने के अखिलेश के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
यही फर्क इस खबर में जरूरी है—पेपर लीक की घटनाएं एक विषय हैं, जबकि उनके पीछे बताई गई मंशा अखिलेश यादव का राजनीतिक आरोप है।
‘11 हजार पदों’ का क्या है मामला?
अखिलेश यादव ने सपा की ओर से तैयार की गई PDA Audit Report का भी जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने अलग-अलग सरकारी भर्तियों का ऑडिट किया और आरक्षित वर्ग के हजारों पदों में गड़बड़ी पाई। आज की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार सपा ने 22 भर्तियों में 11,514 से अधिक आरक्षित पदों को लेकर सवाल उठाए हैं।
अखिलेश ने कहा कि पार्टी पहले भी इस मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट जारी कर चुकी है और सरकार से जवाब मांगा था।
यह आंकड़ा समाजवादी पार्टी की ऑडिट रिपोर्ट/दावे पर आधारित है, न कि किसी स्वतंत्र सरकारी ऑडिट का निष्कर्ष।
यह मुद्दा आज अचानक नहीं उठा
यहां इस खबर का महत्वपूर्ण FLASHBACK है।
अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से लगातार outsourcing को राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं। 10 सितंबर 2026 को उन्होंने घोषणा की थी कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो outsourcing व्यवस्था खत्म करके पक्की नौकरी देने की दिशा में काम किया जाएगा।
इससे भी पहले नवंबर 2024 में अखिलेश ने सरकारी पदों पर outsourcing के जरिए भर्ती को PDA के खिलाफ कथित “आर्थिक साजिश” बताया था और आरक्षण के अधिकार का मुद्दा उठाया था।
इसलिए सोमवार का बयान कोई बिल्कुल नया राजनीतिक मुद्दा नहीं है। नई बात यह है कि अब उन्होंने outsourcing को कथित commission और paper leak से सीधे जोड़कर आरोप लगाया है।
लेकिन सरकार ने इसी महीने बदली है व्यवस्था
इस कहानी का दूसरा पक्ष समझना भी जरूरी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने outsourcing कर्मचारियों के प्रबंधन के लिए Uttar Pradesh Corporation for Outsource Services यानी UPCOS बनाया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसे 2 जनवरी 2026 को गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया था। इसका घोषित उद्देश्य outsourcing कर्मचारियों को पूरा पारिश्रमिक और सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना तथा आरक्षण व्यवस्था के अनुपालन को सुनिश्चित करना है।
UPCOS के जरिए अलग-अलग सरकारी विभागों में outsourcing कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया, तैनाती, attendance, salary, statutory compliance, agency management और payment को एक digital platform से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
यानी एक तरफ अखिलेश यादव पूरी outsourcing व्यवस्था की बुनियाद पर सवाल उठा रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने के बजाय UPCOS के जरिए उसे regulate और transparent बनाने की दिशा में आगे बढ़ी है।
कंपनियों को भुगतान/कमीशन की व्यवस्था क्या है?
इस मामले में एक तथ्य और महत्वपूर्ण है।
UPCOS के आधिकारिक vendor process में outsourcing agencies को निर्धारित प्रक्रिया के तहत empanel करने का प्रावधान है। पोर्टल पर यह भी दर्ज है कि आवश्यक पुष्टि/प्रमाणपत्र जमा होने के बाद outsourcing agency को commission amount का भुगतान किया जाता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है।
Agency को नियमों के तहत मिलने वाला contractual/service commission और अखिलेश यादव द्वारा लगाया गया कथित भ्रष्ट कमीशन का आरोप एक ही बात नहीं है।
इसलिए केवल “commission” शब्द देखकर दोनों को जोड़ना गलत होगा। अखिलेश जिस कथित कमीशन की बात कर रहे हैं, उसके लिए अलग प्रमाण की आवश्यकता होगी।
3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा
Outsourcing का सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर सीमित संख्या में कर्मचारियों पर नहीं पड़ता।
सितंबर की शुरुआत में नई व्यवस्था लागू किए जाने के समय प्रदेश में करीब 3.5 लाख outsourcing कर्मचारियों के इससे जुड़े होने की जानकारी सामने आई थी। नई व्यवस्था में कर्मचारियों का एकीकृत record तैयार करने और recruitment से payment तक monitoring online करने की योजना है।
इस वजह से outsourcing पर सरकार और विपक्ष की यह बहस सीधे बड़ी संख्या में कर्मचारियों और नौकरी तलाश रहे युवाओं से जुड़ती है।
अब असली सवाल क्या हैं?
अखिलेश यादव के ताजा आरोपों के बाद इस मुद्दे पर तीन सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।
पहला, क्या outsourcing agencies के जरिए भ्रष्ट कमीशन लिए जाने के आरोप के समर्थन में कोई दस्तावेज या जांच सामने आती है?
दूसरा, सपा की ओर से उठाए गए 11 हजार से अधिक आरक्षित पदों के दावे पर सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया क्या है?
तीसरा, UPCOS लागू होने के बाद outsourcing कर्मचारियों की भर्ती, आरक्षण, वेतन और agency payments में जमीन पर कितना बदलाव आता है?
इन सवालों के जवाब सामने आने पर इस खबर को इसी URL पर अपडेट किया जाना चाहिए।