निशु आजाद मामले में चंद्रशेखर के समर्थन पर कल्पना श्रीवास्तव का सवाल, जानिए विवाद और पुलिस का पक्ष

पिता से मारपीट के मामले में न्याय मांग रहीं निशु आजाद को चंद्रशेखर का समर्थन; कल्पना श्रीवास्तव ने उनकी मंशा पर सवाल उठाए, दिल्ली पुलिस ने अनुचित प्रभाव के आरोप नकारे।

चंद्रशेखर आजाद और संसद मार्ग पुलिस थाने की तस्वीरों का संयोजन

निशु आजाद के पिता से मारपीट के मामले में चंद्रशेखर आजाद के समर्थन पर कल्पना श्रीवास्तव ने सवाल उठाए हैं। पढ़ें विवाद की पृष्ठभूमि, शिकायत में दर्ज आरोप और दिल्ली पुलिस का जवाब।

निशु आजाद मामले में चंद्रशेखर के समर्थन पर सवाल

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निशु के पिता से मारपीट के मामले में कार्रवाई को लेकर उठे सवाल।

निशु आजाद के पिता से मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग के बीच चंद्रशेखर आजाद के समर्थन को लेकर सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी सामने आई है। ‘कल्पना श्रीवास्तव’ नाम वाले एक्स अकाउंट से साझा पोस्ट में चंद्रशेखर पर लड़की को अपनी राजनीति के लिए आगे करने का आरोप लगाया गया है। पोस्ट में उनके समर्थन की मंशा को जाति से जोड़कर भी सवाल उठाया गया है।

यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब निशु अपने पिता के साथ हुई मारपीट के मामले में न्याय मांग रही हैं। यहां दो अलग विषय हैं—एक मारपीट की शिकायत और उस पर पुलिस की कार्रवाई, दूसरा चंद्रशेखर के हस्तक्षेप पर की गई राजनीतिक टिप्पणी। सोशल मीडिया पर लगाया गया आरोप अपने आप में किसी की मंशा का प्रमाण नहीं है।

कल्पना श्रीवास्तव ने पोस्ट में क्या कहा?

साझा स्क्रीनशॉट में @Lawyer_Kalpana अकाउंट से चंद्रशेखर आजाद पर लड़की को “ढाल” बनाने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ उनके निजी जीवन को लेकर एक अन्य महिला का उल्लेख करते हुए आरोप भी किया गया है।

इन निजी आरोपों के समर्थन में उपलब्ध पोस्ट में कोई दस्तावेज या अन्य सत्यापन योग्य साक्ष्य दिखाई नहीं देता। इसलिए उन्हें प्रमाणित घटना के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इसी तरह पोस्ट में किया गया जाति आधारित निष्कर्ष भी पोस्ट करने वाले का आरोप है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं। स्रोत: साझा एक्स पोस्ट

क्या है निशु आजाद के पिता से मारपीट का मामला?

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, मामला 23 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट से जुड़ा है। निशु के पिता संजय कुमार वहां अपनी बेटी और एक दोस्त के साथ पहुंचे थे।

एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, वीडियो बनाने पर आपत्ति के बाद विवाद शुरू हुआ। संजय का कहना था कि वह प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर उन्हें घेरकर पीटा गया और सिर पर कड़े जैसी ठोस वस्तु से वार किया गया। रिपोर्ट में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को आरोपी बताया गया है। स्वतंत्र भारद्वाज ने भी आजतक से बातचीत में विवाद की शुरुआत वीडियो बनाने को लेकर होने की बात कही। स्रोत: आजतक

चंद्रशेखर आजाद ने क्या सवाल उठाए?

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद ने निशु के समर्थन में स्वतंत्र भारद्वाज के बयान और पुलिस रिकॉर्ड के बीच कथित अंतर पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आरोपी के कथन और पुलिस की जानकारी में अंतर क्यों है तथा मामले में जेल भेजने जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

उनकी टिप्पणी का केंद्र पुलिस की कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग है। कल्पना श्रीवास्तव ने इसी समर्थन की मंशा पर सवाल उठाया है। हालांकि, उनकी पोस्ट पर चंद्रशेखर की कोई विशिष्ट प्रतिक्रिया उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है। स्रोत: नवभारत टाइम्स

निशु की शिकायत और पुलिस का जवाब

निशु ने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए राहुल गांधी से भी मदद मांगी थी। इस मामले में CJP से जुड़े लोग संसद मार्ग थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।

दूसरी ओर, नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा के हवाले से कहा गया है कि अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में चोटें मामूली बताई गई थीं। पुलिस ने सिर में क्रैक होने के दावे को मेडिकल रिकॉर्ड से मेल न खाने वाला बताया।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को उस समय हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी और अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। पुलिस ने किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप के कारण कार्रवाई प्रभावित होने के आरोप को भी खारिज किया। यह पुलिस का पक्ष है; इसे मामले में अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं समझा जाना चाहिए। स्रोत: नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट

विवाद में किन बातों का अंतर समझना जरूरी है?

मारपीट की शिकायत, पुलिस का मेडिकल रिकॉर्ड पर आधारित जवाब और सोशल मीडिया पर नेताओं की मंशा को लेकर लगाए गए आरोप अलग-अलग बातें हैं। किसी आरोपी की जाति या किसी नेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी से मारपीट के मामले के तथ्य तय नहीं होते।

इस मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों और पुलिस के जवाब, दोनों को साथ पढ़ना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में कल्पना श्रीवास्तव के निजी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मारपीट के आरोपों पर अंतिम दोष निर्धारण अदालत की प्रक्रिया से होगा।

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