AI वाली तस्वीर बताकर उड़ाया मजाक, अब CM मोहन यादव ने बुलाकर थपथपाई ‘बिट्टू तबाही’ की पीठ
20 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी ने बिना बड़े बजट और मशीनों के शुरू की अजनार नदी की सफाई; वायरल तस्वीरों पर उठे सवाल तो नगरपालिका ने की काम की पुष्टि
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से मशहूर सुरेंद्र सिंह चौधरी ने अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया। नदी की पहले और बाद की तस्वीरें वायरल हुईं तो कुछ लोगों ने उन्हें AI से बनी तस्वीरें बताया। नगरपालिका द्वारा काम की पुष्टि किए जाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बिट्टू से मुलाकात कर उनकी मेहनत की सराहना की।
भोपाल/राजगढ़। सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश के युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी ने अपने काम से साबित कर दिया कि किसी बड़े बदलाव के लिए हमेशा भारी बजट, बड़ी टीम और आधुनिक मशीनों की जरूरत नहीं होती। एक व्यक्ति का संकल्प भी समाज और सरकारी व्यवस्था को कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकता है।
राजगढ़ जिले के ब्यावरा की अजनार नदी कभी कचरे, पॉलीथिन, बोतलों और गंदगी से पटी हुई थी। नदी की हालत देखकर सुरेंद्र सिंह चौधरी ने इसकी सफाई करने का फैसला किया। उन्होंने किसी सरकारी अभियान या बड़ी संस्था की सहायता मिलने का इंतजार नहीं किया और खुद फावड़ा लेकर नदी की सफाई में उतर गए।
शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। कुछ लोगों ने उन्हें पागल तक कहा, लेकिन सुरेंद्र ने अपना अभियान नहीं छोड़ा। धीरे-धीरे उनकी मेहनत का परिणाम दिखाई देने लगा और नदी की पहले तथा बाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
AI वाली बताई गई नदी की तस्वीर
अजनार नदी की सफाई के बाद जब उसकी बदली हुई तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई तो कई लोगों ने उस पर सवाल उठाए। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि नदी की सफाई दिखाने वाली तस्वीर AI से बनाई गई हो सकती है।
तस्वीरों की सत्यता पर शुरू हुए विवाद के बीच ब्यावरा नगरपालिका के अधिकारियों ने बिट्टू के सफाई अभियान और तस्वीरों की पुष्टि की। इसके बाद उन लोगों को जवाब मिला जो उनके काम और वायरल तस्वीरों की सत्यता पर सवाल खड़े कर रहे थे।
हालांकि, नदी की सफाई का कितना हिस्सा बिट्टू ने अकेले किया और बाद में नगरपालिका ने कितनी सहायता उपलब्ध कराई, इसे अलग-अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अभियान की शुरुआत बिट्टू ने स्वयं की थी और उनकी लगातार मेहनत को देखकर बाद में स्थानीय निकाय भी सफाई कार्य में शामिल हुआ।
कौन हैं ‘बिट्टू तबाही’?
बिट्टू तबाही का वास्तविक नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले हैं और बीएससी के छात्र बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से पहचान मिली है।
सुरेंद्र अक्सर अजनार नदी के पास स्थित एक मंदिर जाते थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि नदी में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, कचरा और गंदगी जमा हो चुकी है। नदी से आने वाली दुर्गंध के कारण आसपास से गुजरने वाले लोग भी परेशान रहते थे।
यह स्थिति देखने के बाद सुरेंद्र ने नदी की सफाई के लिए मशीन बनाने के बारे में सोचा, लेकिन पर्याप्त पैसे और संसाधन उपलब्ध नहीं थे। मशीन तथा सरकारी सहायता का इंतजार करने के बजाय उन्होंने खुद फावड़ा उठाकर सफाई शुरू करने का फैसला किया।
26 जनवरी से शुरू किया अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, सुरेंद्र ने 26 जनवरी 2026 को अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था। शुरुआत में उनके कुछ दोस्त भी सफाई कार्य में साथ आए, लेकिन समय बीतने के साथ अधिकांश लोगों ने आना बंद कर दिया।
साथियों के पीछे हटने के बावजूद सुरेंद्र ने हार नहीं मानी। वह अकेले ही नदी में उतरकर प्लास्टिक, बोतलें, पॉलीथिन और जमा कचरा निकालते रहे। उनकी यह मेहनत कई दिनों तक लगातार जारी रही।
