नाना पाटेकर का निधन: रात 2:30 दोस्त को लिखा ‘अच्छा नहीं लग रहा’, कुछ घंटों बाद ली अंतिम सांस
गोवा के डोना पाउला स्थित घर में बेहोश मिले 75 वर्षीय अभिनेता; मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट से एक घंटे तक बचाने की कोशिश की, पोस्टमार्टम के बाद पुणे ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर
हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित घर में तबीयत बिगड़ने से कुछ घंटे पहले उन्होंने रात करीब 2:30 बजे एक दोस्त को संदेश भेजकर बताया था कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा। बाद में वह पसीने में भीगे और बेहोश मिले। मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट से एक घंटे तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। महाराष्ट्र सरकार ने उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का फैसला किया है।
रात 2:30 का संदेश, सुबह आई निधन की खबर
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मनोरंजन डेस्क | 8 अक्टूबर 2026
खबर में खास
अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन
गोवा के डोना पाउला स्थित घर में बिगड़ी तबीयत
रात करीब 2:30 बजे दोस्त को संदेश—अच्छा महसूस नहीं कर रहे
दोस्त सुबह करीब 4 बजे घर पहुंचा
नाना को पसीना आ रहा था और वह धीरे-धीरे बेहोश हो रहे थे
मेडिकल टीम ने घर से ही cardiac resuscitation शुरू की
अस्पताल पहुंचने के बाद भी करीब 45 मिनट से एक घंटे तक बचाने की कोशिश
अस्पताल ने cardiac arrest की जानकारी दी
मामला medico-legal होने के कारण पोस्टमार्टम
बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की
पार्थिव शरीर पुणे ले जाने की तैयारी
महाराष्ट्र सरकार ने राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार का फैसला किया
अंतिम संस्कार पुणे के फार्महाउस पर किए जाने की तैयारी
PM नरेंद्र मोदी समेत राजनीतिक और फिल्म जगत की हस्तियों ने जताया दुख
नाना को 3 National Film Awards और Padma Shri मिला था
‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों से मिली खास पहचान
किसानों की मदद के लिए सामाजिक कार्य में भी सक्रिय रहे
नहीं रहे भारतीय सिनेमा के ‘क्रांतिवीर’
गोवा: अपनी अलग आवाज, तीखे संवाद और बेहद स्वाभाविक अभिनय से हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया।
वह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर अचानक अस्वस्थ हुए थे। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन मेडिकल टीम उन्हें बचा नहीं सकी। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की है।
रात 2:30 बजे दोस्त को भेजा था संदेश
नाना पाटेकर के अंतिम घंटों को लेकर अस्पताल की ओर से सामने आई जानकारी ने उनके अचानक निधन की पूरी timeline साफ की है।
डॉक्टर के मुताबिक रात करीब 2:30 बजे नाना पाटेकर ने अपने एक दोस्त को संदेश भेजकर कहा था कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा है।
रात का समय होने की वजह से दोस्त तत्काल संदेश नहीं देख सका। बाद में सुबह करीब 4 बजे वह नाना के घर पहुंचा। उस समय नाना को काफी पसीना आ रहा था और उनकी हालत बिगड़ रही थी।
धीरे-धीरे हो गए बेहोश
बताया गया कि दोस्त के घर पहुंचने तक नाना धीरे-धीरे बेहोश होने लगे थे।
इसके बाद उनके caretaker ने अस्पताल से मदद मांगी। Emergency Response Team एंबुलेंस लेकर घर पहुंची।
मेडिकल टीम ने देखा कि नाना कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे, जिसके बाद वहीं से cardiac massage और resuscitation की कोशिश शुरू की गई। Moneycontrol
अस्पताल तक जारी रहा CPR
नाना पाटेकर को सुबह करीब 4:20 से 4:30 बजे के बीच अस्पताल ले जाया गया।
