राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ आज सिर्फ लड़कियों के लिए, 30 पुलिस शर्तें; कार्यक्रम से पहले बढ़ा तनाव
पुणे में छात्राओं से शिक्षा, सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर पर संवाद करेंगे राहुल गांधी; कार्यक्रम में हजारों लोगों के पहुंचने की उम्मीद
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान आज पुणे पहुंच रहा है। इस बार कार्यक्रम खास तौर पर छात्राओं के लिए है। पुलिस ने आयोजन को 30 शर्तों के साथ अनुमति दी है, जबकि कार्यक्रम से पहले छात्र संगठनों के बीच तनाव भी सामने आया।
पुणे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शनिवार को पुणे पहुंच रहा है। इस बार कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे खास तौर पर छात्राओं के संवाद पर केंद्रित किया गया है। राहुल गांधी ने कार्यक्रम की घोषणा करते हुए संदेश दिया था—“अब लड़कियां बोलेंगी और देश सुनेगा।”
कार्यक्रम में शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, समान अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर से जुड़े मुद्दों पर छात्राओं से बातचीत प्रस्तावित है। आयोजकों को हजारों लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक करीब 10 हजार की भीड़ का अनुमान लगाया गया है।
सिर्फ छात्राओं के लिए क्यों रखा गया कार्यक्रम?
राहुल गांधी ने 16 अगस्त को सोशल मीडिया पर कार्यक्रम का ऐलान करते हुए युवाओं और खास तौर पर महिला छात्रों के मुद्दों को सामने रखा था। उन्होंने हाल के छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा था कि लड़कियों की आवाज दबने नहीं दी जानी चाहिए। पुणे के इस कार्यक्रम को उसी संदेश के अगले चरण के रूप में पेश किया गया।
राहुल गांधी ने अपने बयान में BJP और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों को स्वतंत्र तथ्य के बजाय राहुल गांधी का राजनीतिक दावा मानकर ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
पुलिस ने रखीं 30 शर्तें
कार्यक्रम को पुणे पुलिस की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन इसके साथ 30 शर्तें रखी गई हैं। इनमें आपत्तिजनक पोस्टर या तस्वीरों पर रोक, धार्मिक भावनाएं आहत न होने देने, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और आयोजन से जुड़े दूसरे नियम शामिल हैं। पुलिस ने ड्रोन के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगाई है।
ABP की रिपोर्ट के मुताबिक कार्यक्रम के लिए RTO चौक के नजदीक SSPMS कॉलेज मैदान निर्धारित किया गया और करीब 8 से 10 हजार लोगों की मौजूदगी का अनुमान जताया गया था।
कार्यक्रम से पहले छात्र राजनीति भी गर्म
राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम से पहले शहर में छात्र राजनीति भी गरमा गई। COEP टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल के बाहर ABVP और NSUI से जुड़े छात्र समूहों के बीच तनाव और झड़प की खबर सामने आई। इससे आज के कार्यक्रम पर राजनीतिक निगाह और बढ़ गई है।
इस वजह से ‘छात्रों की गूंज’ अब केवल छात्र संवाद कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस और BJP से जुड़े छात्र संगठनों के राजनीतिक टकराव के बीच भी चर्चा में है।
पहले किन शहरों में हुआ ‘छात्रों की गूंज’?
‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस और उससे जुड़े छात्र संगठनों का युवाओं से संवाद अभियान है। इससे पहले अभियान के कार्यक्रम दूसरे शहरों में आयोजित किए जा चुके हैं। राहुल गांधी के कार्यक्रमों में शिक्षा, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाएं, रोजगार और विद्यार्थियों की समस्याएं प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
पुणे का कार्यक्रम इस लिहाज से अलग है कि यहां मुख्य फोकस छात्राओं से सीधी बातचीत पर रखा गया है।
NEET प्रदर्शन का भी दिया था हवाला
पुणे कार्यक्रम की घोषणा करते समय राहुल गांधी ने दिल्ली में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शन में शामिल युवाओं से हुई बातचीत का वीडियो भी साझा किया था। छात्रों ने उनके सामने पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने उनका समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।
यही पृष्ठभूमि पुणे के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को केवल एक राजनीतिक सभा की बजाय शिक्षा और युवा मुद्दों से जुड़ा संवाद बनाने की कांग्रेस की कोशिश के रूप में पेश करती है।
अब राहुल गांधी के बयान पर नजर
पुणे कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्राओं के सवालों पर क्या जवाब देते हैं, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर कौन से मुद्दे उठाते हैं और केंद्र तथा महाराष्ट्र सरकार को लेकर क्या राजनीतिक संदेश देते हैं, इस पर नजर रहेगी।
खास तौर पर कार्यक्रम से ठीक पहले छात्र संगठनों में सामने आए तनाव और पुलिस की 30 शर्तों के कारण आज का आयोजन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है।