इस दौरान उन्होंने अपनी जेब से भी पैसे खर्च किए। अलग-अलग रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सुरेंद्र अब तक इस अभियान पर करीब 30 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। हालांकि, इस खर्च का कोई सार्वजनिक आधिकारिक लेखा उपलब्ध नहीं है।
गंदे पानी के कारण हुआ संक्रमण
अजनार नदी की सफाई करना सुरेंद्र के लिए आसान नहीं था। नदी के प्रदूषित पानी में उतरकर लगातार काम करने के कारण उनके हाथ और पैरों में संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होने की बात भी सामने आई है।
सफाई के दौरान सांप और दूसरे जीवों का खतरा भी बना रहता था। इसके बावजूद उन्होंने अपना अभियान जारी रखा। सुरेंद्र का कहना है कि वह नदी की खराब स्थिति देखकर चुप नहीं बैठ सकते थे।
उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने उनकी मेहनत की सराहना शुरू कर दी। कभी उन्हें पागल बताने वाले लोग अब उनके काम को युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहे हैं।
नगरपालिका को भी आगे आना पड़ा
बिट्टू की लगातार मेहनत और सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के बाद ब्यावरा नगरपालिका ने भी अजनार नदी की सफाई पर ध्यान दिया। रिपोर्टों के अनुसार, नदी से पुराने कचरे और मलबे को निकालने के लिए जेसीबी तथा पोकलेन मशीनों की सहायता ली जाने लगी।
इसका अर्थ यह नहीं है कि नदी पूरी तरह साफ या पुनर्जीवित हो चुकी है। नदी को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करने के लिए नियमित सफाई, सीवेज प्रबंधन और लोगों द्वारा दोबारा कचरा नहीं फेंकने जैसी स्थायी व्यवस्था जरूरी होगी।
फिर भी सुरेंद्र की पहल ने प्रशासन और स्थानीय लोगों का ध्यान नदी की बदहाल स्थिति की ओर जरूर खींचा है।
CM मोहन यादव ने बिट्टू को मिलने बुलाया
बिट्टू की कहानी और उनके सफाई अभियान की चर्चा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंची। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सुरेंद्र को मुलाकात के लिए बुलाया गया।
शुक्रवार शाम बिट्टू ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने उनकी पीठ थपथपाकर अजनार नदी की सफाई के लिए किए गए प्रयासों की प्रशंसा की और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री के साथ बिट्टू की मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। तस्वीर को AI बताने के विवाद से शुरू हुई चर्चा अब मुख्यमंत्री द्वारा सम्मान और सहायता का भरोसा दिए जाने तक पहुंच गई है।
रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट के अनुसार, सीएम ने कहा कि बिट्टू की मेहनत बेकार नहीं जाएगी।
आनंद महिंद्रा भी कर चुके हैं तारीफ
इससे पहले उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी बिट्टू तबाही के काम की सराहना की थी। उन्होंने बिट्टू की मेहनत को प्रेरणादायक बताते हुए सोशल मीडिया पर उनकी कहानी साझा की थी।
आनंद महिंद्रा की प्रतिक्रिया के बाद बिट्टू का अभियान देशभर में चर्चा का विषय बन गया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में युवाओं के लिए उदाहरण बताया।
सिर्फ तारीफ नहीं, स्थायी व्यवस्था की भी जरूरत
बिट्टू की मेहनत प्रेरणादायक है, लेकिन यह कहानी प्रशासन और समाज के सामने कई सवाल भी खड़े करती है। जिस नदी की सफाई स्थानीय निकाय और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है, उसकी गंदगी हटाने के लिए एक युवा को अपनी सेहत जोखिम में क्यों डालनी पड़ी?
नदी की सफाई केवल एक बार कचरा निकालने से पूरी नहीं होगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नदी में दोबारा प्लास्टिक, घरेलू कचरा और गंदा पानी न डाला जाए। इसके लिए निगरानी, कचरा प्रबंधन और नियमित सफाई की व्यवस्था जरूरी है।
बिट्टू तबाही ने अपने प्रयास से नदी की समस्या को सबके सामने ला दिया है। अब इस मुहिम की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब अजनार नदी को साफ रखने के लिए स्थानीय लोग और प्रशासन मिलकर स्थायी योजना पर काम करेंगे।