रास्ते में और अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टर उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे।
अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक करीब 45 मिनट से एक घंटे तक cardiac resuscitation की कोशिश की गई, लेकिन नाना ने प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्हें सुबह करीब साढ़े पांच बजे तक मृत घोषित कर दिया गया। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में घोषणा का समय 5:20 से 5:30 बजे के बीच बताया गया है।
Cardiac Arrest बना मौत की वजह
अस्पताल की शुरुआती जानकारी में नाना पाटेकर की मौत को cardiac arrest से जोड़ा गया है।
हालांकि यह मामला medico-legal case के रूप में दर्ज किया गया है और पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
इसलिए cardiac arrest की तत्काल वजह और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों की पूरी तस्वीर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद और साफ हो सकती है।
अंतिम समय परिवार नहीं, दोस्त और Caretaker थे साथ
अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि घटना के समय नाना पाटेकर का परिवार उनके साथ गोवा के घर पर मौजूद नहीं था।
उनके दोस्त और caretaker वहां थे।
बाद में उनके बेटे मल्हार पाटेकर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों तथा परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। पार्थिव शरीर कानूनी और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार को सौंपा जाना है।
पुणे के फार्महाउस पर अंतिम संस्कार
नाना पाटेकर की अंतिम इच्छा के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार पुणे के पास उनके फार्महाउस पर किए जाने की तैयारी है।
उनके पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं के बाद गोवा से पुणे ले जाया जाएगा।
राजकीय सम्मान से दी जाएगी अंतिम विदाई
महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने का फैसला किया है।
उनके मराठी रंगमंच, मराठी और हिंदी सिनेमा तथा सामाजिक कार्य में योगदान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
चार दिन पहले दिया था आखिरी सार्वजनिक भाषण
नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका 4 अक्टूबर को गोवा में दिया गया एक सार्वजनिक भाषण भी चर्चा में आ गया है।
उस कार्यक्रम में उन्होंने जीवन की अनिश्चितता का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें नहीं पता कि वह अगले दिन यहां होंगे या नहीं।
उस समय यह सामान्य दार्शनिक टिप्पणी थी, लेकिन सिर्फ चार दिन बाद उनके अचानक निधन के कारण अब वह बयान भावुक संदर्भ में याद किया जा रहा है।
PM मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें अलग पहचान और असाधारण विविधता वाला कलाकार बताया।
उन्होंने कहा कि नाना ने ऐसे कई किरदार दिए जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। उनके सामाजिक योगदान का भी उल्लेख किया गया।
फिल्म जगत से आने लगी श्रद्धांजलि
नाना पाटेकर के निधन के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें याद किया।
अक्षय कुमार ने उनके साथ ‘वेलकम’ और दूसरे प्रोजेक्ट्स में काम करने की यादें साझा करते हुए उनकी आवाज, अभिनय की तीव्रता और ईमानदारी को याद किया।
रजनीकांत समेत कई दूसरे कलाकारों ने भी उनके निधन पर दुख जताया।
साधारण किरदार को भी असाधारण बना देते थे नाना
नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र में विश्वनाथ पाटेकर के रूप में हुआ था।
उन्होंने थिएटर से अपनी शुरुआत की और बाद में फिल्मों की ओर आए।
1978 में ‘गमन’ से हिंदी फिल्मों में शुरुआती पहचान मिली, लेकिन अगले दशक में उन्होंने अपनी अलग अभिनय शैली से तेजी से जगह बनाई। AP News
