क्या 2027 में फिर SP-BSP साथ? मायावती के हमले पर अखिलेश बोले—सपा गठबंधन नहीं तोड़ती, साथ निभाती है

जयंत चौधरी पर ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को लेकर मायावती ने साधा था निशाना; अखिलेश ने BJP के सहयोगियों के लिए 120 सीटों की मांग कर किया पलटवार

2027 चुनाव से पहले अखिलेश यादव और मायावती के बीच SP BSP गठबंधन पर राजनीतिक चर्चा

मायावती के तीखे हमले पर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी कभी गठबंधन नहीं तोड़ती और जिसे साथ लेती है, उसका साथ निभाती है। बयान के बाद 2027 चुनाव में SP-BSP समीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गठबंधनों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच बसपा प्रमुख मायावती के तीखे हमले पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐसा जवाब दिया है, जिसने एक बार फिर SP-BSP के पुराने गठबंधन और भविष्य के सियासी समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी कभी गठबंधन नहीं तोड़ती और जिसे साथ लेती है, उसका साथ मजबूती से निभाती है।

क्या अखिलेश ने दिया SP-BSP गठबंधन का संकेत?

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मायावती के आरोपों पर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी कभी गठबंधन नहीं तोड़ती और साथ निभाती है।

अखिलेश यादव के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या 2027 में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी फिर साथ आ सकती हैं?

फिलहाल इसका जवाब नहीं कहा जा सकता। अखिलेश ने किसी नए SP-BSP गठबंधन की घोषणा या बातचीत की पुष्टि नहीं की है। उनका बयान मायावती के उन आरोपों के जवाब में आया, जिनमें बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी पर अपने सहयोगियों के साथ अविश्वसनीय व्यवहार करने का आरोप लगाया था।

यानी राजनीतिक रूप से बयान महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे “SP-BSP गठबंधन तय” के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।

अखिलेश बोले—लोग खुद सपा को छोड़कर जाते हैं

अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसी सहयोगी को छोड़कर नहीं जाती। उनके मुताबिक पार्टी जब किसी को अपने साथ लेती है तो उसका साथ निभाती है, जबकि कई बार सहयोगी दल स्वयं समाजवादी पार्टी को छोड़कर चले जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा दौर में सच बोलना मुश्किल हो गया है।

यह टिप्पणी मायावती के शनिवार सुबह किए गए उस हमले के बाद आई, जिसमें उन्होंने सपा प्रमुख पर पुराने सहयोगी दलों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठाए थे।

मायावती ने अखिलेश पर क्यों साधा निशाना?

इस विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के RLD और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर दिए गए “चवन्नी से रुपया” वाले बयान से हुई।

मायावती ने इस टिप्पणी को अमर्यादित और आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि अखिलेश यादव को जयंत चौधरी, राष्ट्रीय लोकदल, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी पर गठबंधन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने 1993 के SP-BSP गठबंधन और 2019 के लोकसभा चुनाव में हुए गठबंधन का उदाहरण देते हुए सपा के रवैये की आलोचना की।

2019 में साथ लड़े थे अखिलेश और मायावती

2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की राजनीति ने अखिलेश यादव और मायावती को एक मंच पर देखा था। दोनों पार्टियों ने BJP के खिलाफ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे और बाद में दोनों दल अलग हो गए।

इस पुराने राजनीतिक इतिहास की वजह से अखिलेश का मौजूदा बयान ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि फिलहाल दोनों दलों की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव के लिए फिर साथ आने का कोई औपचारिक संकेत नहीं दिया गया है।

BJP के सहयोगियों के लिए अखिलेश ने मांगी 120 सीटें

मायावती को जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने BJP और उसके सहयोगी दलों पर भी निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि BJP को अपने सहयोगियों को ज्यादा सीटें देनी चाहिए। अखिलेश ने दावा किया कि सहयोगी दलों को कम से कम 120 विधानसभा सीटें मिलनी चाहिए और इसे मौजूदा हिस्सेदारी से लगभग चार गुना बताया।

उन्होंने जयंत चौधरी का जिक्र करते हुए BJP को भी राजनीतिक चुनौती देने की कोशिश की और इसे चौधरी चरण सिंह के सम्मान से जोड़ा।

जयंत को लेकर UP में बढ़ी सियासी खींचतान

पिछले कुछ दिनों से जयंत चौधरी भी उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में हैं। अखिलेश के “चवन्नी से रुपया” वाले बयान के बाद जयंत ने प्रतिक्रिया दी थी और अब मायावती भी खुलकर उनके समर्थन में सामने आई हैं।

इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट वोट, RLD-BJP संबंध और 2027 के संभावित सीट बंटवारे को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

PDA पर भी मायावती का हमला

मायावती ने अखिलेश यादव की PDA रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा राजनीतिक जरूरत के अनुसार PDA में ‘P’ का अर्थ बदलती रहती है।

2027 चुनाव से पहले PDA समाजवादी पार्टी की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है। हाल के दिनों में इसके दायरे में ब्राह्मण मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हुई है।

2027 में असली मुकाबला गठबंधन की राजनीति का?

UP विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि समाजवादी पार्टी 2027 का चुनाव राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लड़ेगी।

ऐसे में मायावती के हमले पर उनका “हम गठबंधन नहीं तोड़ते” वाला जवाब केवल पुराने विवाद का पलटवार है या भविष्य की राजनीति के लिए कोई दरवाजा खुला रखने की कोशिश—यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

फिलहाल इतना निश्चित है कि SP-BSP के नए गठबंधन की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

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