उनकी खासियत सिर्फ संवाद बोलना नहीं थी। वह लंबे मौन, चेहरे के भाव और अचानक बदलते गुस्से या भावुकता से किरदार को अलग स्तर पर ले जाते थे।
‘परिंदा’ ने बदल दिया करियर
1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में गैंगस्टर अन्ना का किरदार नाना पाटेकर के करियर का बड़ा मोड़ बना।
इस भूमिका के लिए उन्हें National Film Award मिला और हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान बेहद मजबूत हो गई। The Business Standard
इसके बाद वह मुख्यधारा और गंभीर—दोनों तरह के सिनेमा में लगातार काम करते रहे।
‘क्रांतिवीर’ ने बनाया घर-घर का नाम
1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ ने नाना पाटेकर को लोकप्रियता के नए स्तर पर पहुंचा दिया।
प्रमुख किरदार और तीखे संवादों के लिए उन्हें National Film Award for Best Actor मिला।
इसके बाद ‘अग्निसाक्षी’ में भी उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। नाना के नाम कुल तीन National Film Awards रहे।
गंभीर अभिनय से कॉमेडी तक
नाना पाटेकर ने खुद को सिर्फ गंभीर किरदारों तक सीमित नहीं रखा।
‘अब तक छप्पन’ में सख्त पुलिस अधिकारी से लेकर ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी जैसे कॉमिक किरदार तक उन्होंने बिल्कुल अलग रंग दिखाए।
‘राजू बन गया जेंटलमैन’, ‘तिरंगा’, ‘अपहरण’, ‘टैक्सी नंबर 9211’ और कई दूसरी फिल्मों में भी उनके किरदार लंबे समय तक याद किए गए। Moneycontrol
तीन National Awards और Padma Shri
करीब पांच दशक के अभिनय सफर में नाना पाटेकर को कई बड़े पुरस्कार मिले।
उन्हें तीन National Film Awards से सम्मानित किया गया और 2013 में भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में योगदान के लिए Padma Shri दिया। AP News
उन्होंने अभिनय के साथ फिल्म निर्देशन भी किया। ‘प्रहार’ उनके निर्देशन की चर्चित फिल्म रही।
आखिरी समय तक फिल्मों में सक्रिय
75 साल की उम्र में भी नाना ने अभिनय से दूरी नहीं बनाई थी।
2026 में उनकी theatrical फिल्म ‘O'Romeo’ रिलीज हुई थी। इसके अलावा हाल के प्रोजेक्ट्स में वह अलग-अलग भूमिकाओं और cameo में दिखाई दिए। Hindustan Times
यानी उनका निधन ऐसे समय हुआ जब वह अभी भी सक्रिय कलाकार थे।
सिर्फ अभिनेता नहीं, किसानों के लिए भी किया काम
नाना पाटेकर का नाम सामाजिक कार्यों से भी जुड़ा रहा।
महाराष्ट्र में सूखे और किसानों की मुश्किलों के दौरान उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ NAAM Foundation के जरिए किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद का काम किया।
उनके निधन के बाद महाराष्ट्र के नेताओं ने उनके सामाजिक सरोकारों को भी याद किया है।
क्यों अलग थे नाना पाटेकर?
नाना की सबसे बड़ी पहचान उनकी शैली थी।
उनकी आवाज, dialogue delivery और किरदार निभाने का तरीका किसी दूसरे अभिनेता की नकल नहीं लगता था।
‘परिंदा’ का गैंगस्टर हो, ‘क्रांतिवीर’ का गुस्सैल आम आदमी, ‘अब तक छप्पन’ का पुलिस अधिकारी या ‘वेलकम’ का हास्य किरदार—हर जगह उनका अंदाज अलग रहा।
यही कारण है कि उनकी कई फिल्मों से ज्यादा उनके किरदार और संवाद दर्शकों की याद में रह गए।
नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा ने ऐसा अभिनेता खो दिया जिसकी पहचान सिर्फ फिल्मों की संख्या से नहीं, बल्कि उसके निभाए किरदारों की ताकत से बनी थी। रात 2:30 बजे दोस्त को भेजा ‘अच्छा नहीं लग रहा’ वाला संदेश उनके जीवन के आखिरी घंटों की अचानकता बताता है। डॉक्टरों ने लंबी कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अब पुणे के उनके प्रिय फार्महाउस पर राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई की तैयारी है—लेकिन ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसे किरदारों में उनकी आवाज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।